10 Class Science Notes in hindi chapter 12 Electricity अध्याय - 12 विद्युत

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10 Class Science Notes in hindi chapter 12 Electricity अध्याय - 12 विद्युत

CBSE Revision Notes for CBSE Class 10 Science Electricity Electric current, potential difference and electric current. Ohm's law; Resistance, Resistivity, Factors on which the resistance of a conductor depends. Series combination of resistors, parallel combination of resistors and its applications in daily life. Heating effect of electric current and its applications in daily life. Electric power, Interrelation between P, V, I and R.

Class 10th Science chapter 12 Electricity Notes in Hindi 

📚 अध्याय - 12 📚
👉 विद्युत 👈


✳️ आवेश :- 

🔹 आवेश परमाणु का एक मूल कण होता है । यह धनात्मक भी हो सकता है और ऋणात्मक भी । 
🔹 समान आवेश एक - दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं । 
🔹 असमान आवेश एक - दूसरे को आकर्षित करते हैं ।

👉  कूलॉम ( c ) आवेश का SI मात्रक है । 
👉 1 कूलॉम आवेश = 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रानों पर उपस्थित आवेश 
👉 1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 × 10⁻¹⁹C ( ऋणात्मक आवेश ) 
👉 Q = ne 
👉 Q = कुल आवेश
👉 n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या 
👉 e = एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 

✳️ विद्युत धारा :-

🔹 आवेश के प्रवाहित होने की दर को विद्युत धारा कहते हैं ।

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✳️ विद्युत धारा को ऐमीटर द्वारा मापा जाता है ।

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🔹 ऐमीटर का प्रतिरोध कम होता है तथा हमेशा श्रेणी क्रम में जुड़ता है । 
🔹 विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉन के प्रवाहित होने की दिशा के विपरीत मानी जाती है । क्योंकि जिस समय विद्युत की परिघटना का सर्वप्रथम प्रेक्षण किया था इलेक्ट्रानों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी अतः विद्युत धारा को धनावेशों का प्रवाह माना गया ।

✳️ विद्युत विभव :- 

🔹 किसी बिन्दु पर स्थित ईकाई विन्दुवत धनावेश में संग्रहित वैधुत स्थितिज ऊर्जा उस विन्दु के विद्युत विभव के बराबर होती है ।

✳️ विभवांतर ( V ) :-

🔹  एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में किया गया कार्य विधुत विभवांतर कहलाता है ।

🔹 विधुत विभवांतर का मात्रक ( V ) वोल्ट है ।

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🔹 1 वोल्ट : जब 1 कूलॉम आवेश को लाने के लिए 1 जूल का कार्य होता है तो विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता है । 
🔹 1V = 1JC⁻¹

🔹 विभवांतर को विभवमापी ( वोल्टमीटर ) से मापा जाता है जो परिपथ में समान्तर क्रम में सयोजित किया जाता है ।

✳️ वोल्ट मीटर :-

🔹 विभवांतर को मापने की युक्ति इसका प्रतिरोध ज्यादा होता है तथा हमेशा पार्श्वक्रम में जुड़ता है ।

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✳️ सेल :- 

🔹 यह एक सरल युक्ति है जो विभवांतर को बनाए रखती है । 
🔹 विद्युत धारा हमेशा उच्च विभवांतर से निम्न विभवांतर की तरफ प्रवाहित होती है ।

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✳️ विद्युत परिपथ आरेख :- 

🔹 परिपथ एक सेल , एक प्लग कुँजी , वैधुत अवयव तथा संयोजी तारों से मिलकर बनता है । विद्युत परिपथो का ऐसा सुविधाजनक आरेख उनके विभिन्न अवयवो की प्रतीको द्वारा निरूपित करके ( किया जा सकता है )  बनाया जा सकता हैं ।

✳️ विद्युत परिपय में सामान्यतः उपयोग होने वाले कुछ अवयवों के प्रतीक :

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✳️ ओम का नियम :-

🔹  किसी विद्युत परिपथ में धातु के तार के दो सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के समानुपाती होता है परन्तु तार का तापमान समान रहना चाहिए ।
                             V × R 
                             V = IR 
🔹 R एक नियतांक है जिसे तार का प्रतिरोध कहते हैं ।
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✳️ प्रतिरोध :-

🔹  यह चालक का वह गुण है जिसके कारण वह प्रवाहित होने वाली धारा का विरोध करता है । 

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🔹 जब परिपथ में से 1 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो तथा विभवांतर हो तो प्रतिरोध 1 ओम कहलाता है । 

✳️ धारा नियंत्रक :-

🔹 परिपथ में प्रतिरोध को परिवर्तित करने के लिए जिस युक्ति का उपयोग किया जाता है उसे धारा नियंत्रक कहते हैं । 

✳️ कारक जिन पर एक चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है : 

🔹 ( i ) चालक की लम्बाई के समानुपाती होता है । 
🔹 ( ii ) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है । 
🔹 ( iii ) तापमान के समानुपाती होता है । 
🔹 ( iv ) पदार्थ की पृक्रति पर भी निर्भर करता है । 

✳️  विद्युत प्रतिरोधकता :- 

🔹 1 मीटर भुजा वाले घन के विपरीत फलकों में से धारा गुजरने पर जो प्रतिरोध उत्पन्न होता है वह प्रतिरोधता कहलाता है । 

