11th Class Political Science notes in Hindi Chapter 5 Legislature अध्याय - 5 विधायिका

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11th Class Political Science notes in Hindi Chapter 5 Legislature अध्याय 5 - विधायिका

CBSE Revision Notes for CBSE Class 11 Political Science Legislature In India, the parliamentary form of government is adopted at the centre by adopting bicameral legislature. The legislature helps people in holding the representatives accountable.


11th Class Political Science CBSE notes in hindi Chapter 5 ((विधायिका)) Legislature

11th Class Poltical Science CBSE notes in hindi Chapter= 5 ((विधायिका)) Legislature


📚📚 अध्याय 5 📚📚 
📕📕 विधायिका 📕📕

✳️ विधायिका :-

🔹  संघ की विधायिका को संसद कहा जाता है , यह राष्ट्रपति और दो सदन , जो राज्य परिषद ( राज्य सभा ) और जनता का सदन ( लोक सभा ) कहलाते है , से बनती है । राज्यों की विधायिका को विधानमंडल या विधानसभा कहते हैं । 

🔹 विधायिका का चुनाव जनता द्वारा होता है । इसलिए यह जनता का प्रतिनिधी बनकर कानून का निर्माण करता है । इसकी बहस विरोध , प्रदर्शन , बहिर्गमन , सर्वसम्मति , सरोकार और सहयोग आदि अत्यंत जीवन्त बनाए रखती है । 

🔹  लोकतंत्रीय शासन में विधायिका का महत्व बहुत अधिक होता है । भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनायी गयी है जो कि ब्रिटिश प्रणाली पर आधारित हैं । 

✳️   सरकार के तीन अंग होते है :-

🔹 विधायिका 
🔹 कार्यपालिका 
🔹 न्यायपालिका 

✳️  संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारतीय संसद में दो सदनों के साथ - साथ राष्ट्रपति को भी सम्मिलित किया जाता हैं ।

✳️ विधायिका दो प्रकार के हैं :-

( 1 ) केंद्र में संसद
( 2 ) राज्य में राज्य विधानमंडल

✳️ भारतीय संसद के दो भाग है :- 

( 1 ) लोकसभा : भारतीय संसद के अस्थायी सदन को लोक सभा कहते है | जिसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और इसके 542 सदस्य चुने जाते है ।

( 2 ) राज्यसभा : भारतीय संसद के अन्य सदन जो स्थायी होता है राज्यसभा कहते है | इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है ।

✳️ संसद में दो सदनों की आवश्यकता :- 

( i ) विविधताओं से पूर्ण देश प्राय : द्वि - सदनात्मक राष्ट्रिय विधायिका चाहते है ताकि समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जा सके । 

( ii ) इसका एक अन्य लाभ यह है कि एक सदन द्वारा लिए गए प्रत्येक निर्णय पर दुसरे सदन में पुनर्विचार हो जाता है । 

( iii ) प्रत्येक विधेयक और निति पर दो बार विचार होता है । 

( iv ) एक सदन कोई भी निर्णय जल्दबाजी में थोप नहीं पाता है ।

✳️ संसद के प्रमुख कार्य :-

( 1 ) कानून बनाना । 
( 2 ) कार्यपालिका पर नियंत्रण ।
( 3 ) वित्तीय कार्यः बजट पारित करना 
( 4 ) संविधान संशोधन ।
( 5 ) निर्वाचन संबंधी कार्य । 
( 6 ) न्यायिक कार्य ।
( 7 ) प्रतिनिधित्व ।
( 8 ) बहस का मंच । 
( 9 ) विदेश नीति पर नियन्त्रण 
( 10 ) विचारशील कार्य 

✳️  द्वि - सदनात्मक विधायिका वाले प्रान्त :- 

( i ) बिहार ( ii ) जम्मू और कश्मीर ( iii ) उत्तर - प्रदेश ( iv ) महाराष्ट्र ( v ) कर्नाटक 

✳️ राज्यसभा :-

भारतीय संसद का ऊपरी सदन राज्यसभा हैं इसके अधिकतम 250 सदस्य होते है जिनमें 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत और 238 राज्यों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव द्वारा निर्वाचित होते हैं । इनका निर्वाचन 6 वर्ष के लिए किया जाता है । राज्य सभा एक स्थायी सदन है । प्रत्येक 2 वर्ष बाद इसमें एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है । मनोनीत सदस्य साहित्य , विज्ञान , कला , समाजसेवा , खेल आदि क्षेत्रों से लिये जाते है । 

✳️ राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यताएं :-


( 1 ) वह भारत का नागरिक हो ।

( 2 ) 30 वर्ष की आयु का हो । 

🔹 इनका निर्वाचन एकल संक्रमणीय अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है । 

