12th class Political Science notes in hindi Chapter 2 The End Of Bipolarity अध्याय - 2 दो ध्रुवीयता का अंत

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12th class Political Science notes in hindi Chapter 2 The End Of Bipolarity अध्याय - 2 दो ध्रुवीयता का अंत


CBSE Revision hindi Notes for CBSE Class 12 Political Science Book-1 Chapter-2 The End of Bipolarity Class 12 Political Science Book-1 Ch-2 The End of Bipolarity - New entities in world politics: Russia, Balkan states and Central Asian states, Introduction of democratic politics and capitalism in post-communist regimes. India's relations with Russia and other post-communist countries.

12th class Political science Chapter - 2 The End Of Bipolarity notes in Hindi medium

✳️ बर्निल की दीवार :-

🔹  पूर्वी और पश्चिमी खेमे के बीच विभाजन का प्रतीक थी । यूरोप महाद्विप में जर्मनी देश की राजधानी बर्लिन । शीतयुद्ध के प्रतीक 1961 में बनी बर्लिन की दीवार को 9 नवंबर 1989 को जनता द्वारा तोड़ दिया गया । यह 28 बर्ष तक खड़ी रही । तथा यह 150 KM लम्बी थी । 

✳️ सोवियत संघ का जन्म ( U . S . S . R . ) :-

🔹 1917 की रूसी बोल्शेविक क्रांति के बाद समाजवादी सोवियत गणराज्य संघ ( U . S . S . R . ) अस्तित्व में आया ।

✳️ सोवियत प्रणाली :-

🔹 सोवियत संघ में समतावादी समाज के निर्माण के लिए केंद्रीकृत योजना , राज्य के नियंत्रण पर आधारित और साम्यवदी दल द्वारा निर्देशित व्यवस्था सोवियत प्रणाली कहलायगी ।

✳️ सोवियत प्रणाली की विशेषताएँ :-

🔹  सोवियत प्रणाली पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध तथा समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित थी । 
🔹 सोवियत प्रणाली में नियोजित अर्थव्यवस्था थी ।
🔹  कम्यूनिस्ट पार्टी का दबदबा था । 
🔹 न्यूनतम जीवन स्तर की सुविधा बेरोजगारी न होना ।
🔹  उन्नत संचार प्रणाली थी ।
🔹  मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व ।
🔹  उत्पादन के साधनों पर राज्य का नियंत्रण था । 

✳️ दूसरी दुनिया के देश :- 

🔹 पूर्वी यूरोप के देशों को समाजवादी प्रणाली की तर्ज पर ढाला गया था , इन्हें ही समाजवादी खेमे के देश या दूसरी दुनिया कहा गया ।

✳️ मिखाइल गोर्बाचेव :-

🔹  1980 के दशक में मिखाइल गोर्बाचेव ने राजनीतिक सुधारों तथा लोकतांत्रीकरण को अपनाया उन्होंने पुर्नरचना । ( पेरेस्त्रोइका ) व खुलापन ( ग्लासनोस्त ) के नाम से आर्थिक सुधार लागू किए ) 

✳️ सोवियत संघ समाप्ति की घोषणा :- 

🔹 1991 में बोरिस येल्तसिन के नेतृत्व में पूर्वी यूरोप के देशों ने तथा रूस , यूक्रेन व बेलारूस ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की । CIS ( स्वतन्त्र राज्यों का राष्ट्रकुल ) बना 15 नए देशों का उदय ।

✳️ सोवियत संघ में कम्युनिस्ट शासन की कमियाँ :-


🔹 सोवियत संघ पर कम्युनिस्ट पार्टी ने 70 सालों तक शासन किया और यह पार्टी अब जनता के जवाबदेह नहीं रह गई थी । इसकी निम्नलिखित कमियाँ थी |

🔹  ( i ) कम्युनिस्ट शासन में सोवियत संघ प्रशासनिक और राजनितिक रूप से गतिरुद्ध हो चूका था । 

🔹 ( ii ) भारी भ्रष्टाचार व्याप्त था और गलतियों को सुधारने में शासन व्यवस्था अक्षम थी ।

🔹  ( iii ) विशाल देश में केन्द्रीयकृत शासन प्रणाली थी । 

🔹 ( iv ) सत्ता का जनाधार खिसकता जा रहा था | कम्युनिष्ट पार्टी में कुछ तानाशाह प्रकृति के नेता भी थे जिनकों जनता से कोई सरोकार नहीं था । 

