12th class economic - II Notes In Hindi chapter-1 Indian Economy on the Eve of Independence अध्याय - 1 भारत का आर्थिक विकास

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12th class economic - II Notes In Hindi chapter-1 Indian Economy on the Eve of Independence अध्याय - 1 भारत का आर्थिक विकास 


CBSE Revision Hindi Notes for CBSE Class 12 Economics Indian Economy on the Eve of Independence Low level of economic development under the colonial rule- agricultural sector, industrial sector, foreign trade, demographic condition, occupational structure, infrastructure.

12th class economic 2nd Book Chapter - 1  Indian Economy on the Eve of Independence notes in Hindi medium

 12th class economic Chapter - 1 Indian Economy on the Eve of Independence notes in Hindi medium

📚📚 अध्याय - 1 📚📚 
📑📑 भारत का आर्थिक विकास 📑📑

🔹 " स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था " 

ब्रिटिश उपनिवेश काल से पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था " सोने की चिड़िया ' के रूप में जानी जाती थी । उपनिवेश काल में अत्यधिक और लगातार आर्थिक शोषण के कारण पिछडती चली गई । अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन का मुख्य उदेश्य भारत को ब्रिटेन में तेजी से विकसित हो रही आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए आधार के रूप में उपयोग करना था ।

🔹 स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति :- 

क ) आर्थिक विकास की निम्न दर :-

• औपनिवेशिक सरकार ने कभी भी भारत की राष्ट्रीय तथा प्रति व्यक्ति आय के अनुमान के लिए कोई प्रयास नहीं किए ।

• राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय के मापन का प्रथम प्रयास व्यक्तिगत स्तर पर 1876 में भारत के " ग्रेण्ड ओल्डमैन ' दादा भाई नौरोजी ने किया । 

• डॉ . वी . के . आर . वी . राव के अनुसार सकल देशीय उत्पद में वार्षिक वृद्धि दर केवल 2 % तथा प्रति व्यक्ति आय में वार्षिक वद्धि केवल 0 . 5 % थी । 1947 में प्रति व्यक्ति आय मात्र 280 रूपये थी । 

• तत्तकालीन राष्ट्रीय आय के अन्य अनुकर्ताओं में प्रमुख थे - विलियम डिग्बी , फिण्डले सिराज , आर . डी . सी . देशाई आदि । 

ख ) कृषि का पिछड़ापन : - जिसके निम्न कारण थे - 

• जमींदारी , महलवाड़ी तथा रैयतवाड़ी प्रथा 

•  1947 में राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र की भागीदारी लगभग 95 % थी । 

•  व्यवसायीकरण का दबाव - नील आदि का उत्पादन ।

•  1947 में 75 % से अधिक जनसंख्या कृषि क्षेत्र पर निर्भर थी ।

•  देश के विभाजन के कारण पश्चिम बंगाल में जूट मिल और पूर्वी पाकिस्तान में उत्पादक भूमि चली गयी तथा विनिर्मित निर्यात में । की और आयात में वृद्धि


ग ) अविकसित औद्योगिक क्षेत्र : 

• वि - औद्योगिकीकरण नीति तथा भारतीय हस्तकला उद्योग का पतन

• वि - औद्योगिकीकरण नीति के दोहरे ( जुड़वाँ ) उद्देश्य थे 
( i ) भारत को कच्चे माल का निर्यातक बनाना 
( ii ) भारत को ब्रिटिश उद्योगों के विनिर्मित उत्पादों का आयातक या बाजार बनाना । 

• पूंजीगत वस्तुओं के उद्योग का अभाव

•  सार्वजनिक क्षेत्र की सीमित क्रियाशीलता 

• भेदभावपूर्ण टैरिफ नीति 

• हस्तशिल्प उद्योगों के पतन व प्रमुख दुष्परिणाम 

1 . भारत में भीषण बेरोजगारी 
2 . भारतीय उपभोक्ता बाजार में नयी माँग का सृजन 
3 . स्थानीय निर्मित वस्तुओं की आपूर्ति में भारी कमी 
4 . ब्रिटेन से सस्ते विनिर्मित उत्पादों के आयात में भारी वृद्धि इसके अलावा यद्यपि आधुनिक उद्योग जैसे 1907 में टिस्को की स्थापना जमशेद जी टाटा द्वारा की गयी परन्तु ऐसे प्रयास बहुत कम एवं अपर्याप्त थे । 

