12th Class Political Science - II Notes in hindi chapter 4 India's External Relations अध्याय - 4 भारत के विदेश संबंध

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12th Class Political Science - II Notes in hindi chapter 4  India's External Relations अध्याय - 4 भारत के विदेश संबंध

CBSE Revision Notes for CBSE Class 12 Political Science Book-2 Chapter-4 India's External relations Class 12 Political Science Book-2 Chapter-4 India's External relations - Nehru's foreign policy. Sino-Indian war of 1962, Indo-Pak war of 1965 and 1971. India's nuclear programme. Shifting alliance in world politics.

Class 12th political science - II BOOK chapter 4 India's External Relations Notes In Hindi


✳️ इंडियन नेशनल आर्मी :- 

🔹 इसकी स्थापना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित की थी ।

✳️ विदेश निति :-

🔹  प्रत्येक देश अन्य देशों के साथ संबंधों की स्थापना में एक विशेष प्रकार की ही निति का प्रयोग करता है जिसे विदेश निति कहते हैं ।

✳️ भारत की विदेश निति :-

🔹 भारत बहुत चुनौतीपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में आजाद हुआ था । उस समय लगभग संपूर्ण विश्व दो ध्रुवों मे बँट चुका था ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री जवाहर ने बड़ी दूरदर्शिता के साथ भारत की विदेश नीति तय की । भारत की विदेश नीति पर देश के पहले प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की अमिट छाप है ।

✳️ नेहरू जी की विदेश नीति के तीन मुख्य उद्देश्य थे :-

👉 1 ) संघर्ष से प्राप्त सम्प्रभुता को बचाए रखना ।
👉 2 ) क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना ।
👉 3 ) तेज गति से आर्थिक विकास करना ।

🔹 नहेरु इन उद्देश्यो को गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाकर पाना चाहते थे ।
🔹 उस समय कुछ लोग , समूह ऐसे थे जो यह कहते थे भारत को अमरीका से नजदीकी बनानी चाहिए । जैसे - डॉ० भीमराव अंबेडकर एव जनसंघ , स्वतंत्र पार्टी ।

🔹 1956 में ब्रिटेन ने स्वेज के मामले में मिस्र पर आक्रमण किया जिसमे भारत द्वारा इसका विरोध किया गया ।

🔹 सो० संघ ने हंगरी पर आक्रमण किया था इसमे भारत ने विरोध नही किया ।

🔹 पाकिस्तान ने नाटो संगठन में शामिल होना स्वीकार किया ।

🔹 अमरीका भारत से इसलिए नाराज था क्योंकि भारत की नजदीकी सो० संघ से थी ।

✳️ एफ्रो - एशियाई एकता :-

🔹  नेहरू के दौर में भारत ने एशिया और अफ्रीका के नव - स्वतंत्र देशों के साथ संपर्क बनाए ।

🔹  1940 और 1950 के दशक में नेहरू ने बड़े मुखर स्वर में एशियाई एकता की पैरोकारी की ।

🔹 नेहरू की अगुआई में भारत ने मार्च 1947 में एशियाई संबंध सम्मलेन का आयोजन कर डाला |

🔹 नेहरू की अगुआई में भारत ने इंडोनेशिया की आज़ादी के लिए भरपूर प्रयास किए |

🔹 1949 में भारत ने इंडोनेशिया की आजादी के समर्थन में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन किया ।

🔹 भारत ने अनोपनिवेशीकरण की प्रकिया का समर्थन किया ।

🔹  भारत ने खासकर दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का विरोध किया ।

🔹 इंडोनेशिया के शहर बांडुंग में एफ्रो - एशियाई सम्मेलन 1955 में आयोजन किया गया ।

🔹 दक्षिण अफ्रीका के बांडुंग - सम्मलेन में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की नींव पड़ी |

🔹 पहला सम्मेलन 1961 बेलग्रेड में हुआ ।

🔹 इस आन्दोलन की स्थापना में नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका थी ।

✳️ पंचशील : - 

🔹 29 अप्रैल 1954 को भारत के प्रधानमंत्री पं नेहरू तथा चीन के प्रमुख चाऊ एन लाई के बीच द्विपक्षीय समझौता ।

