Class 11 Economics CBSE Notes chapter 4 Introduction Micro Economics in hindi Medium 2019 , 2020 latest

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Class 11 Economics CBSE Notes 2nd book chapter 4 Introductory Microeconomics ( 4 . व्यष्टि अर्थशास्त्र - एक परिचय ) in hindi Medium 2019 , 2020  latest


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11th class economics notes in Hindi


खण्ड ' ब ' 
इकाई - IV 
व्यष्टि अर्थशास्त्र - एक परिचय




● व्यष्टि अर्थशास्त्र , अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक समस्याओं का अध्ययन करती है । उदाहरण : व्यक्तिगत माँग , एक फर्म का उत्पादन आदि । 

● समष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था तथा उसके समुच्चयों का अध्ययन किया जाता है । उदाहरणः समग्र माँग , राष्ट्रीय आय आदि । 

● अर्थव्यवस्था वह प्रणाली है जो लोगों को जीविका अर्जित करने के साधन और जीविका प्रदान करती है । 

● आर्थिक समस्या असीमित आवश्यकताओं की संतुष्टि हेतु वैकल्पिक उपयोग वाले सीमित संसाधनों के उपयोग के चयन की समस्या है ।

आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के मुख्य कारण हैं :- 

आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के मुख्य कारण

1 ) मानवीय आवश्यकताओं का असीमित होना
2 ) साधनों का सीमित होना
3 ) साधनों के वैकल्पिक प्रयोग


एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ : 

( 1 ) क्या उत्पादन किया जाए ? ( वस्तुओं का चयन ) 
( 2 ) कैसे उत्पादन किया जाए ? ( तकनीक का चयन ) 
( 3 ) किसके लिए उत्पादन किया जाए ? ( वस्तुओं अथवा आय के वितरण की समस्या )

● एक अवसर का चयन करने पर दूसरे सर्वश्रेष्ठ अवसर का किया गया त्याग अवसर लागत कहलाता है । इसे सर्वश्रेष्ठ विकल्प की लागत भी कहा जाता है । 

● उत्पादन संभावना सीमा ( PPF ) दो वस्तुओं के उन सभी संयोगों को दर्शाता है जिनका उत्पादन एक अर्थव्यवस्था अपने दिए हुए संसाधनों तथा तकनीकी स्तर का प्रयोग करके कर सकती है , यह मानते हुए कि सभी संसाधनों का पूर्ण एवं कुशलतम उपयोग हो रहा है । 

● संसाधनों के मितव्ययी प्रयोग से अभिप्राय संसाधनों के सर्वश्रेष्ठ व कुशलतम प्रयोग से है । 

उत्पादन संभावना वक्र की मुख्य विशेषताएँ 

( अ ) नीचे की ओर ढालू बायें से दायें होता है । इसका कारण यह है कि साधन सीमित होने के कारण यदि एक वस्तु का अधिक मात्रा में उत्पादन किया जाता है तो दूसरी वस्तु के उत्पादन की मात्रा में कमी करनी होती है । 

( ब ) मूल बिन्दु की ओर नतोदर होता है । इसका कारण बढ़ती हुई सीमांत अवसर लागत ( MOC ) है । अर्थात एक वस्तु का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु की इकाइयों का त्याग बढती दर पर करना पड़ता है । क्योंकि कोई भी संसाधन सभी वस्तुओं के उत्पादन में समान रूप से सक्षम नहीं होता । अतः जब कम क्षमता वाले संसाधनों का प्रयोग किया जाता है तो लागत बढ़ती हे जिससे MOC बढ़ती है ।

●  उत्पादन सम्भावना वक्र का दायीं ओर खिसकाव संसाधनों में वृद्धि तथा तकनीकी प्रगति को दर्शाता है ।

● उत्पादन संभावना वक्र का बायीं ओर खिसकाव संसाधनों में कमी तथा तकनीकी अवनति को दर्शाता है । 

● उत्पादन सम्भावना वक्र उन सभी कारणों से दाईं ओर खिसकेगा जिनसे अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता व संसाधनों की मात्रा तथा कुशलता में सुधार होता है ।

दाई ओर खिसकाव के कारण:-  

1 . संसाधनों में वृद्धि 
2 . तकनीकी प्रगति 
3 . कौशल भारत अभियान ( प्रशिक्षण ) 
4 . सर्व शिक्षा अभियान ( शिक्षा )
5 . स्वच्छ भारत अभियान ( स्वास्थ्य ) 
6 . योगा प्रसार योजनाएँ ( स्वास्थ्य ) 
7 . बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओं ( शिक्षा ) 
8 . भारत में बनाइए ( निवेश ) 
9 . विदेशी पूँजी में वृद्धि ( विदेशी निवेश )

बाई ओर खिसकाव के कारण :- 

1 . संसाधनों में कमी 
2 . तकनीकी अवनीति 
3 . प्राकृतिक आपदा ( बाढ़ , भूकम्प सुनामी , सूखा आदि । 
4 . सामाजिक कुरीतियाँ 
5 . प्रवास 
6 . युद्ध 
7 . आतंकवाद

PPC में कोई परिवर्तन नहीं :- 

1 . संसाधनों का स्थनांतरण 
2 . बेरोजगारी उन्मूलन कार्यक्रम

● सीमांत विस्थापन दर एक वस्तु की त्यागी जाने वाली इकाइयों तथा अन्य वस्तु की बढ़ाई गई एक अतिरिक्त इकाई का अनुपात है ।

11th class economic notes in hindi

● सीमांत विस्थापन दर को सीमांत अवसर लागत भी कहते हैं क्योंकि वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु की त्यागी गई इकाईयाँ ही अतिरिक्त लागत होती है । जब MOC बढ़ती है तो PPF मूल बिन्दु के नतोदर होता है । 

● जब MOC घटती है तो PPF मूल बिन्दु के उन्नतोदर होता है । जब MOC स्थिर होती है तो PPF ऋणात्मक ढाल वाली एक सरल रेखा होती है । 

सकारात्मक ( वास्तविक ) आर्थिक विश्लेषण : इसके अन्तर्गत यथार्थ ( वास्तविकता ) का अध्ययन किया जाता है । इसमें क्या था ? क्या है ? क्या होगा ? जैसे वास्तविक कथनों का विश्लेषण सत्यता के आधार पर किया जाता है । उदाहरण के लिए भारत की जनसंख्या 1951 में कितनी थी ? वर्तमान में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या कितनी है । इन कथनों की जाँच संभव होती है । 

आदर्शात्मक आर्थिक विश्लेषण : इसमें ' क्या होना चाहिए ' से सम्बन्धित विश्लेषण किया जाता है । इसमें आदर्शात्मक परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है । इसकी प्रकृति सुझाव देने की है । उदाहरण के लिए भारत में आय व धन की असमानताओं को कम करने के लिए सरकार को अमीर लोगों पर अधिक कर लगाने चाहिए , गरीबों को आर्थिक सहायता देनी चाहिए । इन कथनों की जाँच संभव नहीं होती ।

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