12 Class Geography Notes in hindi Chapter 10 Human Settlements अध्याय - 10 मानव बस्तियाँ

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12 Class Geography Notes in hindi Chapter 10 Human Settlements अध्याय - 10 मानव बस्तियाँ

CBSE Revision Notes for CBSE Class 12 Geography Chapter 10 Human Settlements Class 12 Geography Chapter 10 Human Settlements - rural and urban, morphology of cities (case study), distribution of mega cities, problems of human settlements in developing countries.

Class 12th Geography chapter 10 Human Settlements Notes In Hindi 

12 Class Geography Notes in hindi Chapter 10 Human Settlements अध्याय - 10 मानव बस्तियाँ

📚 अध्याय - 10 📚

👉 मानव बस्तियाँ 👈


✳️ मानव बस्ती :- 

🔹  बस्ती मनुष्य के आवासों के उस संगठित निवास स्थान को कहते हैं जिसमें उनके रहने अथवा प्रयोग करने वाले भवनों तथा उनके आने - जाने के लिए बनाये गये रास्तों एवं गलियों को सम्मिलित किया जाता है ।

✳️ सन्नगर :- 

🔹 सन्नगर शब्द को परिभाषित कीजिए । ये विशाल विकसित नगरीय क्षेत्र होते हैं जो कि मूलतः अलग - अलग नगरों या शहरों के आपस में मिल जाने से एक विशाल नगरीय क्षेत्र परिवर्तित हो जाते हैं ।

✳️ उपनगरीकरण :-

🔹  उपनगरीकरण एक नई प्रवृत्ति है जिसमें मनुष्य शहर के घने बसे क्षेत्रों से हटकर रहन - सहन की अच्छी गुणवत्ता की खोज में शहर के बाहर स्वच्छ एवं खुले क्षेत्रों में जा रहे हैं । बड़े शहरों के समीप ऐसे महत्वपूर्ण उपनगर विकसित हो जाते हैं , जहाँ से प्रतिदिन हजारों व्यक्ति अपने घरों से कार्य - स्थल पर आते जाते हैं ।

✳️ विश्व नगरी :-

🔹  इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले कब व किसने किया ? विश्व नगरी शब्द की उत्पति यूनानी शब्द मेगालोपोलिस से हुई है । इसका प्रयोग सबसे पहले 1957 में जीन गोटमने ने किया । विश्व नगरी एक बड़े महानगर प्रदेश को कहते है जो कई सन्नगरों का समूह होता है । उदाहरण उ . अमेरिका में बोस्टन से वाशिंगटन तक नगरीय समूह दिखाई देता है ।

✳️ ग्रामीण बस्तियों की समस्याएँ :-

🔹  विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों में जल की आपर्ति पर्याप्त नहीं होती है पर्वतीय एवं शुष्क क्षेत्रों में निवासियों को पेयजल हेतु लम्बी दूरियाँ तय करनी पड़ती है ।

🔹 जल जनित बीमारियाँ , जैसे हैजा , पीलिया आदि सामान्य समस्या है । दक्षिणी एशिया के देश प्रायः बाढ़ एवं सूखे से ग्रस्त रहते है ।

🔹 सिंचाई सुविधाओं का अभाव होने से कृषि कार्य प्रभावित होता है ।

🔹 कच्ची सड़के एवं आधुनिक संचार के साधनों का अभाव उनके विकास मार्ग में बाधा डालता है ।

🔹 विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा सम्बन्धी पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है । ( शौच घर एवं कूड़ा - कचरा निस्तारण , विद्यालयों का अभाव ।

🔹  विकास के लिए आपेक्षित आधारभूत अवसरंचना का सदैव अभाव रहता है ।


✳️ आकृति के आधार पर संसार में ग्रामीण बस्तियों के पांच प्रतिरूप :-


🔹  1 ) रैखिक प्रतिरूप : - ऐसी बस्तियों का विकास सड़को , नदियों , नहर रेल लाइनों के किनारे के साथ - साथ होता है ।

🔹 2 ) आयताकार प्रतिरूप : - ऐसी बस्तियाँ का विकास ऐसे स्थानों पर होता है जहां सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती है ।

🔹 3 ) वृत्ताकार प्रतिरूप : - ऐसी बस्तियाँ मूख्य रूप से किसी तालाब , झील के चारों ओर विकसित हो जाती है ।

