10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements अध्याय - 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Share:
10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements अध्याय - 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

CBSE Revision Notes for CBSE Class 10 Science Periodic Classification of Elements Periodic classification of elements: Need for classification, Modern periodic table, gradation in properties, valency, atomic number, metallic and non-metallic properties.

Class 10th Science chapter 5 Periodic Classification of Elements Notes in Hindi 

📚 अध्याय - 5 📚
👉 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 👈

हमारे आस - पास के पदार्थ तत्व , मिश्रण एवं यौगिक के रूप में उपस्थित रहते हैं । 

✳️  तत्व :- 

🔹 ऐसे पदार्थ जो एक ही प्रकार के अणुओं से मिलकर बने हैं , तत्व कहलाते हैं । उदाहरण— सोडियम , सोना , मैग्नीशियम ।

🔹 आज तक हम 118 तत्वों की जानकारी प्राप्त कर चुके है । इन सभी तत्वों के गुण भिन्न - भिन्न है । इनमें से 94 तत्व प्राकृतिक रूप में पाये जाते है ।

🔹  विभिन्न तत्वों के खोज के साथ वैज्ञानिक इनके गुणों को खोजना आरम्भ कर दिये । तत्वों की इन जानकारियों को व्यवस्थित करना थोड़ा कठिन प्रतीत हुआ इसी कारण इसका वर्गीकरण किया गया जिससे तत्वों के गुणों का आसानी से अध्ययन किया जा सके ।


10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✳️ अव्यवस्थित को व्यवस्थित करना - तत्वों के वर्गीकरण के प्रारम्भिक प्रयास :-

🔹 सबसे पहले , ज्ञात तत्वों को धातु एवं अधातु में वर्गीकृत किया गया । जैसे - जैसे तत्वों एव उनके गुणधर्मो के बारे मे हमारा ज्ञान बढ़ता गया वैसे - वैसे उन्हे वर्गीकृत करने के प्रयास किये गये ।

✳️ वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों ?

🔹 तत्व को सुव्यवस्थित ढंग से पढ़ने के लिए तथा उनके अध्ययन को आसान बनाने हेतु उनको वर्गीकृत किया गया ।

✳️ डॉबेराइनर के त्रिक सिद्धान्त :-

🔹 सन 1817 में जर्मन रसायनज्ञ वुल्फणांण डॉबेराइनर ने समान गुणधर्मो वाले तत्वों को समूहो में व्यवस्थित करने का प्रयास किया ।

🔹 जब तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार के अनुसार क्रमवार लगाया जाए तो तीन तत्वों के समूह प्राप्त होते हैं जिन्हें त्रिक कहा गया । त्रिक के मध्य तत्व का परमाणु भार अन्य दो तत्वों के परमाणु भार का माध्य होता है ।

🔹 उदहारण :-
10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

सीमाएँ :- उस समय तक ज्ञात तत्वों में केवल तीन त्रिक ही ज्ञात कर सके थे । 

🔹 डॉबेराइनर त्रिक 10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✳️ न्यूलैंड्स का अष्टक सिद्धान्त :-

🔹 सन 1866 में अंग्रेज वैज्ञानिक जॉन न्यूलैंड्स ने ज्ञात तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्थित किया उन्होंने सबसे कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व हाइड्रोजन से आरम्भ किया तथा 56 तत्व योरियम पर इसे समाप्त किया । उन्होंने पाया की प्रत्येक आठवे तत्व का गुणधर्म पहले तत्व के गुणधर्म के समान है । उन्हाने इसकी तुलना संगीत के अष्टक से की इसीलिए उन्होने इसे अष्टक का सिद्धांत कहा ।

🔹 न्यूलैंड्स के अष्टक में लिथियम एवं सोडियम धातु के गुण समान हैं । सोडियम लिथियम के बाद आठवा तत्व है । इसी तरह वेरिलियम  एव मैग्नीशियम में अधिक ससमानता है ।

✳️ इस सिद्धांत की कमियाँ :— 

( 1 ) यह नियम केवल कैल्शियम धातु ( हल्के तत्वों तक ) लागू होता है ।
( 2 ) नए तत्वों के गुण इस सारणी से मेल नहीं खाते थे । 
( 3 ) सारणी में तत्वों को समंजित करने के लिए न केवल दो तत्वों को एक साथ रख दिया बल्कि असमान तत्वों जिनके गुणों में कोई समानता नहीं थी , एक स्थान में रख दिया ।


10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements
10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✳️ मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी :-

