10 Class Science Notes in hindi chapter 3 Metals and Non-metals अध्याय - 3 धातु एवं अधातु

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10 Class Science Notes in hindi chapter 3 Metals and Non-metals अध्याय - 3 धातु एवं अधातु

CBSE Revision Notes for CBSE Class 10 Science Metals and Non-metals Metals and non metals: Properties of metals and non-metals; Reactivity series; Formation and properties of ionic compounds; Basic metallurgical processes; Corrosion and its prevention.

Class 10th Science chapter 3 Metals and Non-metals Notes in Hindi 

📚 अध्याय - 3 📚
👉 धातु एवं अधातु 👈

👉 तत्व तीन प्रकार के होते हैं - धातु , अधातु एवं उपधातु ।

✳️ धातु :- 

🔹 वे तत्व जो इलेक्ट्रॉन देने की प्रकृति रखते हैं , धातु कहलाते हैं | जैसे : सोडियम , मैग्नीशियम , कैल्शियम , आयरन इत्यादि । धातु ऊष्मा तथा विधुत के सुचालक होते हैं ।

✳️ अधातु :-

🔹 वे तत्व जो इलेक्ट्रॉन लेने की प्रकृति रखते हैं , अधातु कहलाते हैं | जैसे : क्लोरीन , ऑक्सीजन , कार्बन इत्यादि ।

✳️ उपधातु :-

🔹वे तत्व जो इलेक्ट्रॉन देने या लेने की प्रकृति रखते हैं , उपधातु कहलाते हैं | जैसे : सिलिकॉन ।

✳️ धातुओं के भौतिक गुण  : -

( i ) धातु ठोस और चमकीले होते हैं । 
( ii ) ये ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं | 
( iii ) धातुएँ तन्य होती हैं । 
( iv ) धातुएँ अघातवर्ध्य होती है । 
( v ) धातुएँ ध्वानिक होती हैं ।

🔹1. धात्विक चमक :- धातु की सतह चमकदार होती है 

🔹 2. कठोरता धातुएँ सामान्यत :- कठोर होती हैं । लेकिन लीथियम , सोडियम , पोटैशियम मुलायम होते हैं और इन्हें चाकू से काटा जा सकता है । 

🔹 3. रूप :- धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस रूप में पाई जाती हैं । 
केवल मर्करी ( पारा ) को छोड़कर जो द्रव रूप में पाया जाता है । 

🔹 4. आघातवर्ध्यता :- कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादर के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है ।

✳️ 5. तन्यता :- धातुओं को पतली तार के रूप में खींचा जा सकता है । 

✳️ 6. विद्युत व ऊष्मा के चालक :- सामान्यतः धातुएँ विद्युत व ऊष्मा की सुचालक होती हैं । सीसा ( Pb ) एवं मर्करी ( Hg ) कुचालक होते हैं । 

✳️ 7.घनत्व :- सामान्यतः अधिक घनत्व व उच्च गलनांक सोडियम एवं पोटैशियम का घनत्व तथा गलनांक कम होता है । 

✳️ 8. ध्वानिक :- धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर आवाज पैदा करती हैं ।

✳️ 9. ऑक्साइड :- अधिकतर धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती है जैसे Mgo ( मैग्नीशियम ऑक्साइड )

✳️ अधातुओं के भौतिक गुण  : -

🔹 अधातुएँ चमकीली नहीं होती । आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला होता है । 

🔹 ये अधिकतर कठोर नहीं होते । कार्बन का एक अपरूप हीरा है जो सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है । 

🔹 अधातुएँ ठोस या गैसीय रूप में पाईं जाती हैं । केवल ब्रोमीन को छोड़कर जो तरल रूप में होती है । 

🔹 अधातुएँ आघातवर्ध्य नहीं होती ।

🔹 आधातुएँ तन्य नहीं होती । 

🔹 सामान्यत : अधातुएँ विद्युत व ऊष्मा की कुचालक होती हैं । ग्रेफाइट सुचालक होता है । 

🔹 सामान्यतः अधातुओं का घनत्व व गलनांक कम होते हैं । 

🔹 अधातुएँ ध्वानिक नहीं होती हैं । 

🔹 अधातुएँ अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं जैसे SO ,

✳️ धातुओं के रासायनिक गुणधर्म :-

✴️ ( i ) वायु के साथ अभिक्रिया :- 

🔹 धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु आक्साइड बनाती हैं । 
             धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड 

