10 Class Science Notes in hindi chapter 2 Acids Bases and Salts अध्याय - 2 अम्ल , क्षारक एवं लवण

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10 Class Science Notes in hindi chapter 2 Acids Bases and Salts अध्याय - 2 अम्ल , क्षारक एवं लवण

CBSE Revision Notes for CBSE Class 10 Science Acids Bases and Salts Acids, bases and salts: Their definitions in terms of furnishing of H+ and OH–ions, General properties, examples and uses, concept of pH scale (Definition relating to logarithm not required), importance of pH in everyday life; preparation and uses of Sodium Hydroxide, Bleaching powder, Baking soda, Washing soda and Plaster of Paris.

Class 10th Science chapter 2 Acids Bases and Salts Notes in Hindi 

📚 अध्याय - 2 📚
👉 अम्ल , क्षारक एवं लवण 👈

✳️ अम्ल :- ( ACID ) 

🔹 ACID शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है खट्टा ।
🔹  ये स्वाद में खट्टे होते हैं । 
🔹  ये नीले लिटमस को लाल में बदल देते हैं । 
🔹  ये जलीय विलयन में H + आयन देते हैं । 


प्रबल अम्ल : HCI,H₂SO₄,HNO₃ 
दुर्बल अम्ल : CH₃COOH , लैक्टिक अम्ल , ऑक्सैलिक अम्ल 
सान्द्र अम्ल : जिसमें अम्ल अधिक मात्रा में होता है , जबकि जल अल्प मात्रा में होता है । 
तनु अम्ल : जिसमें अम्ल अल्प मात्रा में होता है , जबकि जल अधिक मात्रा में होता है । 

✳️ क्षारक :- ( Base ) 

🔹 ये स्वाद में कड़वे होते हैं । 
🔹 ये लाल लिटमस को नीले में बदल देते हैं । 
🔹 ये जलीय विलयन में OH⁻ आयन देते हैं । 

प्रबल क्षारक : NaOH,KOH,Ca(OH)₂ .
दुर्बल क्षारक : NH₄OH .
क्षार ( Alkali ) : जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं । NaOH,KOH,Mg(OH)₂ .
लवण ( Salt ) : लवण अम्ल व क्षारक की परस्पर अभिक्रिया से प्राप्त होता है । 

उदाहरण : NaCl , KCI 

✳️ सूचक ( Indicators ) : 

🔹 सूचक किसी दिए गए विलयन में अम्लया क्षारक की उपस्थिति दर्शाते हैं । इनका रंग या गंध अम्लीय या क्षारक माध्यम में बदल जाता है ।

✳️ सूचक के प्रकार :-

🔹 वैसे तो संसूचक बहुत प्रकार के होते है । परन्तु इनके समान्य प्रकार इस प्रकार है :

✳️ ( i ) प्राकृतिक संसूचक ( Natural Indicator ) :-

🔹 वे सूचक जो प्राकृतिक स्रोतों के प्राप्त होते है प्राकृतिक संसूचक कहलाते है । जैसे - लिटमस , हल्दी , चाइना रोज , लाल गोभी आदि | 

🔹 लिटमस : लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक होता है जो थैलाफाइटा समूह के लाईकेन ( Lichen ) के पौधे से निकला जाता है | लिटमस विलयन जब न तो अम्लीय होता है न ही क्षारकीय , तब इसका रंग बैगनी होता है । 

🔹 लिटमस पत्र : लिटमस पत्र दो रंगों का होता है नीला एवं लाल | अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है जबकि क्षार लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है । 

🔹 हल्दी : हल्दी भी एक अन्य प्रकार का प्राकृतिक सूचक है । यह पीला रंग का होता है , कई बार आपने देखा होगा जब किसी सफ़ेद कपड़ों पर सब्जी का दाग लग जाता है और जब इसे साबुन ( क्षारीय प्रकृति ) से धोते है तो यह उस दाग के धब्बे को भूरा - लाल कर देता है । " अम्ल के साथ हल्दी के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है । " क्षारक के साथ इसका रंग भूरा - लाल हो जाता है |

✳️ ( ii ) संश्लेषित संसूचक ( Synthetic Indicator ) :-

🔹  ये वे सूचक है जो प्राकृतिक नहीं होते अपितु ये रसायनिक पदार्थों द्वारा बनाए गए होते है । जैसे - मेथिल ऑरेंज एवं फिनोल्फ्थेलीन आदि | इनका उपयोग अम्ल एवं क्षारक की जाँच के लिए होता है । 

✳️ ( iii ) गंधीय संसूचक ( Olfactory Indicator ) : 