🔹 ( v ) ' पार्टी के अधिकारीयों को आम नागरिक से ज्यादा विशेषाधिकार मिले हुए थे ।

✳️ स्वतंत्र राज्यों सोवियत संघ के विघटन के कारण :-

🔹 नागरिकों की राजनीतिक और आर्थिक आंकाक्षाओं को पूरा न कर पाना । 

🔹 सोवियत प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा । 

🔹 कम्यूनिस्ट पार्टी का बुरा शासन । 

🔹 सोवियत संध में अपना पैसा और संसाधन पूर्वी यूरोप में अधिक लगाया ताकि वह उनके नियंत्रण में बने रहे ।

🔹 लोगो को गलत जानकारी देना की सोवियत संघ विकास कर था है ।

🔹 संसाधनों का अधिकतम उपयोग परमाणु हथियारों पर करना । 

🔹 प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में पश्चिम के मुकाबले पीछे रहना ।

🔹  रूस की प्रमुखता । 

🔹गोर्बाचेव द्वारा किए गए सुधारों का विरोध होना । 

🔹 अर्थव्यवस्था गतिरूद्ध व उपभोक्ता वस्तुओं की कमी । 

🔹 राष्ट्रवादी भावनाओं और सम्प्रभुता की इच्छा का उभार । 

🔹 सोवियत प्रणाली का सत्तावादी होना पार्टी का जनता के प्रति जवाबदेह ना होना ।

✳️ सोवियत संघ के विघटन के परिणाम :-

🔹  शीतयुद्ध का संघर्ष समाप्त हो गया । दूसरी दुनिया का पतन ।

 🔹 एक ध्रुवीय विश्व अर्थात् अमरीकी वर्चस्व का उदय । 

🔹 हथियारों की होड़ की समाप्ति सोवियत खेमे का अंत और 15 नए देशों का उदय । 

🔹 विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्था ताकतवर देशो की सलाहकार बन गई ।

🔹 रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी बना ।

🔹  विश्व राजनीति में शक्ति संबंध परिवर्तित हो गए । 

🔹 समाजवादी विचारधारा पर प्रश्नचिन्ह या पूँजीवादी उदारवादी व्यवस्था का वर्चस्व ।

🔹 शॉक थेरेपी को अपनाया गया ।

🔹 उदारवादी लोकतंत्र का महत्व बढा ।

✳️ हथियारों की होड़ की कीमत :-

🔹 सोवियत संघ ने हथियारों की होड़ में अमरीका को कड़ी टक्कर दी परन्तु प्रोद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे के मामले में वह पश्चिमी देशों से पिछड़ गया । 

🔹  उत्पादकता और गुणवता के मामले में वह पश्चिम के देशों से बहुत पीछे छूट गया ।

✳️ शॉक थेरेपी : - 

🔹 शॉक थेरेपी शाब्दिक अर्थ है आघात पहुँचाकर उपचार करना । साम्यवाद के पतन के बाद सोवियत संघ के गणराज्यों को विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण ( परिवर्तन ) के मॉडल को अपनाने को कहा गया । इसे ही शॉक थेरेपी कहते है ।

✳️ शॉक थेरेपी की विशेषताएँ :-

🔹 मिल्कियत का प्रमुख रूप निजी स्वामित्व । राज्य की संपदा का निजीकरण । 

🔹 सामूहिक फार्म को निजी फार्म में बदल दिया गया । 

🔹 पूंजीवादी पद्धति से खेती की जाने लगी ।

🔹 मुक्त व्यापार व्यवस्था को अपनाना । 

🔹  मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता ।

🔹  पश्चिमी देशों की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ाव ।

🔹  पूंजीवाद के अतिरिक्त किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया गया ।

✳️  शॉक थेरेपी के परिणाम :-

🔹  पूर्णतया असफल , रूस का औद्योगिक ढांचा चरमरा गया । 

🔹रूसी मुद्रा रूबल में गिरावट । 

🔹 समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था नष्ट ।

🔹 सरकारी रियायत खत्म हो गई ज्यादातर लोग गरीब हो गए ।

🔹  90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों या कम्पनियों को कम दामों ( औने - पौने ) दामों में बेचा गया जिसे इतिहास की सबसे बड़ी गराज सेल कहा जाता है । 

🔹 आर्थिक विषमता बढ़ी । 

🔹 खाद्यान्न संकट हो गया । 

🔹 माफिया वर्ग का उदय ।

🔹 अमीर और गरीब के बीच तीखा विभाजन हो गया ।

🔹  कमजोर संसद व राष्ट्रपति को अधिक शक्तियाँ जिससे सत्तावादी राष्ट्रपति शासन ।

✳️ गराज - सेल :-

🔹   शॉक थेरेपी से उन पूर्वी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई जिनमें पहले साम्यवादी शासन थी | 