🔹 1951 के जन - प्रतिनिधि कानून के अनुसार राज्यसभा या लोक सभा के उम्मीदवार का नाम किसी न किसी संसदीय निर्वाचक क्षेत्र में पंजीकृत होना आवश्यक है ।

✳️ वित्तिय शक्तियां :-

( 1 ) वित्त विधेयक पर राज्यसभा 14 दिन तक विचार कर सकता है । 

( 2 ) संविधान संशोधन संबंधी शक्तियां । 

( 3 ) प्रशासनिक शक्तियां - मंत्रियों से उनके विभागों के संबंध में प्रश्न राज्यसभा में जो पूछे जा सकते है । 

( 4 ) अन्य शक्तियाँ चुनाव , सहभियोग , आपात स्थिति की घोषणा न्यायधीश को उसके पद से हटाया जाना इत्यादि पर दोनों सदनों पर अनुमति जरूरी है । 

✳️ लोकसभा :-
🔹 लोकसभा भारतीय संसद का निम्न सदन है । इसमे अधिकतम 550 सदस्य हो सकते है । वर्तमान में लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य है और दो सदस्य ( एंग्लो इंडियन ) को राष्ट्रपति मनोनित कर सकता है । लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता हैं इसका कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित है परंतु उसे समय से पहले भी भंग किया जा सकता है । 

🔹  भारत में संसदीय शासन प्रणाली होने के कारण लोकसभा अधिक शक्तिशाली है क्योंकि इसके सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से होता है । इसे कार्यपालिका को हटाने को शक्ति भी प्राप्त है ।

✳️ लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यताएं :-

🔹 भारत का नागरिक ।
🔹 आयु 25 वर्ष ।
🔹 पागल व दिवालिया न हो ।
🔹 किसी लाभप्रद सरकारी पद पर न हो ।

✳️ लोकसभा की विशेष शक्ति :- 

🔹 संध सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाती है । धन विधेयकों और समान्य विधेयकों को प्रस्तुत और पारित करती है ।

🔹 कर - प्रस्तावों , बजट और वार्षिक वित्तीय वक्तव्यों को स्वीकृति देती है ।

🔹 प्रश्न पूछ , पूरक प्रश्न पूछ कर , प्रस्ताव लाकर और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से कार्यपालिका को नियंत्रण करती है ।

🔹 लोकसभा संविधान में संशोधन का कार्य करती है ।

🔹 आपातकाल की घोषणा को स्वीकृति देती है ।

🔹 राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव करती है और उन्हें और सर्वोच्य न्यायलय के न्यायधीशों को हटा सकती है ।

🔹 समिति और आयोगों का गठन करती है और उनके प्रतिवेदन पर विचार करती है ।

🔹 धन विधेयक केवल लोकसभा में में ही प्रस्तुत किये जा सकते है। लोकसभा के पास राज्यसभा से अधिक शक्तियाँ है । राज्यसभा को जनता नहीं बल्कि विधायक चुनते है ।

🔹  संविधान द्वारा अपनायी गई लोकतान्त्रिक व्यवस्था में जनता के पास अंतिम शक्ति होती है । यही कारण है कि संविधान ने निर्वाचित प्रतिनिधियों ( लोकसभा ) के पास ही सरकार को हटाने और वित् पर नियंत्रण रखने की शक्ति दी है ।

✳️ कानून बनाने की प्रक्रिया :-

🔹 विधेयक :- प्रस्तावित कानून के प्रारूप को विधेयक कहते है ।


Chapter= 5 ((विधायिका)) Legislature 11th Class Poltical Science Hindi medium Notes first book


✳️ प्रक्रियाः-

( 1 ) प्रथम वाचन ।
( 2 ) द्वितीय वाचन ( समिति स्तर ) 
( 3 ) समिति की रिपार्ट पर चर्चा 
( 4 ) तृतीय वाचन । 
( 5 ) दूसरे सदन में प्रक्रिया । 
( 6 ) राष्ट्रपति की स्वीकृति । 


✳️ संसदीय नियंत्रण के साधन :-

( 1 ) बहस और चर्चा - प्रश्न काल , शून्य काल , स्थगन प्रस्ताव । 
( 2 ) कानूनों की स्वीकृति या अस्वीकृति । 
( 3 ) वित्तीय नियंत्रण । 
( 4 ) अविश्वास प्रस्ताव , निन्दा प्रस्ताव ।



✳️ संसदीय समितियां : - 

विभिन्न विधायी व दैनिक कार्यों के लिए समितियों का गठन संसदीय कामकाज का एक जरूरी पहलू है । ये विभिन्न मामलों पर विचार विमर्श करती है और प्रशासनिक कार्यों पर निगरानी रखती है ।