🔹 कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है । ऐसे पदार्थों को गंधीय ( Olfactory ) सूचक कहते हैं | जैसे - वैनिला , प्याज एवं लौंग आदि 

✳️ ( iv ) सार्वत्रिक सूचक ( Universal Indicator ) : 

🔹 सार्वत्रिक सूचक अनेक सूचकों का मिश्रण होता है | लिटमस , मेथिल ऑरेंज एवं फिनोल्फ्थेलीन आदि जैसे सूचकों के उपयोग से किसी विलयन के केवल अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का । पता लगाया जा सकता है परन्तु इस सार्वत्रिक सूचक के प्रयोग से अम्ल या क्षारक की प्रकृति के साथ - साथ उनकी प्रबलता की माप का माप भी बताता है ।


10 Class Science Notes in hindi chapter 2 Acids Bases and Salts
10 Class Science Notes in hindi chapter 2 Acids Bases and Salts

✳️ पॉप टैस्ट :- 

🔹 हाइड्रोजन गैस से निहित परखनली के पास जब एक जलती हुई मोमबत्ती लाई जाती है , तो पॉप की ध्वनि उत्पन्न होती है । इस टैस्ट को हाइड्रोजन की उपस्थिति दर्शाने के लिए प्रयोग करते हैं ।

धातु कार्बोनेट तथा धातु बाईकार्बोनेट की अभिक्रिया 

🔹 अम्ल के साथ 
🔹 क्षार के साथ 


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✳️ अम्ल एवं क्षारक की परस्पर अभिक्रिया :- 

🔹 अम्ल + क्षारक → लवण + जल 

✳️ उदासीनीकरण अभिक्रिया :- 

🔹 जब अम्ल द्वारा क्षारक का प्रेक्षित प्रभाव तथा क्षारक द्वारा अम्ल का प्रभाव समाप्त हो जाता है और परिणामस्वरूप लवण और जल प्राप्त होते हैं तो उदासीनीकरण अभिक्रिया होती है । 

उदहारण : NaOH(aq) + HCI(aq) → NaCl(aq) + H2O (l) 

प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक → अम्लीय लवण + जल 
दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक → क्षारीय लवण + जल 
प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक → उदासीन लवण + जल 
दुर्बल अम्ल + दुर्बल क्षारक → उदासीन लवण + जल 

✳️ अम्लों के साथ धात्विक ऑक्साइडों की अभिक्रिया :- 

धात्विक आक्साइड + अम्ल → लवण + जल 
CaO + 2HCl → CaCl2 + CaCl2
( कैल्शियम क्लोराइड के बनने से विलयन का नीला रंग हो जाता है ) 

धात्विक आक्साइड की प्रवृति क्षारीय होती है । क्योंकि ये अम्ल के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं । 

उदाहरण : Cuo , Mgo


✳️ अधात्विक आक्साइड की क्षारों के साथ अभिक्रिया :- 

   अधात्विक ऑक्साइड +     क्षार       → लवण      + जल 
                         CO₂ +  Ca(OH)₂ → CaCO₃ + H₂O


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✳️ अम्लों व क्षारकों में समानताएं :- 
                     सभी
                      ⬇️
🔹 अम्ल H⁺ आयन उत्पन्न करते हैं ।
🔹 क्षारक OH⁻ आयन उत्पन्न करते हैं । 

🔹जब कोई अम्ल या क्षारक जल में मिलाया जाता है तो ये तनुकृत हो जाता है । जल में मिलाने पर आयन की सांद्रता H₃O⁺ या OH⁻ में प्रति इकाई आयतन की कमी हो जाती है ।

✳️ क्षार तथा अम्ल की प्रबलता :- 

🔹 किसी क्षार या अम्ल की प्रबलता उसके द्वारा उत्पन्न H + आयन या OH- आयनों की संख्या पर निर्भर करती है । 

किसी अम्ल या क्षारक की प्रबलता हम एक सार्वभौमिक सूचक द्वारा ज्ञात कर सकते हैं ।

✳️ सार्वभौम सूचक ( Universal Indicator ) 

🔹 अनेक सूचकों का मिश्रण होता है ।
🔹 यह सूचक किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की विभिन्न सांद्रता को विभिन्न रंगों में प्रदर्शित करते हैं ।

✳️ जलीय विलयन में अम्ल और क्षारक :- 

🔹  जल की उपस्थिति में अम्ल H⁺ आयन उत्पन्न कहते हैं । 
H⁺ आयन H₃O⁺ ( हाइड्रोनियम आयन के रूप में पाए जाते हैं । ) 
            H⁺ + H₂O→H₃O⁺ 
            HCI + H₂O→H₃O⁺ +Cl⁻