🔹 4 ) तारक प्रतिरूप : - कभी - कभी कई सड़क मार्ग विभिन्न दिशाओं से आकर एक बिन्दु पर मिलते हैं ऐसे स्थानों पर बसे गाँवों में सभी दिशाओं से आने वाली सड़कों के किनारे मकान बने होते हैं । वहाँ तारे के आकार की बस्तियाँ बन जाती है ।

🔹 5 ) टी आकार , वाई आकार या क्रास के आकार की बस्तियाँ - जहाँ तिराहे मिलते हैं । वहाँ विकसित होती हैं । ' Y ' आकार की बस्तियों वहाँ विकसित होती हैं जहां दो मार्ग आकार तीसरे मार्ग से मिलते हैं ।

✳️ ग्रामीण बस्तियों की स्थिति को प्रभावित करने वाली भौगोलिक परिस्थितियाँ :-

🔹 1 ) जल आपूर्ति : - साधारणतया ग्रामीण बस्तियाँ जल स्रोतो या जलराशियों जैसे नदियों , झीलों एवं झरनों इत्यादि के समीप स्थित होती है । कभी - कभी पानी की आवश्यकता लोगों को असुविधाजनक स्थानों जैसे दलदल से घिरे द्वीपों अथवा नदी किनारों के निचले क्षेत्रों में बसने के लिए प्रेरित करती है ।

🔹 2 )  भूमि : - मनुष्य बसने के लिए उस जगह का चुनाव करता है जहाँ की भूमि कृषि कार्य के लिए उपयुक्त व उपजाऊ हो । किसी भी क्षेत्र में प्रारम्भिक आदिवासी उपजाऊ एवं समतल क्षेत्रों में ही बसते थे । दक्षिणी पूर्वी एशिया में रहने वाले लोग नदी , घाटियों के लिए निम्न भाग एवं तटवर्ती मैदानों के निकट बस्तियाँ बसाते हैं जो चावल की कृषि के लिए सहायक हैं ।

🔹 3 ) उच्च भूमि क्षेत्र : - मानव ने अपने निवास हेतु ऊँचे क्षेत्रों को इसलिए चुना ताकि वहां पर बाढ़ के समय होने वाली क्षति से बचा जा सके एवं मकान व जीवन सुरक्षित रह सके । उष्ण कटिबंधीय देशों में दलदली क्षेत्रों के निकट लोग अपने मकान स्तम्भों पर बनाते हैं जिससे कि बाढ़ एवं कीड़े - मकोड़ों से बचा जा सके ।

🔹 4 ) गृह - निर्माण सामग्री : - लोगों ने ग्रामीण बस्तियों को बसाने के लिए उन स्थानों को चुना जहाँ निर्माण सामग्री आसानी से उपलब्ध थी जैसे लकड़ी तथा पत्थर आदि । चीन के लोयस क्षेत्र में वहां के निवासी कंदराओं में मकान बनाते थे ।

✳️ नगरीय बस्ती :-

🔹नगरीय बस्ती वह बस्ती है जिसके निवासियों का मुख्य व्यवसाय द्वितीयक तृतीयक एवं चतुर्थक गतिविधियों से सम्बन्धित होता है । लंदन नगर को विश्व की प्रथम नगरीय बस्ती कहा गया है ।

✳️  नगर बस्तियों का वर्गीकरण :-

🔹 1 ) जनसंख्या का आकार : - नगरीय क्षेत्रों को परिभाषित करने के लिए अधिकतर देशों ने इसी मापदंड को आधार बनाया है नगरीय क्षेत्र की श्रेणी के लिए जनसंख्या के आकार की निचली सीमा कोलंबिया में 1500 , अर्जेंटाइना एवं पुर्तगाल में 2000 , संयुक्त राज्य अमेरीका एवं थाईलैंड में 2500 , भारत में 5000 एवं जापान में 30 , 000 व्यक्ति है । भारत में जनसंख्या घनत्तव 400 , डेनमार्क , स्वीडन , फिनलैंड में 250 जनसंख्या वाले क्षेत्र नगरीय हैं ।