🔹रूसी रसायनज्ञ इमिर्त्री इवानोविच मेन्डेलीफ को तत्वों के वर्गीकरण का मुख्य श्रेय जाता है । तत्वों की आवर्तसारणी के प्रारंभिक विकास में उनका प्रमुख योगदान रहा । उन्होंने अपनी सारणी में उनके मूल गुणधर्मो परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणधर्मो की समानता के आधार पर व्यवस्थित किया ।

🔹 मेन्डेलीफ के समय मे 63 तत्व ज्ञात थे । ये तत्वों के परमाणु द्रव्यमान एवं उनके भौतिक एव रासायनिक गुणों के बीच सम्बन्धो का अध्ययन किया । रासायनिक गुणों में तत्वों के ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन के साथ बनने वाले यौगिकों पर अपना ध्यान केंद्रीत किया तत्वों से बनने वाले हाइड्राइड एव ऑक्साइड के सूत्र तत्वों के वर्गीकरण के लिए मूलभूत गुणधर्म माना गया।

🔹वे 63 कार्डो पर अलग - अलग तत्वों के गुणधर्मो को लिखा । इसके बाद समान गुणो वाले तत्वों को अलग करने के बाद कार्डो को पिन की सहायता से दीवार पर लटका दिया । उन्होंने देखा कि प्रत्येक तत्व को आवर्त सारणी में स्थान मिल गया । तथा परमाणु द्रव्यमान के आरोहीक्रम में ये तत्व व्यवस्थित हो गए ।

🔹 इसमें आठ ऊर्ध्वाधर स्तम्भ हैं जिन्हें समूह कहते हैं तथा 6 क्षैतिज पक्तियाँ हैं जिन्हें आवर्त कहते हैं ।

✳️  मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी की उपलब्धियाँ :-

 ( 1 ) अज्ञात तत्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़े गये ; जैसे — स्कैडियम ( Sc ) , गैलियम ( Ga ) तथा जर्मेनियम ( Ge ) 

( 2 ) समान गुणधर्म वाले तत्वों को एक साथ स्थान मिल गया । 

( 3 ) पिछली व्यवस्था को छेड़े बिना ही , अक्रिय गैसों का पता लगने पर इन्हें अलग समूह में रखा जा सकता था । 


✳️  मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी की कमियाँ :– 

( 1 ) समस्थानिकों की स्थिति स्पष्ट नहीं की । 

( 2 ) हाइड्रोजन का स्थान निश्चित न होना । 

( 3 ) कुछ तत्वों का परमाणु द्रव्यमानों के अनुसार अनुचित क्रम ।

✳️ मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी :-


10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✳️ आधुनिक आवर्त सारणी :-

🔹 तत्व के परमाणु द्रव्यमान की तुलना में उसका परमाणु संख्या अधिक आधारभूत गुणधर्म है । 

🔹 आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार— “ तत्वों के गुणधर्म उसकी परमाणु संख्या का आवर्त फलन होते हैं । "


10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✳️ मेन्डेलीफ की आधुनिक आर्वत सारणी के दोष  :-

✳️ आवर्त सारणी द्वारा दूर हो गए :- 

( 1 ) समस्थानिकों की स्थिति स्पष्ट की गई । ( समान परमाणु संख्या वाले तत्व एक स्थान पर समान समूह में रखा गया । ) 

( 2 ) कोबाल्ट जिसकी परमाणु संख्या 27 है वह निकल ( परमाणु संख्या 28 ) से पहले आएगा । 

( 3 ) परमाणु संख्या सदैव पूर्ण संख्या होती है , अत : हाइड्रोजन व हीलियम के बीच में कोई तत्व नहीं आएगा । 

✳️ परमाणु संख्या :– 

🔹 परमाणु संख्या को ' Z ' से निरूपित किया जाता है । परमाणु संख्या अणु के केन्द्र में पाए जाने वाले प्रोटॉन की संख्या के बराबर होते हैं । 

🔹 आधुनिक आवृत सारणी में 18 ऊर्ध्व स्तंभ हैं जिन्हें ' समूह ' कहा जाता है तथा 7 क्षैतिज पंक्तियाँ है जिन्हें आवर्त कहा जाता है ।

🔹 किसी भी आवर्त में पाए जाने सभी तत्वों में कोशों की संख्या समान होती है । 

✳️उदाहरण :- 

🔹 Li ( 2, 1 ) , Be ( 2, 2 ) ; B-( 2, 3 ); C ( 2, 4 ) , N ( 2, 5 ) इन सभी तत्वों में कोशों की संख्या समान है । 

