Class 12 History Notes Chapter 6 Bhakti Sufi Traditions(भक्ति - सूफी परंपराएँ धार्मिक विश्वासों में बदलाव और श्रद्धा ग्रंथ

Class 12 History Notes Chapter 6 Bhakti Sufi Traditions भक्ति - सूफी परंपराएँ धार्मिक विश्वासों में बदलाव और श्रद्धा ग्रंथ ( लगभग आठवीं से अठारहवीं सदी तक ))


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1️⃣🔹इस काल के नूतन साहित्यिक स्रोतों में संत कवियों की रचनाएँ हैं । 

2️⃣🔹इतिहासकार इन संत कवियों के अनुयायियों ( जो उनके संप्रदाय से थे ) द्वारा लिखी गई उनकी जीवनियों का भी इस्तेमाल करते हैं । 

3️⃣🔹भक्ति आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य असमानता ऊँच - नीच , अमीर - गरीब , छोटे - बड़े की भावना को समाप्त करना । 

4️⃣🔹पुरी , उड़ीसा में जहाँ मुख्य देवता को बारहवीं शताब्दी तक आते - आते जगन्नाथ ( शाब्दिक अर्थ में संपूर्ण विश्व का स्वामी ) विष्णु के स्वरुप के रुप में प्रस्तुत किया गया । 

5️⃣🔹देवी की उपासना अधिकतर सिंदूर से पोते गए पत्थर के रुप में ही की जाती थी । 

6️⃣🔹इस काल में बहुत सी भक्ति परम्पराओं में ब्राह्मण , देवताओं और भक्तजनों के बीच महत्त्वपूर्ण बिचौलिए बने रहे । 

7️⃣🔹प्रारंभिक भक्ति आन्दोलन ( लगभग छठी शताब्दी ) अलवारो ( विष्णु भक्त ) और नयनारों ( शिवभक्त ) के नेतृत्व में हुआ । इन्होंने जाति प्रथा और ब्राह्मणों की प्रभुता के विरोध में आवाज उठाई । इन्होंने स्त्रियों को महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया । अंडाल एक स्त्री अलवार संत थी तथा अम्मइयार करइकाल एक नयनार स्त्री संत थी । नलयिरादिव्यप्रबंधम अलवार संतो का मुख्य संकलन है । इस ग्रंथ को तमिल में पंचम वेद का स्थान प्राप्त है ।

8️⃣🔹धर्म के इतिहासकार भक्ति परंपरा को दो मुख्य वर्गों में बाँटते हैं - 

( 1 ) सगुण - शिव , विष्णु तथा उनके अवतार व देवियों की आराधना की जाती है । 
( 2 ) निर्गुण - अमूर्त , निराकर ईश्वर की उपासना की जाती है । 

9️⃣🔹बारहवीं शताब्दी में कर्नाटक में एक नवीन आंदोलन का उद्भव हुआ जिसका नेतृत्व बासवन्ना ( 1106 - 68 ) नामक एक ब्राह्मण ने किया । इसे वीर शैव या लिंगायत आन्दोलन कहते हैं । इन्होंने पुनर्जन्म के सिद्धान्त पर प्रश्न चिह्म लगाया । वयस्क व विधवा विवाह को मान्यता प्रदान की । ये शिव की अवधारणा लिंग रूप में करते हैं । 

1️⃣0️⃣🔹 ' जिम्मी ' वे लोग थे जो उद्घटित धर्मग्रंथ को मानने वाले थे जैसे इस्लामी शासकों के क्षेत्र में रहने वाले यहूदी और ईसाई । 

1️⃣1️⃣🔹जिन्होंने इस्लाम धर्म कबूल किया उन्होंने सैद्धान्तिक रुप से इसकी पाँच मुख्य बातें मानी । 

( 1 ) ' अल्लाह ' एकमात्र ईश्वर हैं 
( 2 ) पैगम्बर मोहम्मद उनके दूत ( शाहद ) हैं । 
( 3 ) खैरात ( ज़कात ) बाँटनी चाहिए । 
( 4 ) रमज़ान के महीने में रोज़ा रखना चाहिए । 
( 5 ) हज के लिए मक्का जाना चाहिए । 

1️⃣2️⃣🔹सोलहवीं शताब्दी तक आते - आते अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह बहुत ही लोकप्रिय हो गई । इन्होंने भारत में चिश्ती संप्रदाय ( सिलसिला ) की शुरूआत की । यह पीर ( गुरु ) मुरीद ( शिष्य ) परम्परा पर आधारित था । इसमें खानकाह ( पीर के रहने के स्थान ) का काफी महत्त्व था । 

1️⃣3️⃣🔹बाशरा - शरियत को पंसद करने वाले सूफी थे । बेशरा - शरियत अवहेलना करने वाले सूफी थे । 

1️⃣4️⃣🔹कबीर की बानी तीन विशिष्ट परिपाटियों में संकलित है 

( 1 ) कबीर बीजक 
( 2 ) कबीर ग्रंथावली 
( 3 ) आदि ग्रथ साहिब 
( 4 ) रमजान

1️⃣5️⃣🔹मीरा बाई भक्ति परंपरा की सबसे सुप्रसिद्ध कवियत्री हैं । इनके गुरु संत रविदास नीची जाति से थे । गुजरात और राजस्थान के गरीब परिवार में मीरा प्रेरणा की स्रोत हैं । 

1️⃣6️⃣🔹चिदंबरम , तंजावुर और गंगैकोडा चोलपुरम के विशाल शिव मन्दिर चोल सम्राटो की मदद से निर्मित हुए । 

1️⃣7️⃣🔹चोल सम्राट परांतक प्रथम ने कवि अप्पार संबदर और सुंदरार की धातु प्रतिमाएं एक शिव मन्दिर में स्थापित करवाई । 

1️⃣8️⃣🔹नाथ , जोगी सिद्ध जैसे धार्मिक नेता रूढ़िवादी ब्राह्मणीय सांचे के वहार थें इन्होंने वेदो की सता को चुनौती थी तथा अपने विचार आम लोगों की भाषा में लिखे । 

1️⃣9️⃣🔹सैदान्तिक रूप से मुसलमान शासकों को उलमा के मार्गदर्शन पर चलना होता था , तथा उनसे आशा की जाती थी वे शासन में शरियत के नियमों का पालन करवाएँगे । 

2️⃣0️⃣🔹मलेच्छ प्रवासी समुदाय के लिये था । यह वर्ण नियमों का पालन नहीं करते थे । संस्कृत से भिन्न भाषाएं बोलते थे ।



भाग एक


भाग दो 

भाग तीन

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