🔹 जिसके अग्रलिखित पांच बिन्दु है :-

🔹  i ) एक दूसरे के विरूद्ध आक्रमण न करना ।

🔹 ii ) एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना ।

🔹 iii ) एक दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का आदर करना ।

🔹  iv ) समानता और परस्पर मित्रता की भावना

🔹 V ) शांतिपूर्ण सह - अस्तित्व

✳️ गुट निरपेक्षता की नीति :-

🔹 अथक प्रयासों से मिली स्वतन्त्रता के पश्चात भारत के समक्ष एक बड़ी चुनौती अपनी संप्रभुता को बचाए रखने की थी । इसके अतिरिक्त भारत को तीव्र आर्थिक व सामाजिक विकास के लक्ष्य को भी प्राप्त करना था । अतः इन दोनों उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए भारत ने गुट निरपेक्षता की नीति को अपनी विदेश नीति के एक प्रमुख तत्व के रूप में अंगीकार किया ।

✳️ गुट निरपेक्षता की नीति का उद्देश्य :-

🔹 इस नीति के द्वारा भारत जहाँ शीत युद्ध के परस्पर विरोधी खेमों तथा उनके द्वारा संचालित सैन्य संगठनों जैसे - नाटो , वारसा पेक्ट आदि से अपने को दूर रख सका ।

🔹 वहीं आवश्यकता पड़ने पर दोनों ही खेमों से आर्थिक व सामरिक सहायता भी प्राप्त कर सका । एशिया तथा अफ्रीका के नव . स्वतन्त्र देशों के मध्य भविष्य में अपनी महत्वपूर्ण व विशिष्ट स्थिति की संभावना को भांपते हुए भारत ने वि - औपनिवेशिकरण की प्रक्रिया का प्रबल समर्थन किया ।

✳️ गुट निरपेक्ष आंदोलन :-

🔹 इसी कड़ी में 1955 में इंडोनेशिया के शहर बांडुंग में एफ्रो - एशियाई सम्मेलन हुआ , जिसमें गुट निरपेक्ष आंदोलन की नींव पड़ी ।

🔹 सितंबर 1961 में बेलग्रेड में प्रथम गुट निरपेक्ष सम्मेलन के साथ इस आंदोलन का औपचारिक प्रारम्भ हुआ ।

🔹  वर्तमान समय में इस आंदोलन में तृतीय विश्व के 120 सदस्य देश हैं ।

🔹 सितंबर 2016 में गुट निरपेक्ष आंदोलन का 17वां सम्मेलन वेनेजुएला में सम्पन्न हुआ ।

🔹 18वां सम्मेलन जून 2019 में अजरबैजान में प्रस्तावित है ।

✳️ भारत - चीन संबंध :-

🔹  1949 में चीनी क्रांति के बाद चीन की कम्यूनिस्ट सरकार को मान्यता देने वाला भारत पहले देशों में एक था । नेहरू जी ने चीन से अच्छे संबंध बनाने की पहल की ।

🔹 उप - प्रधानमंत्री एवं तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आशंका जताई कि चीन भारत पर आक्रमण कर सकता है । नेहरू जी का मत इसके विपरित यह था कि इसकी संभावना नहीं है ।

✳️ भारत - चीन के बीच विवाद के मुद्दे :-

🔹  जब 1950 में चीन ने तिब्बत पर अपना नियंत्रण जमा लिया । तिब्बती जनता ने इसका विरोध किया । भारत ने इसका खुला विरोध नहीं किया । तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा ने अपने अनुयायियों सहित भारत से राजनीतिक शरण मांगी और 1959 में भारत ने उन्हें राजनीतिक शरण दे दी । चीन ने भारत के इस कदम को अपने अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी माना ।

🔹 चीन और भारत के मध्य विवाद का दूसरा बड़ा कारण सीमा - विवाद था । चीन , जम्मू - कश्मीर के लद्दाख वाले हिस्से के अक्साई - चीन और अरूणाचल प्रदेश के अधिकतर हिस्सों पर अपना अधिकार जताता है ।

🔹 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया । भारतीय सेना ने इसका कड़ा प्रतिरोध किया । परन्तु चीनी बढ़त रोकने में नाकामयाब रहे । आखिरकार चीन ने एक तरफा युद्ध विराम घोषित कर दिया । चीन से हारकर भारत की खासकर नेहरू जी की छवि को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत नुकसान हुआ ।

🔹 1962 के बाद भारत - चीन संबंधों को 1976 में राजनयिक संबंध बहाल कर शुरू किया गया ।

🔹 1979 में श्री अटल बिहारी वाजपेयी ( विदेश मंत्री ) तथा श्री राजीव गांधी ने 1962 के बाद पहले प्रधानमंत्री के तौर पर चीन की यात्रा की परन्तु चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर ही ज्यादा चर्चा हुई ।

🔹 2003 में भी अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के तौर पर चीन की यात्रा की जिसमें प्राचीन सिल्करूट ( नाथूला दरा ) को व्यापार के लिए खोलने पर सहमति हुई जो 1962 से बंद था । इससे यह मान्यता भी मिली कि चीन सिक्किम को भारत का अंग मानता है ।

