Chapte=2 समकालीन विश्व मे राजनीति ((दो ध्रुवीयता का अंत)) The End Of Bipolarity 12th Class poltical science 1st book

💮🌸Chapte=2 समकालीन विश्व मे राजनीति ((दो ध्रुवीयता का अंत)) The End Of Bipolarity 12th Class poltical science 1st book🌸💮



✳️ शीतयुद्ध के प्रतीक 1961 में बनी बर्लिन की दीवार को 9 नवंबर 1989 को जनता द्वारा तोड़ दिया गया ।

✳️ 25 दिसम्बर 1991 को सोवियत संघ का विघटन हो गया । 

सोवियत संघ का जन्म , व्यवस्था ( प्रणाली ) 


✳️ 1917 की रूसी बोल्शेविक क्रांति के बाद समाजवादी सोवियत गणराज्य संघ ( U . S . S . R . ) अस्तित्व में आया । 

सोवियत प्रणाली :-

1 ) सोवियत प्रणाली पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध तथा समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित थी । 

2 ) सोवियत प्रणाली में नियोजित अर्थव्यवस्था थी । 

3 ) कम्यूनिस्ट पार्टी का दबदबा था । 

4 ) न्यूनतम जीवन स्तर की सुविधा 

5 ) बेरोजगारी न होना । 

6 ) उन्नत संचार प्रणाली । 

7 ) मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व । 

8 ) उत्पादन के साधनों पर राज्य का नियंत्रण था । 

दूसरी दुनिया :- पूर्वी यूरोप के देशों को समाजवादी प्रणाली की तर्ज पर ढाला गया था , इन्हें ही समाजवादी खेमे के देश या दूसरी दुनिया कहा गया । 

मिखाइल गोर्बाचेव :- 1980 के दशक में मिखाइल गोर्बाचेव ने राजनीतिक सुधारों तथा लोकतांत्रीकरण को अपनाया उन्होंने पुर्नरचना । ( पेरेस्त्रोइका ) व खुलापन ( ग्लासनोस्त ) के नाम से आर्थिक सुधार लागू किए )

सोवियत संघ समाप्ति की घोषणा :- 1991 में बोरिस येल्तसिन के नेतृत्व में पूर्वी यूरोप के देशों ने तथा रूस , यूक्रेन व बेलारूस ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की ।

✳️ CIS ( स्वतन्त्र राज्यों का राष्ट्रकुल ) बना 15 नए देशों का उदय ।
✳️PART-A समकालीन विश्व मे राजनीति✳️

• Chapter 1 शीत युद्ध का दौर
• Chapter 2 दो ध्रुवीयता का अंत
 Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व 
• Chapter 4  सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र
• Chapter 5 समकालीन दक्षिण एशिया
• Chapter 6 अंतरराष्ट्रीय संगठन 
• Chapter 7 समकालीन विश्व में सुरक्षा 
• Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
• Chapter 9 वैश्वीकरण 



✳️PART-B राजनीति विज्ञान✳️


• Chapter 10 राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
• Chapter 11 एक दल के प्रभुत्व का दौर 
• Chapter 12 नियोजित की राजनीति 
• Chapter 13 भारत के विदेश संबंध 
• Chapter 14  कांग्रेस प्रणालीः चुनौतियाँ व पुर्नस्थापना
• Chapter 15 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
• Chapter 16 जन आंदोलन का उदय 
• Chapter 17 क्षेत्रीय आकांक्षाये 

• Chapter 18 भारतीय राजनीति में नए बदलाव
 सोवियत संघ के विघटन के कारण :-

1 ) नागरिकों की राजनीतिक और आर्थिक आंकाक्षाओं को पूरा न कर पाना । 

2 ) सोवियत प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा । 

3 ) कम्यूनिस्ट पार्टी का अंकुश । 

4 ) संसाधनों का अधिकतम उपयोग परमाणु हथियारों पर । 

5 ) प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में पश्चिम के मुकाबले पीछे रहना । 

6 ) रूस की प्रमुखता । 

7 ) गोर्बाचेव द्वारा किए गए सुधारों का विरोध होना । 

8 ) अर्थव्यवस्था गतिरूद्ध व उपभोक्ता वस्तुओं की कमी । 

9 ) राष्ट्रवादी भावनाओं और सम्प्रभुता की इच्छा का उभार । 

सोवियत संघ के विघटन के परिणाम :- 

1 ) शीतयुद्ध का संघर्ष समाप्त हो गया । 

2 ) एक ध्रुवीय विश्व अर्थात अमरीकी वर्चस्व का उदय ।

3 ) हथियारों की होड़ की समाप्ति 

4 ) सोवियत खेमे का अंत और 15 नए देशों का उदय । 

5 ) रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी बना । 

6 ) विश्व राजनीति में शक्ति संबंध परिवर्तित हो गए । 

7 ) समाजवादी विचारधारा पर प्रश्नचिन्ह या पूँजीवादी उदारवादी व्यवस्था का वर्चस्व ।

शॉक थेरेपी : - शाब्दिक अर्थ है आघात पहुँचाकर उपचार करना । साम्यवाद के पतन के बाद सोवियत संघ के गणराज्यों को विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण ( परिवर्तन ) के मॉडल को अपनाने को कहा गया । इसे ही शॉक थेरेपी कहते है ।