🔹 2 ) व्यावसायिक संरचना : - जनसंख्या के अतिरिक्त व्यावसायिक गतिविधियों को भी नगरीय बस्तियों का मापदंड माना जाता है । इटली में उस बस्ती को नगरीय बस्ती कहा जाता है । जिसकी 50 प्रतिशत उत्पादक जनसंख्या गैर कृषि कार्य में लगी हो । भारत में यह मापदंड 75 प्रतिशत है ।

🔹3 ) प्रशासन : - कुछ देशों में प्रशासनिक ढांचे को इसका मापदंड माना जाता है । भारत में किसी भी आकार की बस्ती को नगरीय बस्ती में वर्गीकृत किया जाता है । यदि वहां नगरपालिका , छावनी , बोर्ड अधिसूचित नगर क्षेत्र हो ।

✳️ नगरीय बस्तियों की प्रमुख चार समस्याएँ :-

🔹 1 ) विकासशील देशों में अधिकतर शहर अनियोजित :- विकासशील देशों में अधिकतर शहर अनियोजित है । अतः शहरों में लगातार प्रवास अत्यन्त भीड की स्थिति पैदा कर देते हैं । विकासशील देशों के आधुनिक शहरों में आवासों की कमी , बहु मंजिले मकान , गन्दी बस्तियों की वृद्धि प्रमुख समस्यायें हैं ।

🔹 2 ) आर्थिक समस्याएँ : - विश्व के विकासशील देशों में ग्रामीण व छोटे नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के घटते अवसरों के कारण जनसंख्या का शहरों की और पलायन हो रहा है । नगरों में बड़ी संख्या में प्रवासी जनसंख्या के कारण अकुशल और अर्द्ध कुशल श्रमिकों का जमावड़ा हो रहा है , जबकि इन क्षेत्रों में जनसंख्या पहले से ही चरम पर होती है।

🔹 3 ) सामाजिक - सांस्कृतिक समस्याएँ : - उपलब्ध शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं गरीब नगरवासियों की पहुँच से बाहर है । रोजगार की कमी और शिक्षा का अभाव अपराधों की वृद्धि दर को और अधिक बदतर कर रहे हैं । ग्रामीण क्षेत्रों से स्थानान्तरित जनसंख्या में पुरुषों की अधिकता के कारण नगरों में लिंग अनुपात प्रतिकूल है ।

🔹 4 ) पर्यावरण सम्बन्धी समस्याएँ : - विकासशील देशों में नगरों की विशाल जनसंख्या भारी मात्रा में जल का उपयोग करती है परिणाम इसमें असाधारण कमी होती जा रही हैं पीने के लिए घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए नगरों में जल की भारी कमी है घरों और उद्योगों में पारम्परिक ईधन के उपयोग से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है जनसंख्या को आवास प्रदान करने के लिए विशाल कंकरीट ढांचे बनाए जाते हैं जो नगरों को उष्ण - द्वीप में परिवर्तित कर रहे हैं ।

✳️ आकार , उपलब्ध सुविधा व उनके द्वारा संपन्न किये जाने वाले कार्यों के आधार पर नगरीय बस्तियों का वर्गीकृत :- 

🔹 नगर : - निर्माण , खुदरा एवं थोक व्यापार व व्यावसायिक सेवाओं के केन्द्र के रूप में जाने जाते हैं ।

🔹 शहर : - प्रमुख वित्तीय संस्थान , प्रादेशिक प्रशासकीय कार्यालय व यातायात के केंद्र के होते हैं । 10 लाख से अधिक जनसंख्या होने पर मिलियन सिटी कहा जाता है ।

🔹 सन्नगर : - अलग - अलग नगरों या शहरों के आपस में मिल जाने से एक विशाल नगरीय क्षेत्र सन्नगर कहलाता है । ग्रेटर लंदन , मानचेस्टर , शिकागों टोक्यो , वृहत मुबंई आदि ।

🔹  विश्व नगरी : - यह बड़ा महानगर प्रदेश होता हैं जिसमें सन्नगरों का समूह होता है । वोस्टन व वाशिगंटन इसके अच्छे उदाहरण हैं ।

🔹 मिलियन सिटी : - एक मिलियन से अधिक जनसंख्या वाले शहर मिलियन सिटी कहलाते हैं । 1800 में लंदन सबसे पहला मिलियन सिटी बना । विश्व में 438 मिलियन सिटी हैं ।

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