✳️ वित्तीय समितिया :-

( 1 ) लोक लेखा समिति - भारत सरकार के विभिन्न विभागों का खर्च नियमानुसार हुआ है या नहीं । 

( 2 ) प्राकलन समिति - खर्च में किफायत किस तरह की जा सकती है । 

( 3 ) लोक उपक्रम - सरकारी उद्योगों की रिपोर्ट की जांच करती है कि उद्योग या व्यवसाय कुशलता पूर्वक चलाया जा रहे है या नहीं । 


✳️ विभागीय स्थायी समितियां :-

( 1 ) नियमन समिति । 
( 2 ) विशेषाधिकार समिति । 
( 3 ) कार्य - मंत्रणा समिति । 
( 4 ) आश्वासन समिति । 


✳️ तदर्थ समितियां :-

विशिष्ट विषयों की जांच - पड़ताल करने तथा रिपोर्ट देने के लिए समय - समय पर गठन किया जाता है । बौफोर्स समझौतों से संबंधित संयुक्त समिति । समितियों द्वारा दिये गए सुझावो को संसद शायद ही नामंजूर करती है । 


✳️ संसद स्वयं को किस प्रकार नियंत्रित करती है :-

( 1 ) संसद का सार्थक व अनुशासित होना । 

( 2 ) सदन का अध्यक्ष विधायिका की कार्यवाही के मामलों में सर्वोच्च अधिकारी होता है । 

( 3 ) दल बदल निरोधक कानून द्वारा 1985 में 52 वां संशोधन किया गया । 91 वें संविधान संशोधन द्वारा संशोधित किया गया । यदि कोई सदस्य अपने दल के नेतृत्व के आदेश के बावजूद - सदन में उपस्थित न हो या दल के निर्देश के विपरीत सदन में मतदान करें अथवा स्वेच्छा से दल की सदस्यता से त्यागपत्र दें उसे ' दलबदल ' कहा जाता है । अध्यक्ष उसे सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहरा सकता है ।

( 4 ) भारतीय संघात्मक सरकार में 29 राज्य 7 केंद्र शासित इकाईयों को मिलाकर भारत में संघीय शासन की स्थापना करती है । दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया हैं ।

( 5 ) भारत के प्रत्येक राज्य में विधानमंडल की व्यवस्था एक समान नहीं है । कुछ राज्यों में एक सदनीय तथा कुछ राज्यों में द्वि - सदनीय व्यवस्था है । 

( 6 ) राज्यों में कानून निर्माण का कार्य विधानमंडलों को दिया गया है 

( i ) निम्न सदन को विधानसभा । 
( ii ) उच्च सदन को विधान परिषद कहा जाता है । 


✳️ द्विसदनीय राज्य :-

जम्मू और कश्मीर , उत्तर प्रदेश , तेलंगाना , बिहार , महाराष्ट्र , कर्नाटक व आन्ध्र प्रदेश , सात राज्य बाकी सभी राज्य एक सदनीय है । 

( 1 ) विधानसभा की शक्तियां 

( i ) विधायी कार्यशक्ति । 
( ii ) वित्तीय शक्तियां । 
( iii ) कार्यपालिका शक्तियां । 
( iv ) चुनाव संबंधी कार्य । 
( v ) संविधान संशोधन सबंधी शक्तियां । 


( 2 ) विधान परिषद की शक्तियां 

( i ) विधायी शक्तियां । 
( ii ) वित्तीय शक्तियां । 
( iii ) कार्यपालिका शक्तियां । 

दोनों सदन राज्य विधानपालिका के आवश्यक अंग होते हुए भी संविधान ने विधानसभा को बहुत शक्तिशाली व प्रभावशाली स्थित प्रदान की है ।

✳️ दलबदल :-

🔹 यदि कोई सदस्य अपने दल के नेतृत्व के आदेश के बावजूद सदन में उपस्थित न हो या दल के निर्देश के विपरीत सदन में मतदान करे अथवा स्वेच्छा से दल की सदस्यता दे दे तो उसे दलबदल कहते है । 

✳️ दलबदल निरोधक कानून :-

🔹  संविधान के 52 वाँ संशोधन द्वारा सन 1985 में एक कानून बनाया गया जिसके द्वारा सदन का अध्यक्ष अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करता है । इसे दलबदल निरोधक कानून कहते है । यदि यह सिद्ध हो जाये कि कोई सदस्य ने दलबदल किया है तो उसकी सदन की सदस्यता समाप्त हो जाती है । उअर ऐसे दलबदलू को किसी भी राजनितिक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है ।

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