🔹 उदाहरण :-

            2Cu + 0₂ → 2Cuo 
                                कॉपर ऑक्साइड ( काला ) 

           4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ 
                                 ऐलुमिनियम ऑक्साइड 

          2Mg + O → 2MgO 
                                मैग्नीशियम ऑक्साइड 

धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अलग - अलग तरह से अभिक्रिया दिखाती हैं । 

🔹 Na और K वायु में आकस्मिक आग पकड़ लेते हैं जिसे रोकने के लिए इन्हें केरोसिन तेल में डुबो कर रखा जाता है ।

🔹 Mg , Al , Zn , Pb वायु के साथ धीरे अभिक्रिया करते हैं । इन धातुओं पर आक्साइड की परत चढ़ जाती है । 

🔹 Fe ( आयरन ) वायु में गर्म करने पर प्रज्वलित नहीं होता लेकिन ज्वाला में लौहचूर्ण डालने पर वे तेजी से जलने लगते हैं । 

🔹 Cu भी प्रज्वलित नहीं होता लेकिन उस पर काले रंग के कॉपर ऑक्साइड की परत चढ़ जाती है ।

🔹 Ag ( चाँदी ) Au ( सोना ) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते । 

✴️ उभयधर्मी ऑक्साइड :-

🔹 वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं और लवण और जल उत्पन्न करते हैं ।

🔹 उदाहरण : 
                Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ , + H₂O 
                Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O 
                                               सोडियम ऐलुमिनेट 

✴️ ( ii ) जल के साथ अभिक्रिया :-

धातु + जल → धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन 
धातु ऑक्साइड + जल → धातु हाइड्रोक्साइड


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🔹 उदाहरण :-

              2Na + H₂O → 2NaOH + H₂ + 37 ऊष्मा 
                Ca + H₂O → Ca(OH)₂ + H ₂
             Mg + 2H₂O → Mg (OH)₂ + H₂ 
            2Al + 3H₂O → Al₂O₃ + 3H₂    
            3Fe + 4H₂0 → Fe₃O₄ + 4H₂ 

✴️ ( iii ) धातुओं की तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया :- 

       धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस 

🔹 उदहारण :-

            2Fe + 6HCl → 2FeCl₃ + 3H₂
             Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂
             Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂
          2A1 + 6HCl → 2A1C1₃ + 3H₂
         Cu , Ag , Hg तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करते ।

✴️ ( iv ) धातुओं की अन्य धातु लवणों के साथ अभिक्रिया :-

धातु ( क ) + लवण विलयन ( ख ) → लवण विलयन ( क ) + धातु ( ख )

अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ अपने से कम क्रियाशील धातुओं को उनके यौगिक के विलयन से विस्थापित करती हैं । यह धातुओं की सक्रियता श्रेणी पर आधारित है । 

✳️ सक्रियता श्रेणी :-

🔹  वह सूची जिसमें धातुओं को क्रियाशीलता के अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया गया है ।
___________________________________

K पोटैशियम
Na सोडियम ⬅️ अत्याधिक क्रियाशील धातुएं
Ca कैल्शियम 
___________________________________

___________________________________

Mg मैग्नीशियम 
AI एलुमिनियम ⬅️  कम क्रियाशील धातुएं
Zn जिंक
Pb लैड 
___________________________________

___________________________________

H हाइड्रोजन 
Cu कॉपर 
Hg पारा    ⬅️  न्यूनतम क्रियाशील धातुएं
Ag चांदी 
Au सोना
____________________________________

✴️ ( v ) धातुओं की अधातुओं के साथ अभिक्रिया :-

🔹  तत्वों की अभिक्रियाशीलता संयोजकता कोश को पूर्ण करने की प्रवृत्ति के रूप में समझी जा सकती है । 

धातु के परमाणु अपने संयोजकता कोश से इलेक्ट्रॉन त्याग करते हैं और धनायन बनाते हैं । अधातु के परमाणु संयोजकता कोश में इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाते हैं । 

🔹 उदाहरण :-

 NaCl का निर्माण


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✳️ आयनिक यौगिक :-

🔹 विपरीत आवेशित आयन एक दूसरे को आकर्षित करते हैं तथा मजबूत स्थिर वैद्युत बल में बंधकर आयनिक यौगिक बनाते हैं । 

✳️ आयनिक यौगिकों के गुणधर्म :-

✴️ ( 1 ) भौतिक प्रकृति : ये ठोस व कुछ कठोर होते हैं । ये सामान्यतः भंगुर होते हैं । 

