10 Class social science Civics Notes in hindi chapter 1 Power sharing अध्याय - 1 सत्ता की साझेदारी

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10 Class social science Civics Notes in hindi chapter 1 Power sharing अध्याय - 1 सत्ता की साझेदारी

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Class 10th social science Civics chapter 1 Power sharing Notes in Hindi 

📚 अध्याय - 1 📚
👉 सत्ता की साझेदारी 👈

✳️सत्ता की साझेदारी :-


🔹 जब किसी शासन व्यवस्था में हर सामाजिक समूह और समुदाय की भागीदारी सरकार में होती है तो इसे सत्ता की साझेदारी कहते हैं । लोकतंत्र का मूलमंत्र है सत्ता की साझेदारी । किसी भी लोकतांत्रिक सरकार में हर नागरिक का हिस्सा होता है । यह हिस्सा भागीदारी के द्वारा संभव हो पाता है । इस प्रकार की शासन व्यवस्था में नागरिकों को इस बात का अधिकार होता है कि शासन के तरीकों के बारे में उनसे सलाह ली जाये । 


✳️ बेल्जियम के समाज की जातीय बनावट :-


🔹 बेलजियम यूरोप का एक छोटा सा देश है जिसकी आबादी हरियाणा से भी आते हैं परंतु इसके समाज की बनावट बड़ी जटिल है। इसमें रहने वाले 59 % लोग डच भाषा बोलते हैं 40 % लोग फ्रेंच बोलते हैं बाकी 1 % लोग जर्मन बोलते हैं ।


✳️ बेल्जियम की समझदारी :-

🔹 ऐसे भाषाई विविधताओं कई बार सांस्कृतिक और राजनीतिक झगड़े का कारण बन जाती है परंतु बेल्जियम के लोगों ने एक नवीन प्रकार कि शासन पद्धति अपना कर सांस्कृतिक विविधताओं एवं क्षेत्रीय अंतरों से होने वाले आपसी मतभेदों को दूर कर लिया उन्हें बार बार संविधान में संशोधन इस संसार से किया कि किसी भी व्यक्ति को बेगानेपन का एहसास न हो और सभी मिलजुल कर रह सकें । सारा विश्व बेल्जियम की इस समझदारी की दाद देता है । 

✳️ श्रीलंका के समाज की जातीय बनावट :-


🔹 श्रीलंका एक द्वीपीय देश है जो भारत के दक्षिण तट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । इसकी आबादी कोई दो करोड़ के लगभग है अर्थात हरियाणा के बराबर । बेल्जियम की भांति यहां भी कई जातिय समूहों के लोग रहते हैं । देश की आबादी का कोई 74 % भाग सिहलियों का है जबकि कोई 18 % लोग तमिल हैं।बाकी भाग अन्य छोटे -छोटे जातीय समूहों जैसे ईसाइयों और मुसलमानों का है देश युद्ध पूर्वी भागों में तमिल लोग अधिक है जबकि देश के बाकी हिस्सों में सिहलीं लोग बहुसंख्या में हैं।यदि श्रीलंका में लोग चाहते तो वे भी बेल्जियम की भांति अपनी जातिय मसले का कोई उचित हल निकाल सकते थे परन्तु वहाँ के बहुसंख्यक समुदाय अथार्थ सिहलियों ने अपने बहुसंख्यकवाद को दूसरों पर थोपने का प्रयत्न किया जिससे वहां ग्रह युद्ध शुरू हो गया और आज तक थमने का नाम नहीं ले रहा है ।


✳️ श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद :-


🔹 बहुसंख्यक वाद का अर्थ है बहुसंख्यक समुदाय मनचाहे ढंग से देश का शासन चला सकता है । अल्पसंख्यक समुदाय की अवहेलना करके ।


🔹 सिहंलियों को विश्व विद्यालयों और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी गई ।

🔹सिहंलियों को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया जिससे तमिलों की अवहेलना हुई । 

🔹 1956 में एक कानून पास किया गया सिहली समुदाय की सर्वोच्चता स्थापित करने हेतु । 

🔹 नए संविधान में यह प्रावधान किया गया कि सरकार बौद्ध मठ कोसंरक्षण और बढ़ावा देगी ।

✳️ भारत में सत्ता की साझेदारी :-


🔹  भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है । यहाँ के नागरिक सीधे मताधिकार के माध्यम से अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं । लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि एक सरकार को चुनते हैं । इस तरह से एक चुनी हुई सरकार रोजमर्रा का शासन चलाती है और नये नियम बनाती है या पुराने नियमों और कानूनों में संशोधन करती है । 


🔹 किसी भी लोकतंत्र में हर प्रकार की राजनैतिक शक्ति का स्रोत प्रजा होती है । यह लोकतंत्र का एक मूलभूत सिद्धांत है । ऐसी शासन व्यवस्था में लोग स्वराज की संस्थाओं के माध्यम से अपने आप पर शासन करते हैं । एक समुचित लोकतांत्रिक सरकार में समाज के विविध समूहों और मतों को उचित सम्मान दिया जाता है । जन नीतियों के निर्माण में हर नागरिक की आवाज सुनी जाती है । इसलिए लोकतंत्र में यह जरूरी हो जाता है कि राजनैतिक सत्ता का बँटवारा अधिक से अधिक नागरिकों के बीच हो ।