🔹 जल की उपस्थिति में क्षारक ( OH⁻) आयन उत्पन्न करते हैं ।


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🔹 सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते हैं । जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं । सभी क्षार क्षारक होते हैं परन्तु सभी क्षारक क्षार नहीं होते । 

🔹 जल के साथ अम्ल या क्षारक को मिलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए । हमेशा अम्ल या क्षारक को जल में ही मिलना चाहिए और लगातार इसे हिलाते रहना चाहिए , क्योंकि यह प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी है । 


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🔹 सांद्र अम्ल में जल मिलाने पर उत्पन्न हुई ऊष्मा के कारण मिश्रण आस्फलित हो कर बाहर आ सकता है तथा आप जल सकते हैं । साथ ही अत्यधिक स्थानीय ताप के कारण काँच का पात्र भी टूट सकता है ।
✳️ जल को अम्ल में डालने से :- 

🔹 मिश्रण आस्फलित होकर बाहर आ सकता है ।
🔹  स्थानीय ताप के कारण काँच का पात्र टूट सकता है ।

 ✳️ pH स्केल :- 

🔹 किसी विलयन में उपस्थित H आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया जिसे pH स्केल कहते हैं । 
pH में p है ' पुसांस ' ( Potenz ) जो एक जर्मन शब्द है , जिसका अर्थ होता है शक्ति अगर 
          PH = 7 → उदासीन विलयन 
          PH < अम्लीय विलयन
          PH > 7 क्षारीय विलयन 

यह स्केल 0 से 14 तक pH ज्ञात करने के लिए उपयोग में लाया जाता है ।
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✳️ दैनिक जीवन में pH का महत्त्व :- 

🔹 पौधे एवं पशु pH के प्रति संवेदनशील होते हैं । :- 

हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास ( range ) के बीच कार्य करता है । वर्षा के जल की pH मान जब 5.6 से कम हो जाती है तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है ।

🔹 मिट्टी का pH :-

अच्छी उपज के लिए पौधों को एक विशिष्ट pH परास की आवश्यकता होती है । यदि किसी स्थान की मिट्टी का pH कम या अधिक हो तो किसान उसमें आवश्यकतानुसार अम्लीय या क्षारीय पदार्थ मिलाते हैं ।

🔹 हमारे पाचन तंत्र का pH :-

 हमारा उदर ( stomach ) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( HCI ) उत्पन्न करता है जो भोजन के पाचन में सहायक होता है । अपच की स्थिति में उदर अधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न करता है जिसके कारण उदर में दर्द व जलन का अनुभव होता है । 

इस दर्द से मुक्त होने के लिए ऐन्टैसिड ( antacid ) जैसे क्षारकों का उपयोग किया जाता है जो अम्ल की अधि कि मात्रा को उदासीन करता है । जैसे ( मिल्क ऑफ मैग्नीशिया )

🔹 pH परिवर्तन के कारण दंत क्षय :-

मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय प्रारंभ हो जाता है । 

दाँतों का इनैमल ( दन्तवल्क ) कैल्सियम फॉस्फेट से बना होता है जो कि शरीर का सबसे कठोर पदार्थ होता है , यह जल में नहीं घुलता लेकिन मुँह की pH का मान 5.5 से कम होने पर संक्षारित हो जाता है । क्षारकीय दंत - मंजन का उपयोग करने से अम्ल की आधिक्य मात्रा को उदासीन किया जा सकता है । 

🔹 पशुओं एवं पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा :-

मधुमक्खी का डंक एक अम्ल छोड़ता है जिसके कारण दर्द एवं जलन का अनुभव होता है । डंक मारे गए अंग में बेकिंग सोडा के उपयोग से आराम मिलता है । 

नेटल ( Nettle ) के डंक वाले बाल मैथनोइक अम्ल छोड़ जाते हैं जिनके कारण जलन वाले दर्द का अनुभ व होता है । इसका इलाज डंक वाले स्थान पर डॉक पौधे की पत्ती रंगड़कर किया जाता है । 

✳️ लवणों का pH :- 

1. प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक → उदासीन लवण pH = 7 → eg NaCl 
2. प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक  → अम्लीय अवण pH < 7 → eg NH₄CI 
3. प्रबल क्षारक + दुर्बल अम्ल → क्षारकीय लवण pH > 7 → eg CH₃COONa
✳️ साधारण नमक से रसायन :- 