🔹 रूस में , पूरा का पूरा राज्य - नियंत्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा । लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों या कंपनियों को बेचा गया । 

🔹 आर्थिक ढाँचे का यह पुनर्निर्माण चूँकि सरकार द्वारा निर्देशित औद्योगिक नीति के बजाय बाजार की ताकतें कर रही थीं , इसलिए यह कदम सभी उद्योगों को मटियामेट करने वाला साबित हुआ । इसे ' इतिहास की सबसे बड़ी गराज - सेल ' के नाम से जाना जाता है । 

✳️ गराज - सेल जैसी हालात उत्पन्न होने का कारण :-

🔹  महत्त्वपूर्ण उद्योगों की कीमत कम से कम करके आंकी गई और उन्हें औने - पौने दामों में बेच दिया गया । 

🔹 हालाँकि इस महा - बिक्री में भाग लेने के लिए सभी नागरिकों को अधिकार - पत्र दिए गए थे , लेकिन अधिकांश नागरिकों ने अपने अधिकार पत्र कालाबाजारियों के हाथों । बेच दिये क्योंकि उन्हें धन जरुरत थी । 

🔹 रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में नाटकीय ढंग से गिरावट आई । मुद्रास्पफीति इतनी ज्यादा बढ़ी कि लोगों की जमापूँजी जाती रही ।

✳️ संघर्ष व तनाव के क्षेत्र :- 

🔹 पूर्व सोवियत संघ के अधिकांश गणराज्य संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्र है । इन देशों में बाहरी ताकतों की दखलंदाजी भी बढ़ी है । रूस के दो गणराज्यों चेचन्या और दागिस्तान में हिंसक अलगाववादी आन्दोलन चले । चेकोस्लोवाकिया दो भागों - चेक तथा स्लोवाकिया में बंट गया । 

✳️ बाल्कन क्षेत्र : - 

🔹 बाल्कन गणराज्य यूगोस्लाविया गृहयुद्ध के कारण कई प्रान्तों में बँट गया । जिसमें शामिल बोस्निया - हर्जेगोविना , स्लोवेनिया तथा क्रोएशिया ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर दिया ।

✳️  बाल्टिक क्षेत्र : - 

🔹 बाल्टिक क्षेत्र के लिथुआनिया ने मार्च 1990 में अपने आप को स्वतन्त्र घोषित किया । एस्टोनिया , लताविया और लिथुआनिया 1991 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य बने । 2004 में नाटो में शामिल हुए । 

✳️ मध्य एशिया : - 

🔹मध्य एशिया के तज़ाकिस्तान में 10 वर्षों तक यानी 2001 तक गृहयुद्ध चला । अज़रबैजान , अर्मेनिया , यूक्रेन , किरगिझस्तान , जार्जिया में भी गृहयुद्ध की स्थिति हैं । मध्य एशियाई गणराज्यों में पेट्रोल के विशाल भंडार है । इसी कारण से यह क्षेत्र बाहरी ताकतों और तेल कंपनियों की प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा भी बन गया है ।

✳️ पूर्व साम्यवादी देश और भारत :-

🔹  पूर्व साम्यवादी देशों के साथ भारत के संबंध अच्छे है , रूस के साथ विशेष रूप से प्रगाढ़ है । 

🔹 दोनों का सपना बहुध्रवीय विश्व का है । 

🔹 दोनों देश सहअस्तित्व , सामूहिक सुरक्षा , क्षेत्रीय सम्प्रभुता , स्वतन्त्र विदेश नीति , अन्तराष्ट्रीय झगड़ों का वार्ता द्वारा हल , संयुक्त राष्ट्रसंघ के सुदृढ़ीकरण तथा लोकतंत्र में विश्वास रखते है । 

🔹 2001 में भारत और रूस द्वारा 80 द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर भारत रूसी हथियारों का खरीददार । 

🔹 रूस से तेल का आयात । परमाण्विक योजना तथा अंतरिक्ष योजना में रूसी मदद । 

🔹  कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ उर्जा आयात बढ़ाने की कोशिश ।

🔹  गोवा में दिसम्बर 2016 में हुए ब्रिक्स ( BRICS ) सम्मलेन के दौरान रूस - भारत के बीच हुए 17 वें वार्षिक सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतीन के बीच रक्षा , परमाणु उर्जा , अंतरिक्ष अभियान समेत आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने एवं उनके लक्ष्यों की प्राप्ति पर बल दिया गया

2 comments:

  1. Your notes are really very helpful 😊

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    1. Thank you aap hamara group bhi join kar sakte ho jha aapko edu material milta h

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