11th Class Political Science Notes in Hindi Chapter 10 The Philosophy of the Constitution अध्याय - 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

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11th Class Political Science Notes in Hindi Chapter 10 The Philosophy of the Constitution अध्याय - 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन 

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11th class political science Chapter 10 The Philosophy of the Constitution Notes in hindi


11th class political science Chapter= 10 The Philosophy of the Constitution Notes in hindi

• कानून और नैतिक मूल्य आपस में एक - दूसरे से जुड़े हुए हैं । 

• इसलिए , भारत का संविधान लोकतांत्रिक , धर्मनिरपेक्ष , संघीय , उदारवादी , समतावादी है , जो सामुदायिक मूल्यों के साथ - साथ काउंटी की अखंडता को बनाए रखने के लिए लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील है ।  

• संविधान के दर्शन में केवल नैतिक सामग्री नहीं है , बल्कि भारतीय राजनीति के मूल मूल्य की विभिन्न व्याख्याओं के बीच मध्यस्थता है।

• भारत के संविधान ने उनके लिए विधानसभाओं में सीटों का आरक्षण प्रदान करके एससी , एसटी , अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों की रक्षा करने की व्यवस्था की है । 

• सरकारी नौकरियों में भी उनके हितों को सुरक्षित करने के लिए उनके लिए भी समान आरक्षण किए गए हैं । 

• भारत का संविधान संस्थानों और नागरिकों दोनों द्वारा सम्मानित और स्वीकार किया जाने वाला एक सर्वोच्च कानून है , क्योंकि यह केवल नागरिकों और देश की बुनियादी बातों की रक्षा करता है । 

• भारत का संविधान संघीय चरित्र का अनुभव करता है क्योंकि यह केंद्र सरकार और इसकी घटक इकाइयों के बीच शक्तियों को वितरित करता है , यह एक लिखित दस्तावेज है , यह आंशिक रूप से लचीला और आंशिक रूप से कठोर है ।

• भारत की न्यायपालिका सर्वोच्च है , और भारत में द्विवार्षिक विधायिका विद्यमान है । 

• संविधान में राष्ट्रीय एकता का एक केंद्रीय विचार है क्योंकि इसकी प्रस्तावना देश के न्याय , समानता , बंधुत्व , स्वतंत्रता और एकता और अखंडता प्रदान करके संविधान के उद्देश्यों को रेखांकित करती है । 

• संविधान के दर्शन को स्पष्ट तरीके से संविधान की अवधारणा को प्राप्त करने , संविधान में आदर्शों के सेट को समझने या विश्लेषण करने के साथ - साथ उसी के लिए एक विस्तृत औचित्य प्राप्त किया जा सकता है । 

• संविधान का दर्शन मुख्य रूप से समानता , स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता और अखंडता के रूप में लोकतांत्रिक परिवर्तनों को विकसित करने के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक उपायों पर जोर देता है ।


राजनीति क्या है ? 

राजनीति को परिभाषित करने के लिए विद्वानों के अलग - अलग मत है । 
सामान्य तौर पर 

( i ) राजनीति शासन करने की कला और 
( ii ) राजनीति सरकार के क्रियाकलापों को ठीक से चलाने की सीख देती है।
(iii)  राजनीति प्रशासन संचालन के विवादों का हल प्रस्तुत करती है । 
( iv ) राजनीति भागीदारी करना सिखाती है लेकिन आम व्यक्ति का सामना राजनीति की परस्पर विरोधी छवियों से होता हे , आज राजनीति का संबंध निजी स्वार्थ साधने से जुड़ गया है । 

राजनीतिक सिद्धान्त में हम क्या पढ़ते है ? 

राजनीतिक सिद्धान्त में हम जीवन के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करते है जैसे सामाजिक जीवन , सरकार और संविधान , स्वतंत्रता , समानता , न्याय , लोकतंत्र , धर्म निरपेक्ष आदि । 

राजनीतिक सिद्धांतों को व्यवहार में उतारना :-

राजनीति का स्वरूप समय के साथ साथ बदलता रहा , राजनीतिक सिद्धांतों जैसे कि स्वतंत्रता और समानता को व्यवहार में उतारने का काम बहुत मुश्किल है । हमें अपने पूर्वाग्रहों का त्याग करे , इन्हें अपनाना चाहिए , राजनीतिक सिद्धांत के अध्ययन के द्वारा हम राजनीतिक व्यवस्थाओं के बारे में अपने विचारों तथा भावनाओं का परीक्षण कर सकते है , हम यह समझ सकते है कि सचेत नागरिक ही देश का विकास कर सकते है , राजनीतिक सिद्धांत कोई वस्तु नहीं है यह मनुष्य से संबधित है उदहारण के लिए समानता का अर्थ सभी के लिए समान अवसर है फिर भी महिलाओं , वृद्धों या विकलांगों के लिए अलग व्यवस्था की गई है अतः हम कह सकते है कि पूर्ण समानता संभव नहीं है , भेदभाव का तर्क संगत आधार जरूरी है ।

हमें राजनीतिक सिद्धांत क्यों पढ़ना चाहिए ? 

( i ) भविष्य में आने वाली समस्याओं के समय एक उचित निर्णय लेने वाला नागरिक बनने के लिए । 
( ii ) एक अधिकार संपन्न एवं जागरूक नागरिक बनने के लिए , राजनीतिक चेतना जागृत करने के लिए । 
( iii ) समाज से पूर्वाग्रहों को समाप्त करने एवं एकता कायम करने के लिए । ( iv ) वाद - विवाद , तर्क - वितर्क , लाभ - हानि का आंकलन करने के बाद सही निर्णय लेने की कला सीखने के लिए हमें राजनीतिक सिद्धांत पढ़ना चाहिए ।
( v ) शासन व्यवस्था की जानकारी के लिए । 
( vi ) लोकतंत्र की उपयोगिता का ज्ञान । 
( vii ) अधिकार एंव कर्त्तव्यों को समझने के लिए । 
( viii ) अंतर्राष्ट्रीय शांति व सहयोग को बढ़ावा देने के लिए । 

• राजनीतिक सिद्धांत का मुख्य विषय राज्य व सरकार है । यह स्वतंत्रता , समानता , न्याय व लोकतंत्र जैसी अवधारणाओं का अर्थ स्पष्ट करता है । राजनीतिक सिद्धांत का उद्देश्य - नागरिकों को राजनीतिक प्रश्नों के बारे में तर्क संगत ढंग से सोचने और सामाजिक राजनीतिक घटनाओं को सही तरीके से आंकने का प्रशिक्षण देना है । गणित के विपरीत जहां त्रिभुज या वर्ग की निश्चित परिभाषा होती है राजनीतिक सिद्धांत में हम ' समानता , ' आजादी ' या न्याय की अनेक परिभाषाओं से रूबरू होते है । 

• ऐसा इसलिए है कि समानता , न्याय जैसे शब्दों का सरोकार किसी वस्तु के बजाय अन्य मनुष्यों के साथ हमारे संबंधों से होता है । राजनीतिक सिद्धांत हमें राजनीतिक चीजों के बारे में अपने विचार व व्यवहार से भावनाओं के परीक्षण के लिए प्रोत्साहित करता है ।

• राजनीति विज्ञान व राजनीति दो अलग - अलग धारणाएं है । राजनीति विज्ञान का जन्म राजनीति से पूर्व हुआ है , यह नैतिकता पर आधारित है जबकि राजनीति अवसर व सुविधा पर आधारित है ।

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