12th class Economic - II Notes in hindi Chapter 5 Rural development अध्याय - 5 ग्रामीण विकास

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12th class Economic - II Notes in hindi Chapter 5 Rural development अध्याय - 5 ग्रामीण विकास

CBSE Revision Notes for CBSE Class 12 Economics Rural Development Rural development- what is rural development?, credit and marketing in rural areas, agricultural market system, diversification into productive activities, sustainable development and organic farming.

12th class economic 2ND BOOK Chapter - 5 Rural development notes in Hindi medium


12th class economic notes in hindi Chapter 5 2nd book Rural development अध्याय - 5 ग्रामीण विकास


📚📚 अध्याय - 5 📚📚
📑📑  ग्रामीण विकास 📑📑

🔹 ग्रामीण विकास :-

ग्रामीण विकास से अभिप्राय उस क्रमबद्ध योजना से है जिसके द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर तथा आर्थिक व सामाजिक कल्याण में वृद्धि की जाती है ।

🔹 ग्रामीण विकास के मुख्य तत्व :- 

1 ) भूमि के प्रति इकाई कृषि उत्पादकता को बढ़ाना
2 ) कृषि विपणन प्रणाली को सुधारना ताकि किसान को उसके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो सके ।
3 ) ज्यादा मूल्य वाली फसलों के उत्पाद को बढ़ावा देना ।
4 ) कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना ।
5 ) उत्पादन की गतिविधियों का विविधीकरण ताकि फसल - खेती के अलावा रोजगार के वैकल्पिक साधनों को ढूंढा जा सके ।
6 ) ग्रामीण क्षेत्रों में साख को सुविधाएँ उपलब्ध कराना ।
7 ) ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि तथा गैर - कृषि रोजगारों द्वारा निर्धनता को कम करना ।
8 ) जैविक खेती को बढ़ावा देना ।
9 ) ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना ।

🔹 भारत में ग्रामीण साख के स्रोत :-

🔹 गैर - संस्थागत अथवा अनौपचारिक स्रोत
🔹 संस्थागत अथवा औपचारिक स्रोत

🔹 गैर - संस्थागत अथवा अनौपचारिक स्रोत : - इसमें साहकार , व्यापारी , कमीशन एजेंट , जमींदार , संबंधी तथा मित्रों को शामिल किया जाता है ।

🔹  संस्थागत अथवा औपचारिक स्रोत :- 

1 ) सहकारी साख समितियाँ
2 ) स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया व अन्य व्यापारिक बैंक ।
3 ) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ।
4 ) कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय बैंक ( NABARD )
5 ) स्वयं सहायता समूह ।

🔹 कृषि विपणन में उन सभी क्रियाओं को शामिल किया जाता है जो फसल के संग्रहण , प्रसंस्करण , वर्गीकरण , पैकेजिंग , भण्डारण , परिवहन तथा बिक्री से सम्बन्धित है ।

🔹 कृषि विपणन के दोष :

1 ) अपर्याप्त भण्डार ग्रह
2 ) परिवहन व संचार के कम साधन
3 ) अनियमित मण्डियों में गड़बड़ियाँ
4 ) बिचौलियों की बहुलता
5 ) फसल के उचित वर्गीकरण का अभाव
6 ) पर्याप्त संस्थागत वित्त का अभाव
7 ) पर्याप्त विपणन सुविधाओं का अभाव

🔹 विपणन प्रणाली को सुधारने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम :- 

1 ) नियमित मण्डियों की स्थापना
2 ) कृषि उत्पादों के संग्रहण के लिए भण्डार गृह की सुविधाओं का प्रावधान । 3 ) मानक बाट और नाप - तौल की अनिर्वायता ।
4 ) रियायती यातायात की व्यवस्था ।
5 ) कृषि व संबद्ध वस्तुओं की श्रेणी विभाजन एंव मानकीकरण की व्यवस्था ( केन्द्रीय श्रेणी नियंत्रण प्रयोगशाला महाराष्ट्र के नागपुर में है ) ।
6 ) भण्डार क्षमता को बढाने के उद्देश्य से सार्वजनिक में भारतीय खाद्य निगम ( FCI ) , केंद्रीय गोदाम निगम ( CWC ) आदि की स्थापना ।
7 ) न्यूनतम समर्थन कीमत नीति
8 ) विपणन सूचना का प्रसार

🔹 विविधीकरण : - 

कृषि क्षेत्र में बढ़ती हुई श्रम शक्ति के एक बड़े हिस्से के अन्य और कृषि क्षेत्रों में वैक्लपिक रोजगार में अवसर ढूंढ़ने की प्रक्रिया को विविधिकरण कहते हैं । इसके दो पहलू है :

1 ) फसलों के उत्पादन का विविधीकरणः - इसके अन्तर्गत एक फसल की बजाए बहु - फसल के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाता है । इसके दो लाभ है :
1 ) मानसून की कमी के कारण होने वाले खेतों के जाखिम को कम करती है ।
2 ) यह खेतों के व्यापारीकरण को बढ़ावा देती है ।

2 ) उत्पादन गतिविधियों अथवा रोजगार का विविधिकरण : - इसमें श्रम शक्ति को कृषि क्षेत्र से हटाकर गैर - कृषि कार्यों जैसे - पशुपालन , मत्स्य पालन , बागवानी आदि में लगाया जाता है ।

🔹 ग्रामीण जनसंख्या के लिए रोजगार के गैर - कृषि क्षेत्र : 

1 ) पशुपालन
2 ) मछली पालन
3 ) मुर्गी पालन
4 ) मधुमक्खी पालन
5 ) बागवानी
6 ) कुटीर और लघु उद्योग

🔹 जैविक कृषि : -

जैविक कृषि खेती की वह पद्धति है जिसमें खेतों के लिए जैविक खाद ( मुख्यतः पशु खाद और हरी खाद ) का प्रयोग किया जाता है । इसके अन्तर्गत रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को हतोत्साहित करते हुए जैविक खाद के उपयोग पर बल दिया जाता है । यह खेत करने की वह पद्धति है जो पर्यावरण के सन्तुलन को पुनः स्थापित करके उसका संरक्षण एंव संवर्धन करती है ।

🔹 जैविक कृषि के लाभ :- 

1 ) जैविक खादों के प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर बढ़ता है और मृदा काफी उपजाऊ बनी रहती है ।
2 ) जैविक खाद पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ प्रदान करती है , जो मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीवों द्वारा पौधों को मिलाते हैं । जिससे पौधे स्वस्थ बनते हैं और उत्पादन बढ़ता है ।
3 ) रसायनिक खादों के मुकाबले जैविक खाद सस्ते और टिकाऊ होते हैं ।
4 ) जैविक खादों के प्रयोग से हमें पौष्टिक व स्वास्थ्य वर्धक भोजन प्राप्त होता है ।
5 ) जैविक खाद पर्यावरण मिश्र होते हैं । इनमें रासायनिक प्रदूषण नही फैलता ।
6 ) छोटे और सीमान्त किसानों के लिए सस्ती प्रक्रिया है ।
7 ) यह पद्धति धारणीय कृषि को बढावा देती है ।
8 ) जैविक खेती श्रम प्रधान तकनीक पर आधारित है ।

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