🔹 एक समूह के सभी तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रानों की संख्या समान होती है । 

✳️ उदाहरण :- 

             समूह 1 → H - 1 
                             Li - 2, 1 
                             N - 2, 8, 1 , K - 2,8,8,1 

🔹 सभी तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रानों की संख्या ( 1 ) समान है । 

🔹 समूह में नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है । 

🔹 किसी विशेष आवर्त में पाए जाने वाले तत्वों की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि किस प्रकार इलेक्ट्रान विभिन्न कोशों में भरे जाते हैं । 

🔹 विभिन्न कोशों में भरे जाने वाले इलेक्ट्रानों की संख्या के आधार पर आवर्त में तत्वों की संख्या बता सकते हैं । 

🔹 किसी कोश में इलैक्ट्रानों की अधिकतम संख्या सूत्र 2n² द्वारा निरूपित की जाती है जहाँ n दिए गए कोश की संख्या को दर्शाता है । 

✳️ उदाहरण :-

K कोश ( n = 1 ) → 2 × (1)² = 2 तत्व प्रथम आवर्त में दो तत्व हैं ।
L कोश ( n = 2 ) → 2 × (2)² = 8 तत्व प्रथम आवर्त में दो तत्व हैं । 

🔹 आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति उनकी रासायनिक क्रियाशीलता को बताती है । 

🔹 संयोजकता इलेक्ट्रानों द्वारा , तत्व द्वारा निर्मित आबंध का प्रारूप तथा संख्या निर्धारित होती है । 

✳️ आधुनिक आवर्त सारणी की प्रवृति 

✴️ ( 1 ) संयोजकता :- 

🔹 जब तत्व रासायनिक यौगिक बनाता है तो दूसरे परमाणु के साथ तत्व की संयोजक क्षमता को संयोजकता कहते हैं अथवा बाहयतम कोश को पूरा करने के लिए तत्व को जितनी इलेक्टहन लेने , देने या सांझा करने की जरूरत होती है , वह तत्व की संयोजकता कहलाती है ।
10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✴️ परमाणु साइज :- परमाणु साइज से परमाणु की त्रिज्या का पता चलता है । एक परमाणु के केन्द्र से बाह्यत्तम कोश की दूरी ही परमाणु साइज है ।

🔹 आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु साइज या त्रिज्या घटती है क्योंकि नाभिकीय आवेश में क्रमिक वृद्धि होती है ।

10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

🔹समूह में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि नए कोशों की संख्या बढ़ती है जिससे कि नाभिक और बातम कोश की दूरी बढ़ती जाती है ।

10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements

✳️ धात्विक गुण :- 

🔹 धात्विक गुण का अर्थ है किसी तत्व के परमाणु द्वारा इलेक्ट्रान त्यागने की क्षमता । 

🔹 धातुएँ आवर्त सारणी में बाएँ तरफ हैं । 

🔹 आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक गुण कम हो जाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है , इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घट जाती है ।

🔹 धातु इलेक्ट्रॉन खोते हैं और धनात्मक आयन बनाते हैं । अतः धातु वैद्युत धनात्मक तत्व कहलाते हैं ।

🔹 समूह में ऊपर से नीचे आने पर धात्विक गुण बढ़ता है । क्योंकि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आवेश घटता है तथा बाहरी इलेक्ट्रॉन सुगमतापूर्वक निकल जाते हैं ।

✳️ अधात्विक गुणधर्म :- 

🔹 अधातुएँ वैद्युत ऋणात्मक होती हैं । वे इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं ।

🔹 अधातुएँ , आवर्त सारणी में दाएँ ओर पाई जाती हैं । 

🔹 आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर अधात्विक गुण बढ़ता है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण इलेक्ट्रान ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है । 

🔹 समूह में ऊपर से नीचे आने पर अधात्विक गुण कम होता जाता है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है जिससे इलेक्ट्रॉन अपनाने की क्षमता कम हो जाती है । 

🔹 आवर्त सारणी के मध्य में उपधातु या अर्द्धधातुएँ पाई जाती हैं । ये कुछ गुण धातुओं के तथा कुछ गुण अधातुओं के दर्शाते हैं । 

🔹 धातु आक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं जबकि अधातु आक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते है ।

10 Class Science Notes in hindi chapter 5 Periodic Classification of Elements





No comments

Thank you for your feedback