✴️ ( 2 ) गलनांक एवं क्वथनांक : आयनिक यौगिकों का गलनांक व क्वथनांक बहुत अधिक होता है । 

✴️ ( 3 ) घुलनशीलता : आयनिक यौगिक प्रायः जल में घुलनशील व केरोसीन , पेट्रोल जैसे विलायकों में अविलेय होते हैं ।


✴️ ( 4 ) विद्युत चालकता : आयनिक यौगिक जलीय विलयन में और गलित रूप में विद्युत का चालन करते हैं । ये ठोस रूप में विद्युत का चालन नहीं करते हैं । 

✳️ III . धातुओं की प्राप्ति / धात्विकी :-

✴️ खनिज :- पृथ्वी में प्राकृतिक रूप से उपस्थित तत्वों एवं यौगिकों को खनिज कहते हैं ।

✴️ अयस्क :- वे खनिज जिनमें धातु अधिक मात्रा में पाई जाती है और उसे निकालना लाभकारी होता है , उसे अयस्क कहते हैं ।

✳️ गैंग :-

🔹 पृथ्वी से खनित अयस्कों में रेत , मिट्टी आदि जैसी कई अशुद्धियाँ पाई जाती हैं , जिन्हें गैंग ( gangue ) कहा जाता है । 

✳️ भर्जनः-

🔹 सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में बदल जाता है । इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं । 

🔹 उदाहरण :


10 Class Science Notes in hindi chapter 3 Metals and Non-metals

✳️ निस्तापन :-

🔹 कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में बदल जाता है । इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है ।
10 Class Science Notes in hindi chapter 3 Metals and Non-metals

✳️ अपचयन :-

🔹 धातु आक्साइड से कार्बन जैसे अपचायक का उपयोग कर धातु प्राप्त की जा सकती है ।

                   ZnO + C → Zn + CO 

✳️ धातुओं का परिष्करण :-

🔹  धातुओं से अपद्रव्य को हटाने के लिए सबसे अधिक उपयोगी विधि विद्युत अपघटनी परिष्करण है ।


10 Class Science Notes in hindi chapter 3 Metals and Non-metals

ऐनोड पर → अशुद्ध ताँबा 
कैथोड पर → शुद्ध ताँबा 
विलयन → Cuso₄ + तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ( सूक्ष्म मात्रा में ) 

🔹 विद्युत अपघट्य से जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब ऐनोड से अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है । 

🔹 उतनी ही मात्रा में शुद्ध कॉपर विद्युत अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है । 

🔹 अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड तली पर निक्षेपित होती है , जिसे ऐनोड पंक कहते हैं । 

✳️ संक्षारण :-

🔹 धातुएँ अपने आसपास अम्ल , आर्द्रता एवं वायु आदि के संपर्क में आने पर संक्षारित हो जाती हैं । 

✴️ ( 1 ) सिल्वर :- वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया कर सिल्वर - सल्फाइड बनाता है जिसके कारण वस्तु काली हो जाती है । 

✴️ ( 2 ) कॉपर :- कॉपर आर्द्र कार्बन डाइआक्साइड के साथ अभिक्रिया करके हरे रंग का कॉपर कार्बोनेट बनाता है ।

✴️ ( 3 ) लोहा :- आई वायु में लोहे पर भूरे रंग के पदार्थ की परत चढ़ जाती है , जिसे जंग कहते हैं । 

✳️ संक्षारण से सुरक्षा :- 

🔹 लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है : पेंट करके , तेल लगाकर , ग्रीज लगाकर , यशदलेपन करके , क्रोमियम लेपन द्वारा , ऐनोडीकरण या मिश्रधातु बनाकर । 

✳️ यशदलेपन :-

🔹 लोहे एवं इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जस्ते ( Zinc ) की पतली परत चढ़ाई जाती है , इसे यशदलेपन प्रक्रम कहते हैं ।

✳️ मिश्र धातु :-

🔹 मिश्र धातु दो या दो से अधिक धातु या धातु और अधातु के समांगी मिश्रण होते हैं । 

🔹 लोहा सूक्ष्म मात्रा में कार्बन के मिश्रण के साथ लोहा कठोर और प्रबल हो जाता है । 
🔹 इस्पात ( Steel ) = लोहा + निकैल और क्रोमियम 
🔹 पीतल = कॉपर + जिंक 
🔹 कांसा = कॉपर + टिन 
🔹 सोलडर = लैड + टिन 
🔹 अमलगम = मर्करी ( पारद ) + अन्य तत्व