10 Class social science Economics Notes in hindi chapter 5 Consumer Rights अध्याय - 5 उपभोक्ता अधिकार

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10 Class social science Economics Notes in hindi chapter 5 Consumer Rights अध्याय - 5 उपभोक्ता अधिकार

CBSE Revision Notes for CBSE Class 10 Social Science ECO Consumer Rights ECO Consumer Awareness: How consumer is exploited (one or two simple case studies) factors causing exploitation of consumers; Rise of consumer awareness; how a consumer should be in a market; role of government in consumer protection.

Class 10th social science Economics chapter 5 Consumer Rights Notes in Hindi 


📚 अध्याय - 5 📚
👉 उपभोक्ता अधिकार 👈

✳️ उपभोक्ता :- 

🔹 बाजार से अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुएं खरीदने वाले लोग । 

✳️ उत्पादक :- 

🔹 दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं का निर्माण या उत्पादन करने वाले लोग । 

✳️ उपभोक्ताओं के अधिकार :-

🔹 उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए कानून द्वारा दिए गए अधिकार जैसे :-

👉  सुरक्षा का अधिकार
👉  सूचना का अधिकार
👉 चुनने का अधिकार 
👉 क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार 
👉 उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार 

✳️ उपभोक्ताओं के शोषण के कारण :-

🔹  सीमित सूचना 
🔹 सीमित आपूर्ति 
🔹 सीमित प्रतिस्पर्धा 
🔹 साक्षरता कम होना

✳️ उपभोक्ताओं के कर्त्तव्य :-

🔹 कोई भी माल खरीदते समय उपभोक्ताओं को सामान की गुणवत्ता अवश्य देखनी चाहिए । जहां भी संभव हो गारंटी कार्ड अवश्य लेना चाहिए ।
🔹 खरीदे गए सामान व सेवा की रसीद अवश्यक लेनी चाहिए । 
🔹 अपनी वास्तविक समस्या की शिकायत अवश्यक करनी चाहिए । 
🔹 आई.एस.आई. तथा एगमार्क निशानों वाला सामान ही खरीदे । 
🔹 अपने अधिकारों की जानकारी अवश्यक होनी चाहिए और 
🔹 आवश्यकता पड़ने पर उन अधिकारों का प्रयोग भी करना चाहिए । 

✳️ उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया की सीमाएँ :-

🔹  उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया जटिल , खर्चीली और समय साध्य साबित हो रही है ।
🔹 कई बार उपभोक्ताओं को वकीलों का सहारा लेना पडता है । यह मुकदमें अदालती कार्यवाहियों में शामिल होने और आगे बढ़ने आदि में काफी समय लेते है । 
🔹अधिकांश खरीददारियों के समय रसीद नहीं दी जाती हैं ? ऐसी स्थिति में प्रमाण जुटाना आसान नहीं होता है । 
🔹 बाज़ार में अधिकांश खरीददारियाँ छोटे फुटकर दुकानों से होती है । 
🔹 श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनों के लागू होने के बावजूद खास तौर से असंगठित क्षेत्रा में ये कमजोर है । 
🔹 इस प्रकार बाज़ारों के कार्य करने के लिए नियमों और विनियमों का प्रायः पालन नहीं होता ।

✳️ उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 ( कोपरा ) :-

🔹 उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया कानून । 
🔹 कोपरा के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए जिला राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्रा स्थापित किया गया है । 
🔹 जिला स्तर पर 20 लाख राज्य स्तर पर 20 लाख से एक करोड तक तथा राष्ट्रीय स्तर की अदालतें 1 करोड से उपर की दावेदारी से संबंधित मुकदमों को देखती है ।

✳️ भारत में उपभोक्ता आंदोलन :-

🔹 भारत के व्यापारियों के बीच मिलावट, कालाबाजारी, जमाखोरी, कम वजन, आदि की परंपरा काफी पुरानी है। भारत में उपभोक्ता आंदोलन 1960 के दशक में शुरु हुए थे। 1970 के दशक तक इस तरह के आंदोलन केवल अखबारों में लेख लिखने और प्रदर्शनी लगाने तक ही सीमित होते थे। लेकिन हाल के वर्षों में इस आंदोलन में गति आई है।

🔹 लोग विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से इतने अधिक असंतुष्ट हो गये थे कि उनके पास आंदोलन करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। एक लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने भी उपभोक्ताओं की सुधि ली। इसके परिणामस्वरूप सरकार ने 1986 में कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट (कोपरा) को लागू किया।

✳️ कंज्यूमर फोरम :-

🔹 भारत में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिये स्थानीय स्तर पर कई संस्थाओं का गठन हुआ है। इन संस्थाओं को कंज्यूमर फोरम या कंज्यूमर प्रोटेक्शन काउंसिल कहते हैं। इन संस्थाओं का काम है किसी भी उपभोक्ता को कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा दायर करने में मार्गदर्शन करना। कई बार ऐसी संस्थाएँ कंज्यूमर कोर्ट में उपभोक्ता की तरफ से वकालत भी करती हैं। ऐसे संस्थानों को सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जाता है ताकि उपरोक्ता जागरूकता की दिशा में ठोस काम हो सके।

🔹 आजकल कई रिहायशी इलाकों में रेजिडेंट वेलफेअर एसोसियेशन होते हैं। यदि ऐसे किसी एसोसियेशन के किसी भी सदस्य को किसी विक्रेता या सर्विस प्रोवाइडर द्वारा ठगा गया हो तो ये उस सदस्य के लिये मुकदमा भी लड़ते हैं।

✳️ कंज्यूमर कोर्ट :-

🔹 यह एक अर्ध-न्यायिक व्यवस्था है जिसमें तीन लेयर होते हैं। इन स्तरों के नाम हैं जिला स्तर के कोर्ट, राज्य स्तर के कोर्ट और राष्ट्रीय स्तर के कोर्ट। 20 लाख रुपये तक के क्लेम वाले केस जिला स्तर के कोर्ट में सुनवाई के लिये जाते हैं। 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के केस राज्य स्तर के कोर्ट में जाते हैं। 1 करोड़ से अधिक के क्लेम वाले केस राष्ट्रीय स्तर के कंज्यूमर कोर्ट में जाते हैं। यदि कोई केस जिला स्तर के कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया जाता है तो उपभोक्ता को राज्य स्तर पर; और उसके बाद; राष्ट्रीय स्तर पर अपील करने का अधिकार होता है।

✳️ राष्ट्रीय कंज्यूमर दिवस :-

🔹 24 दिसंबर को राष्ट्रीय कंज्यूमर दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह वही दिन है जब भारतीय संसद ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट लागू किया था। भारत उन गिने चुने देशों में से है जहाँ उपभोक्ता की सुनवाई के लिये अलग से कोर्ट हैं। हाल के समय में उपभोक्ता आंदोलन ने भारत में अच्छी पैठ बनाई है। ताजा आँकड़ों के अनुसार भारत में 700 से अधिक कंज्यूमर ग्रुप हैं। उनमे से 20 – 25 अच्छी तरह से संगठित हैं और अपने काम के लिये जाने जाते हैं।

🔹 लेकिन उपभोक्ता की सुनवाई की प्रक्रिया जटिल, महंगी और लंबी होती जा रही है। वकीलों की ऊँची फीस के कारण अक्सर उपभोक्ता मुकदमे लड़ने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाता है।


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