✳️ SI मात्रक Ωm ( ओम मीटर ) :-

🔹  प्रतिरोधकता चालक की लम्बाई व अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के साथ नहीं बदलती परन्तु तापमान के साथ परिवर्तित होती है । 
🔹 धातुओं व मिश्रधातुओं का प्रतिरोधकता परिसर - 10⁻⁸ -10⁻⁶ Ωm ।
🔹 मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं से अपेक्षाकृतः अधिक होती है । 
🔹 मिश्र धातुओं का उच्च तापमान पर शीघ्र ही उपचयन ( दहन ) नहीं होता अतः इनका उपयोग तापन युक्तियों में होता है । 
🔹 तांबा व ऐलूमिनियम का उपयोग विद्युत संरचरण के लिए किया जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधकता कम होती है ।

✳️ { प्रतिरोधको का संयोजन } या { प्रतिरोधको के निकाय का प्रतिरोध }

👉  प्रतिरोधकों के संयोजित करने की दी विधियां है ।-

🔹  1 . एक विद्युत परिपथ जिसमे R₁ , R₂ एव R₃ प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को एक सिरे से दूसरा सिरा मिलाकर जोडा जाए प्रतिरोधको का श्रेणीक्रम संयोजन कहलाता है ।

✳️ ऐसा विद्युत परिपथ जिसमे R₁ , R₂ एव R₃ प्रतिरोध के प्रतिरोधकों को , उसके प्रथम सिरे को एक साथ मिलाकर एव दूसरे सिरे को एक साथ मिला कर जोड़ा जाता है । प्रतिरोधको का समान्तरक्रम संयोजन कहलाता है ।

✳️ प्रतिरोधकों का श्रेणी क्रम संयोजन :- 

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🔹 जब दो या तीन प्रतिरोधकों को एक सिरे से दूसरा सिरा मिलाकर जोड़ा जाता है तो संयोजन श्रेणीक्रम संयोजन कहलाता है । 
🔹 श्रेणीक्रम में कुल प्रभावित प्रतिरोध : 
       RSR₁ + R₂ + R₃
प्रत्येक प्रतिरोधक में से एक समान धारा प्रवाहित होती है । 
तथा कुल विभवांतर = व्यष्टिगत प्रतिरोधकों के विभवांतर का योग । 

V = V + V + V
V = IR V = IR V = IR
V + V + V = IR + IR₂ + IR
V = I(R + R + R) (V + V + V = V) 
IR = I(R + R + R
R = R + R + R 

अत : एकल तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से बड़ा है ।

✳️  पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधक :

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🔹 पार्श्वक्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर उपयोग किए गए विभवांतर के बराबर होता है । तथा कुल धारा प्रत्येक व्यष्टिगत प्रतिरोधक में से गुजरने वाली धाराओं के योग के बराबर होती है । 
I = I + I + I
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एकल तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम प्रथक । 
प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है ।

✳️ श्रेणीक्रम संयोजन की तुलना में पार्यक्रम संयोजन के लाभ : -

🔹 ( 1 ) श्रेणीक्रम संयोजन में जब एक अवयव खराब हो जाता है तो परिपथ टूट जाता है तथा कोई भी अवयव काम नहीं करता । 
🔹 ( 2 ) अलग - अलग अवयवों में अलग - अलग धारा की जरूरत होती है , यह गुण श्रेणी क्रम में उपयुक्त नहीं होता है क्योंकि श्रेणीक्रम में धारा एक जैसी रहती है । 
🔹 ( 3 ) पार्श्वक्रम संयोजन में प्रतिरोध कम होता है ।

✳️  विद्युत धारा का तापीय प्रभाव :-

🔹 यदि एक विद्युत् परिपथ विशुद्ध रूप से प्रतिरोधक है तो स्रोत की ऊर्जा पूर्ण रूप से ऊष्मा के रूप में क्षयित होती है , इसे विद्युत् धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं ।
ऊर्जा = शक्ति x समय 

H = P × t 
H = VIt।       P = VI
H = I²Rt       V = IR 
                     H = ऊष्मा ऊर्जा 
अत : उत्पन्न ऊर्जा ( ऊष्मा ) = I²Rt 
जूल का विद्युत् धारा का तापन नियम :

✳️ इस नियम के अनुसार :-

🔹 ( 1 ) किसी प्रतिरोध में तत्पन्न उष्मा विद्युत् धारा के वर्ग के समानुपाती होती है । 
🔹 ( 2 ) प्रतिरोध के समानुपाती होती है ।
🔹 ( 3 ) विद्युत धारा के प्रवाहित होने वाले समय के समानुपाती होती है । 

🔹 तापन प्रभाव हीटर , प्रेस आदि में वांछनीय होता है परन्तु कम्प्यूटर , मोबाइल आदि में अवांछनीय होता है । 

🔹 विद्युत बल्ब में अधिकांश शक्ति ऊष्मा के रूप प्रकट होती है तथा कुछ भाग प्रकाश के रूप में उत्सर्जित होता है । 

🔹 विद्युत बल्ब का तंतु टंगस्टन का बना होता है क्योंकि 
( 1 ) यह उच्च तापमान पर उपचयित नहीं होता है । 
( 2 ) इसका गलनांक उच्च ( 3380 ° C ) है । 
( 3 ) बल्बों में रासानिक दृष्टि से अक्रिय नाइट्रोजन तथा आर्गन गैस भरी जाती है जिससे तंतु की आयु में वृद्धि हो जाती है । 

✳️ विद्युत शक्ति : ऊर्जा के उपभुक्त होने की दर को शक्ति कहते हैं । 
प्रतीक = P P = VI
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शक्ति का SI मात्रक = वाट है । 
1 वाट 1 वोल्ट × 1 ऐम्पियर 
ऊर्जा का व्यावहारिक मात्रक = किलोवाट घंटा 
                                       = Kwh 
1 kwh = 3.6 x 10⁶J 
1 kwh = विद्युत ऊर्जा की एक यूनिट

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