🔹 चीन द्वारा अरूणाचल प्रदेश में अपनी दावेदारी जताने , पाकिस्तान से चीन की मित्रता एवं भारत के खिलाफ चीनी मदद से भारत चीन संबंध खराब होते है ।

✳️ भारत तथा चीन के विवादों को सुलझाने के लिए उठाए गए कदम :-

🔹 चीन और भारत सीमा विवाद सुलझाने के लिए प्रयत्नशील है । सन् 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत का दौरा किया । इसमें मुख्य समझौता कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतू वैकल्पिक सुगम सड़क मार्ग खोलना था ।

🔹 मई 2016 में भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी चीन यात्रा पर गए है यह यात्रा चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान के आतंकवादी अजहर मसूद के पक्ष में वीटो करने तथा परमाणु आपूर्ति समूह ( एनएसजी ) द्वारा यूरेनियम की भारत को आपूर्ति से पहले चीन द्वारा भारत को एनपीटी पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य करने जैसे जटिल मुद्दों की छाया में हो रही है ।

🔹 भारत व चीन के मध्य संबंधों को सकारात्मक रूप देने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं ।

🔹 दोनों देश शांति व पारदर्शिता ( भारत चीन सीमा पर ) बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध है ।भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा P2P ( People to People ) संबंधों पर STRENGTH की संकल्पना के आधार पर जोर दिया जा रहा है ।
🔹 S - Spirituality आध्यात्मिकता T - Tradition , Trade , Technalogy ( रीतियाँ , व्यापार , तकनीक ) R - Relationship ( संबंध ) Entertainment ( Art , movies ) मनोरंजन ( कला व सिनेमा ) N - Nature Conservation ( प्रकृति का संरक्षण ) G - Games ( खेल ) , T - Tourism ( पर्यटन ) , H - Health & Healing ( स्वास्थ्य व निदान ) ।

🔹 भारत व चीन के मध्य डोकलाम क्षेत्र में सैनिक तनातनी 16 June 2017 को शुरू हुई थी दोनों देशों के आपसी कूटनीतिक प्रयासों से यह सैन्य तनातनी 28 August 2017 को समाप्त हो गई । हाल ही में चीन द्वारा भारत की ओर से निरंतर की जाने वाली मांग को मानते हुए पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश - ए - मुहम्मद के सरगना अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी गयी , जिसे भारत - चीन सम्बन्धों के मध्य सुधार के रूप में देखा जा सकता है ।

✳️ भारत - पाकिस्तान संबंध :-

🔹  भारत विभाजन ( 1947 ) द्वारा पाकिस्तान का जन्म हुआ । पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध शुरू से ही कड़वे रहे है । कश्मीर मुद्दे पर 1947 में ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच छाया - युद्ध छिड़ गया । इसी छाया युद्ध में पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े भाग पर अनाधिकृत कब्जा जमा लिया । सरक्रीक रेखा , सियाचिन ग्लेशियर , सीमापार आतंकवाद और कश्मीर दोनों के मध्य विवाद के मुख्य कारण है ।

🔹 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में दोनों के बीच सिंधु नदी जलसंधि की गई । इस पर पं नेहरू और जनरल अयूब खाँ ने हस्ताक्षर किए । विवादों के बावजूद इस संधि पर ठीक - ठाक अमल रहा है ।

🔹 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया । ततकालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने " जय जवान , जय किसान ' का नारा दिया । इस समय भारत में अकाल की स्थिति भी थी । हमारी सेना लाहौर के नजदीक तक पहुंच गई थी । संयुक्त राष्ट्र संघ ( यूएनओ ) के हस्तक्षेप से युद्ध समाप्त हुआ ।

🔹 1966 में ताशकंद समझौता हुआ जिसमें भारत की ओर से श्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खाँ ने हस्ताक्षर किए ।

🔹  1970 में पाकिस्तान के पहले आम चुनावों में पश्चिमी पाकिस्तान में पीपीपी के जुल्फिकार अली भुट्टो जबकि पूर्वी पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश ) में अवामी लीग के शेख मुजीबुर्रहमान ( बंग - बंधु ) विजयी हुए । दोनों भागों में संस्कृति एवं भाषा को लेकर गंभीर मतभेद थे । अवामी लीग ने एक परिसंघ बनाने की मांग रखी । पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में दमन के विरोध में जनता ने विद्रोह कर दिया । शेख मुजीब गिरफ्तार कर लिए गए । 80 लाख बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में घुस आए । प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने इस मुक्ति संग्राम को अपना नैतिक एवं भौतिक समर्थन दिया ।