घ ) विदेशी व्यापार की विशेषताएं : 

• कच्चे माल का शुद्ध निर्यातक तथा तैयार माल का आयातक 
• विदेशी व्यापार पर ब्रिटेन का एकाधिकारी नियंत्रण 
• भारत की सम्पत्ति का बहिप्रवाह 

च ) ब्रिटेन द्वारा लडे जा रहे युद्धो के व्यय का भारत पर दवाव 

• भारत की पहली नियमित जनगणना 1881 में प्रारम्भ हुई । 1981 से 1991 तक भारत की जनांकीकिय दशा को जनाँकीकिय संक्रमण सिद्वांत के प्रथम चरण में रखा जाता है । 1921 को जनसंख्या महाविभाजक वर्ष कहा जाता है । जिसके बाद जनांकीकिय संनुमण का इससे चरण शुरू होता है ।

छ ) प्रतिकूल तत्कालीन जनांकिकीय दशाएँ :

•  ब्रिटेन द्वारा लड़े जा रहे युद्धों पर भारत पर दवाव । भारत को पहली नियमित जनगणना 1881 में प्रारम्भ हुई । 1981 से 1919 तक भारत को जनांकीकिल दशा को जनांकीकिय संकमण सिद्धांत के प्रथम चरण में रखा जाता है । 1921 को जनसख्या महाविभाजक वर्ष कहा जाता है । जिसके बाद जनांकीकीय उसके चरण शुरू हुए है । 

• ऊँची मृत्युदर - 45 प्रति हजार 
• उच्च शिशु जन्म दर - 218 प्रति हजार 
• सामूहिक निरक्षरता - 84 निरक्षरता 
• निम्न जीवन प्रत्याशा - 32 वर्ष
• जीवन - यापन का निम्न स्तर - आय का 80 - 90 % आधारभूत आवश्यकता पर व्यय 
• जन स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव

ज ) अविकसित आधारभूत ढाँचा : - 

अच्छी सड़कें , विद्युत उत्पादन , स्वास्थ्य , शिक्षा तथा संचार सुविधाओं का अभाव । यद्यापि अंग्रेज प्रशासकों द्वारा आधारभूत ढाँचे के विकास के लिए प्रयास किए गए जैसे - सड़कें , रेलवे , बंदरगाह , जल यातायात और डाक व तार विभाग । लेकिन इनका उददेश्य आम जनता को सुविधाएं देना नहीं था बल्कि साम्राज्यवादी प्रशासन के हित में था । 

झ ) प्राथमिक ( कृषि ) क्षेत्र पर अधिक निर्भरता : 

• कार्यबल का अधिकतम भाग लगभग 72 % कृषि एवं संबंधित क्षेत्र में लगा था । 
• 10 % विनिर्माण क्षेत्र में लगा था । 
• 18 % कार्यबल सेवा क्षेत्र मे लगा था । 

🔹 अंग्रेजी साम्राज्यवाद के भारतीय अर्थव्यवस्था पर कुछ सकारात्मक प्रभाव :

क ) यातायात की सुविधाओं में वृद्धि - विशेषकर रेलवे में 
ख ) बंदरगाहों का विकास 
ग ) डाक व तार विभाग की सुविधाएँ 
घ ) देश का आर्थिक व राजनीतिक एकीकरण 
ड़ ) बैंकिंग व मौद्रिक व्यवस्था का विकास

🔹 अंग्रेजी साम्राज्यवाद के भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव : 

क ) भारतीय हस्तकला उद्योग का पतन 
ख ) कच्चे माल का निर्यातक व तैयार माल का आयातक 
ग ) विदेशी व्यापार पर ब्रिटेन का एकाधिकारी नियंत्रण 
घ ) व्यवसायीकरण पर दबाव

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