12th class Economic - II Notes in hindi Chapter 5 Human Capital Formation in India अध्याय - 5 भारत में मानव पूंजी निर्माण

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12th class Economic - II Notes in hindi Chapter 5 Human Capital Formation in India अध्याय - 5 भारत में मानव पूंजी निर्माण

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12th class economic 2nd Book Chapter - 5 Human Capital Formation in India notes in Hindi medium


12th class economic Chapter - 5 Human Capital Formation in India notes in Hindi medium


📚📚 अध्याय - 5 📚📚
📑📑  भारत में मानव पूंजी निर्माण 📑📑

🔹 मानव पूंजी से अभिप्राय किसी देश में किसी समय विशेष पर पाए जाने वाले , ज्ञान , कौशल , योग्यता , शिक्षा , प्रेरणा तथा स्वास्थ्य के भण्डार से है ।

🔹 मानव पूँजी निर्माण :– 

वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा दीर्घकाल में एक देश के लोगों की योग्यता , कौशल , शिक्षा तथा अनुभव में वृद्धि की जाती है ।

🔹 मानव पूँजी निर्माण के स्रोत :- 

1 . शिक्षा पर व्यय ।
2 . कौशल विकास पर व्यय ।
3 . नौकरी के साथ प्रशिक्षण
4 . लोगों के स्थानांतरण पर व्यय ।
5 . सूचना पर व्यय ।
6 . स्वास्थ्य पर व्यय ।

🔹 भारत में मानव पूँजी निर्माण को समस्याएँ :-

1 . भारी व तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या का दबाव ।
2 . अपर्याप्त संसाधन ।
3 . प्रतिभा – पलायन की समस्या ।
4 . मानव संसाधन के उचित प्रबन्धन का अभाव ।
5 . स्तरीय तकनीकी व प्रबन्धन शिक्षा का अभाव ।
6 . स्वास्थ्य सेवाओं का अपर्याप्त विकास ।

🔹  देश की आर्थिक संवृद्धि में मानव पूँजी की भूमिका :- 

1 . कुशलता तथा उत्पादकता के स्तर को बढ़ाता है ।
2 . दृष्टिकोण तथा व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाता है ।
3 . अनुसंधान और तकनीकी सुधारों को बढ़ाता है ।
4 . जीवन प्रत्याशा को बढ़ाता है ।
5 . जीवन - स्तर को ऊँचा उठाता है ।

🔹 मानव विकास में शिक्षा की भूमिका :- 

1 ) शिक्षा लोगों की उत्पादकता व सृजनात्मकता को बढ़ाती है ।
2 ) शिक्षा से अच्छे नागरिकों का निर्माण होता है ।
3 ) शिक्षा देश के संसाधनों के उचित प्रयोग में सहायक होती है ।
4 ) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में सहायक ।
5 ) लोगों के व्यक्तित्व के विकास में सहायक
6 ) कौशल के विकास में सहायक ।

🔹 भारत में मानव पूँजी निर्माण - 

1 ) मानव पूँजी निर्माण आर्थिक विकास का लक्ष्य और साधन दोनों है । भारत में मानव संसाधन विकास संविधान के नीति - निर्देशक तत्वों में शामिल किया गया है ।

2 ) भारत के केन्द्र एवं राज्य स्तरों पर शिक्षा मन्त्रालय , NCERT ( राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ) , UGC ( विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ) , AICTE ( अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ) ।

3 ) भारत में केन्द्रीय एवं राज्य स्तरों पर स्वास्थ्य मंत्रालय तथा ICMR ( भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ) स्वास्थ्य क्षेत्र का नियमन करते हैं ।

4 ) पेयजल की उपलब्धता एवं सफाई सुविधाओं का प्रावधान स्वस्थ जीवन की बुनियादी आवश्यकता है । राज्य सरकारें और शहरी स्थानीय निकाय शहरी आबादी को ऐसी सुविधाएँ प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है । ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन पेय जलापूर्ति विभाग को सौंपी गई है ।

🔹 भारत में शिक्षा क्षेत्र का विकास :-

शिक्षा देश के सामाजिक व आर्थिक विकास का एक प्रमुख कारक है । एक अच्छी शिक्षा प्रणाली न केवल कुशल व प्रशिक्षित व्यक्तियों का निर्माण करती है , बल्कि वह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को भी बढ़ावा देती है । भारत में शिक्षा क्षेत्र के विकास की निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है ।

🔹1 . प्रारम्भिक शिक्षा :- 

i ) प्राथमिक और मध्य स्कूल शिक्षा को मिलाकर प्रारम्भिक शिक्षा कहते हैं ।

ii ) वर्ष 1950 - 51 में प्राथमिक एवं मध्य स्कूलों की संख्या 2 . 23 लाख थी , जो 2010 - 11 में बढ़कर 12 . 96 लाख हो गई ।

iii ) अब प्रारम्भिक शिक्षा ( कक्षा 1 से 8 तक ) 6 - 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क व अनिवार्य कर दी गई है ।

iv ) प्रारम्भिक शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न इस प्रकार है -
( A ) मिड डे मील्स योजना ( 1995 ) , जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम ( 1991 ) , सर्व शिक्षा अभियान ( 2000 ) , मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार ( 2009 ) आदि ।

🔹 2 . माध्यमिक शिक्षा :- 

। ) वर्ष 1950 - 51 में देश में 7400 माध्यमिक स्कूल थे जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 14 . 8 लाख थी । वर्ष 2009 - 10 में माध्यमिक स्कूलों की संख्या बढ़कर 1 . 90 लाख हो गई तथा विद्यार्थियों की संख्या 441 लाख पहुँच गई ।

ii ) माध्यमिक शिक्षा क्षेत्र के विस्तार के लिए निम्नलिखित संस्थाएँ कार्यरत है
A ) नवोदय तथा केन्द्रीय विद्यालय ( NVS तथा KVS )
B ) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और परिषद ( NCERT )
C ) माध्यमिक शिक्षा का व्यवसायीकरण
D ) तकनीकी , मेडिकल तथा कृषि शिक्षा

🔹 3 . उच्च शिक्षा :- 

i ) उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालय , कॉलेज , व्यावसायिक तथा तकनीकी शिक्षण संस्थानों को शामिल किया जाता है ।

ii ) स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी सुधार हुआ है । लगभग 749 ( 31 मार्च , 2016 तक ) विश्वविद्यालय देश में उच्च शिक्षा प्रदान कर रहे हैं । इनमें 46 केन्द्रीय विश्वविद्यालय है , 345 राज्य विश्वविद्यालय , 123 मानित विश्वविद्यालय तथा 235 निजी विश्वविद्यालय है । देश में कॉलेजों की संख्या लगभग 37704 ( 2012 - 13 ) है ।

iii ) उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली मुख्य संरचनाएँ इस प्रकार है

A ) विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ( UGC )
B ) इन्दिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय ( IGNOU )
C ) अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ( AICTE )
D ) भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( ICMR )

🔹 भारत में शिक्षा के विकास से सम्बन्धित समस्याएँ :- 

1 ) अनपढ़ व्यक्तियों की बड़ी संख्या ।
2 ) अप्रर्याप्त व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा ।
3 ) लिंग - भेद का प्रभाव ।
4 ) ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच का निम्न स्तर ।
5 ) शिक्षा के विकास पर सरकार द्वारा कम व्यय ।