✳️ सत्ता की साझेदारी की आवश्यकता :-

🔹 समाज में सौहार्द्र और शांति बनाये रखने के लिये सत्ता की साझेदारी जरूरी है । इससे विभिन्न सामाजिक समूहों में टकराव को कम करने में मदद मिलती ।


🔹 किसी भी समाज में बहुसंख्यक के आतंक का खतरा बना रहता है । बहुसंख्यक का आतंक न केवल अल्पसंख्यक समूह को तबाह करता है बल्कि स्वयं को भी तबाह करता है । सत्ता की साझेदारी के माध्यम से बहुसंख्यक के आतंक से बचा जा सकता है । 


🔹 लोगों की आवाज ही लोकतांत्रिक सरकार की नींव बनाती है । इसलिये यह कहा जा सकता है कि लोकतंत्र की आत्मा का सम्मान रखने के लिए सत्ता की साझेदारी जरूरी है । 


🔹 सत्ता की साझेदारी के दो कारण होते हैं । एक है समझदारी भरा कारण और दूसरा है नैतिक कारण । सत्ता की साझेदारी का समझदारी भरा कारण है समाज में टकराव और बहुसंख्यक के आतंक को रोकना । सत्ता की साझेदारी का नैतिक कारण है लोकतंत्र की आत्मा को अक्षुण्ण रखना । 


✳️ सत्ता की साझेदारी के रूप :-


✳️ शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा :-


🔹 लोकतंत्र में शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा होता है । उदाहरण के लिए ; विधायिका , कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा । इस प्रकार के बँटवारे में सत्ता के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हैं । इसलिए इस प्रकार के बँटवारे को क्षैतिज बँटवारा कहते हैं । 


🔹 शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता के बँटवारे से यह सुनिश्चित हो जाता है कि शासन के किसी भी एक अंग के पास असीमित शक्ति न हो । यह विभिन्न संस्थानों के बीच शक्ति के संतुलन को सुनिश्चित करता है । 


🔹 कार्यपालिका सत्ता का उपयोग करती है लेकिन वह संसद के अधीन होती है । संसद को कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होता है लेकिन उसे जनता को जवाब देना होता है । न्यायपालिका इन दोनों से स्वतंत्र होती है । न्यायपालिका का काम होता है यह देखना कि विधायिका और कार्यपालिका सभी नियमों का सही ढंग से पालन कर रही है या नहीं ।

✳️ विभिन्न स्तरों पर सत्ता का बँटवारा :-


🔹भारत जैसे विशाल देश में सरकार चलाने के लिए यह जरूरी हो जाता है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो । भारत सरकार को दो मुख्य स्तरों में बाँटा गया है ; केंद्र सरकार और राज्य सरकार । केंद्र सरकार पर पूरे राष्ट्र की जिम्मेदारी होती है । गणराज्य की विभिन्न इकाइयों की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होती है । दोनों सरकारों के अधिकार क्षेत्र में अलग अलग विषय आते हैं । कुछ ऐसे विषय भी होते हैं जो साझा लिस्ट में रहते हैं और जिनपर राज्य और केंद्र सरकारों दोनों का अधिकार होता है । 


✳️ सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा :-


🔹 भारत विविधताओं से भरा देश है । यहाँ अनेक सामाजिक , भाषाई और जातीय समूह हैं । इन विभिन्न समूहों के बीच भी सत्ता का बँटवारा होता है । समाज के पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया जाता है ताकि सरकारी तंत्र में उनका सही प्रतिनिधित्व हो सके । उदाहरण के लिए ; अल्पसंख्यक समुदाय , अन्य पिछड़ी जातियों , अनुसूचित जाति और अनुसूचिक जनजाति के लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्राप्त है ।


✳️ विभिन्न प्रकार के दबाव समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा :-


🔹 सत्ता का बँटवारा विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के बीच होता है । सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी या सबसे बड़े राजनैतिक गठबंधन को शासन करने का मौका मिलता है । बची हुई पार्टियाँ विपक्ष का निर्माण करती हैं । विपक्ष का काम होता है यह सुनिश्चित करना कि सत्तारूढ़ पार्टी लोगों की इच्छा के अनुसार काम करे । विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के लोग विभिन्न कमेटियों के अध्यक्ष बनते हैं । यह राजनैतिक पार्टियो 6 के बीच सत्ता की साझेदारी का एक अच्छा उदाहरण है । 


🔹 राजनैतिक पार्टियों के अलावा देश में कई दबाव समूह होते हैं । उदाहरण के लिए ; एसोचैम , छात्र संगठन , मजदूर यूनियन , आदि । ऐसे संगठनों के प्रतिनिधि कई नीति निर्धारक अंगों के भाग बनते हैं । इस तरह से दबाव समूहों को भी सत्ता में साझेदारी मिलती है ।

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