👉 1 . सेडियम हाइड्रॉक्साइड ( NaOH )
👉 2 . विरंजक चूर्ण ( CaoCl₂)
👉 3 . बेकिंग सोडा ( NaHCO₃ )
👉 4 . धोने का सोडा ( Na₂Co₃ . 10H₂O )
👉 5 . प्लास्टर ऑफ पेरिस    

✳️ 1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( NaOH ) :- 

🔹 सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन ( लवण जल ) से विद्युत प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न करता है । इस प्रक्रिया को क्लोर - क्षार प्रक्रिया कहते हैं ।
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2NaCl (aq) + 2H2O(l) → 2NaOH (aq) + Cl2(g) + H2( g ) 

ऐनोड पर → CI2 गैस 
कैथोड पर → H2 गैस 
कैथोड के पास → NaOH विलयन बनता है ।

🔹  उपयोग :-

H2 → ईधन मार्गरीन 
CI2 → जल की स्वच्छता , PVC , CFC 
HCI → इस्पात की सफाई , औषधियाँ 
NaOH → धातुओं से ग्रीज हटाने के लिए , साबुन , कागज बनाने के लिए 
Cl2 + NaOH → विरंजक चूर्ण → घरेलू विरंजन , वस्त्र विरंजन के लिए 

✳️ 2. विरंजक चूर्ण :- 

🔹 शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)2] पर क्लोरीन की क्रिया से विरंजक चूर्ण का निर्माण होता है । 
             Ca(OH)2 + Cl CaOCI 2 + H2O

🔹 उपयोग :- 

( a ) वस्त्र उद्योग में सूती व लिनेन के विरंजन के लिए । 
( b ) कागज की फैक्टरी में लकड़ी के मज्जा के विरंजन के लिए ।( c ) रासायनिक उद्योगों में एक उपचायक के रूप में । 
( d ) पीने वाले जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए रोगाणु नाशक के रूप में । 

✳️ 3. बेकिंग सोडा :-

 NaCl + H2O + CO2 + NH3 + NH4Cl + NaHCO3 बैकिंग सोडा यह एक दुर्बल असंक्षारक क्षारक है । 
खाना पकाते समय गर्म करने पर इसमें निम्न अभिक्रिया होती है :


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🔹 उपयोग :-

( a ) बेकिंग पाउडर बनाने में ( बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल ) 
( b ) इस अभिक्रिया से उत्पन्न CO के कारण पावरोटी या केक में खमीर उठ जाता है तथा इस से यह मुलायम एवं स्पंजी हो जाता है ।
 ( c ) यह ऐन्टैसिड का एक संघटक है । 
( d ) इसका उपयोग सोडा - अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है । 

✳️ 4. धोने का सोडा ( Na₂CO310H₂O ) :-

🔹 सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण से धोने का सोडा प्राप्त होता है । यह एक क्षारकीय लवण है । 

Na₂Co₃ + 10H₂0 → Na₂CO₃ 10H₂0 

🔹 उपयोग :-

( a ) इसका उपयोग काँच , साबुन एवं कागज उद्योगों में होता है ।( b ) इसका उपयोग बोरेक्स के उत्पादन में होता है । 
( c ) इसका उपयोग घरों में साफ - सफाई के लिए होता है । 
( d ) जल की स्थायी कठोरता को हटाने के लिए इसका उपयोग होता है ।

✳️ 5. प्लास्टर ऑफ पेरिस :-

🔹 जिप्सम को 373k पर गर्म करने पर यह जल के अणुओं को त्याग कर कैल्सियम सल्फेट हेमिहाइड्रेट / अर्धहाइड्रेट ( POP ) बनाता है ।

यह सफेद चूर्ण है जो जल मिलाने पर यह पुनः जिप्सम बनकर ठोस प्रदान करता है ।


10 Class Science Notes in hindi chapter 2 Acids Bases and Salts अध्याय - 2 अम्ल , क्षारक एवं लवण

🔹 उपयोग :-

( a ) प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग डॉक्टर टूटी हुई हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए करते हैं । 

( b ) इसका उपयोग खिलौने बनाने , सजावट का समान बनाने के लिए किया जाता है । 

( c ) इसका उपयोग सतह को चिकना बनाने के लिए किया जाता है । 

✳️ क्रिस्टलन का जल :-

🔹 लवण के एक सूत्र इकाई में जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं । 

🔹 उदाहरण :-

 Cuso₄.5H₂0 में क्रिस्टलन के जल के 5 अणु हैं ।
Na₂CO₃. 10H₂0 में क्रिस्टलन के जल के 10 अणु हैं । 
Caso₄.2H₂O में क्रिस्टलन के जल के 2 अणु हैं ।





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