🔹 1971 में पाकिस्तान को चीन तथा अमेरिका से मदद मिली । इस स्थिति में श्रीमति इंदिरा गांधी ने सोवियत संघ के साथ 20 वर्षीय मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए ।

🔹 1971 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ पूर्णव्यापी युद्ध छेड़ दिया । भारत विजयी हुआ । पाकिस्तानी सेना ने 90००० सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया । नये देश बांग्लादेश का उदय हुआ ।

🔹 1972 में शिमला समझौता हुआ इस पर भारत की ओर से प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की ओर से जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए ।

🔹 1999 में भारत ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल करते हुए दिल्ली - लाहौर बस सेवा शुरू की परन्तु पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कारगिल संघर्ष छेड़ दिया । कारगिल में अपने को मुजाहिद्दीन कहने वालों ने सामरिक महत्व के कई इलाकों जैसे द्रास , माश्कोह , वतालिक आदि पर कब्जा कर लिया । भारतीय सेना ने बहादुरी से अपने इलाके खाली करा लिए ।

🔹 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत यात्रा तथा भारतीय प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा दोनों देशो के बीच संबधों को सुधारने के लिए की गयी । लेकिन पाकिस्तान की और से सीजफायर का उल्लंघन व आतंकी घुसपैठ की कार्यवाही ने दोनों देशों के संबंधों में कटुता बनी रही ।

🔹 2016 में उरी में सेना मुख्यालय पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकी हमले ने तथा जवाब में भारत की ओर से की गयी सैन्य कार्यवाही ने दोनों देशों के मध्य कटुता को और अधिक बढ़ा दिया ।

🔹 2018 में पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नव - निर्वाचित सरकार के साथ भारत सरकार द्वारा किए गए शांतिप्रयासों के बाद भी पाकिस्तान की ओर से निरंतर संघर्ष विराम के उल्लंघन तथा आतंकी घुसपैठ के कारण दोनों देशों के मध्य सम्बन्धों में सुधार की संभावनाएं निरंतर कम हुई हैं । जनवरी

🔹 2019 में जम्मू - कश्मीर में सी आर पी एफ के जवानों पर पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा आत्मघाती हमला किया गया जिसके जवाब में भारतीय वायुसेना द्वारा की गयी कार्यवाही ने दोनों देशों के मध्य युद्ध की स्थितियाँ उत्पन्न की । इसके अतिरिक्त भारत ने पाकिस्तान को सन् 1996 में दिया सर्वाधिक वरीय राष्ट्र ( MFN ) का दर्जा भी छीन लिया ।

✳️ भारत का परमाणु कार्यक्रम :-

🔹 मई 1974 में पोखरण में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया फिर मई 1998 में पोखरण में ही भारत ने पाँच परमाणु परीक्षण कर स्वयं को परमाणु सम्पन्न घोषित कर दिया । इसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण कर स्वयं को परमाणु शक्ति घोषित कर दिया । इन परीक्षणों के कारण क्षेत्र में एक नए प्रकार का शक्ति संतुलन बन गया । दोनों देशों पर अमेरिका सहित कई देशो ने आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए ।

🔹 भारत ने 1968 की परमाणु अप्रसार संधि एवं 1995 की " व्यापक परीक्षण निषेध संधि " CTBT " पर हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि भारत इन्हें भेदभावपूर्ण मानता है ।

✳️ भारत की परमाणु नीति :-

🔹 भारत शांतिपूर्ण कार्यों हेतू परमाणु शक्ति का प्रयोग करेगा । भारत अपनी सुरक्षा तथा आवश्यकतानुसार परमाणु हथियारों का निर्माण करेगा । भारत परमाणु हथियारों का प्रयोग पहले नहीं करेगा ।

🔹 परमाणु हथियारो को प्रयोग करने की शक्तिसर्वोच्च राजनीतिक सत्ता के हाथ होगी । भारतीय विदेश नीति के बारे में राजनीतिक दल थोड़े बहुत मतभेदों के अलावा राष्ट्रीय अखण्डता , अन्तर्राष्ट्रीय सीमा रेखा की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों के मसलों पर व्यापक सहमति है ।

🔹 1991 में शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद विदेश नीति का निर्माण अमेरिका द्वारा पोषित उदारीकरण व वैश्वीकरण को ध्यान में रखकर किया जाने लगा तथा क्षेत्रीय सहयोग को भी विशेष महत्व दिया गया ।

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