शॉक थेरेपी की विशेषताएं :- 

1 . मिल्कियत का प्रमुख रूप निजी स्वामित्व । 

2 . राज्य की संपदा का निजीकरण । 

3 . सामूहिक फार्म की जगह निजी फार्म । 

4 . मुक्त व्यापार व्यवस्था को अपनाना । 

5 . मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता । 

6 . पश्चिमी देशों की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ाव । 
पूंजीवाद के अतिरिक्त किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया गया । 

शॉक थेरेपी के परिणाम:-  

1 . पूर्णतया असफल , रूस का औद्योगिक ढांचा चरमरा गया । 

2 . रूसी मुद्रा रूबल में गिरावट । 

3 . समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था नष्ट । 

4 . 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों या कम्पनियों को कम दामों ( औने - पौने ) दामों में बेचा गया जिसे इतिहास की सबसे बड़ी गराज सेल कहा जाता है । 

5 . आर्थिक विषमता बढ़ी । 

6 . खाद्यान्न संकट हो गया । 

7 . माफिया वर्ग का उदय । 

8 . कमजोर संसद व राष्ट्रपति को अधिक शक्तियाँ जिससे सत्तावादी राष्ट्रपति शासन । 

संघर्ष व तनाव के क्षेत्र :- पूर्व सोवियत संघ के अधिकांश गणराज्य संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्र है । इन देशों में बाहरी ताकतों की दखलंदाजी भी बढ़ी है । रूस के दो गणराज्यों चेचन्या और दागिस्तान में हिंसक अलगाववादी आन्दोलन चले । चेकोस्लोवाकिया दो भागों - चेक तथा स्लोवाकिया में बंट गया ।

बाल्कन क्षेत्र : - बाल्कन गणराज्य यूगोस्लाविया गृहयुद्ध के कारण कई प्रान्तों में बँट गया । जिसमें शामिल बोस्निया - हर्जेगोविना , स्लोवेनिया तथा क्रोएशिया ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर दिया । 

बाल्टिक क्षेत्र : - बाल्टिक क्षेत्र के लिथुआनिया ने मार्च 1990 में अपने आप को स्वतन्त्र घोषित किया । एस्टोनिया , लताविया और लिथुआनिया 1991 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य बने । 2004 में नाटो में शामिल हुए । 

मध्य एशिया : - के ताजिकिस्तान में 10 वर्षों तक यानी 2001 तक गृहयुद्ध चला । अज़रबैजान , अर्मेनिया , यूक्रेन , किरगिझस्तान , जार्जिया में भी गृहयुद्ध की स्थिति हैं । 
मध्य एशियाई गणराज्यों में पेट्रोल के विशाल भंडार है । इसी कारण से यह क्षेत्र बाहरी ताकतों और तेल कंपनियों की प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा भी बन गया है । 

पूर्व साम्यवादी देश और भारत :-

1 . पूर्व साम्यवादी देशों के साथ भारत के संबंध अच्छे है , रूस के साथ विशेष रूप से प्रगाढ़ है । 

2 . दोनों का सपना बहुध्रवीय विश्व का है । 

3 . दोनों देश सहअस्तित्व , सामूहिक सुरक्षा , क्षेत्रीय सम्प्रभुता , स्वतन्त्र विदेश नीति , अर्न्तराष्ट्रीय झगड़ों का वार्ता द्वारा हल , संयुक्त राष्ट्रसंघ के सुदृढ़ीकरण तथा लोकतंत्र में विश्वास रखते है । 

4 . 2001 में भारत और रूस द्वारा 80 द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर 

5 . भारत रूसी हथियारों का खरीददार । 

6 . रूस से तेल का आयात । 

7 . परमाण्विक योजना तथा अंतरिक्ष योजना में रूसी मदद । 

8 . कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ उर्जा आयात बढ़ाने की कोशिश । 

9 . गोवा में दिसम्बर 2016 में हुए ब्रिक्स ( BRICS ) सम्मलेन के दौरान रूस - भारत के बीच हुए 17 वें वार्षिक सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतीन के बीच रक्षा , परमाणु उर्जा , अंतरिक्ष अभियान समेत आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने एवं उनके लक्ष्यों की प्राप्ति पर बल दिया गया 


✳️PART-A समकालीन विश्व मे राजनीति✳️

• Chapter 1 शीत युद्ध का दौर
• Chapter 2 दो ध्रुवीयता का अंत
 Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व 
• Chapter 4  सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र
• Chapter 5 समकालीन दक्षिण एशिया
• Chapter 6 अंतरराष्ट्रीय संगठन 
• Chapter 7 समकालीन विश्व में सुरक्षा 
• Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
• Chapter 9 वैश्वीकरण 



✳️PART-B राजनीति विज्ञान✳️


• Chapter 10 राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
• Chapter 11 एक दल के प्रभुत्व का दौर 
• Chapter 12 नियोजित की राजनीति 
• Chapter 13 भारत के विदेश संबंध 
• Chapter 14  कांग्रेस प्रणालीः चुनौतियाँ व पुर्नस्थापना
• Chapter 15 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
• Chapter 16 जन आंदोलन का उदय 
• Chapter 17 क्षेत्रीय आकांक्षाये 

• Chapter 18 भारतीय राजनीति में नए बदलाव

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