Chapter= 06 अंतरराष्ट्रीय संगठन International Organizations 12 class political science notes in hindi

Chapter= 06 अंतरराष्ट्रीय संगठन International Organizations

 12 class political science notes in hindi



• जिस प्रकार किसी क्षेत्र की समस्या के हल के लिये क्षेत्रीय संगठनों की आवश्यकता होती है , उसी प्रकार विभिन्न देशों के मध्य समस्या समाधान के लिए अंर्तराष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता होती है । 


अंर्तराष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता 

1 . अंर्तराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण हल । 
2 . युद्धों की रोकथाम में सहायक ।
3 . विश्व के आर्थिक विकास में सहायक । 
4 . प्राकृतिक आपदा , महामारी से निपटना । 
5 .अन्तराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना । 
6 . वैश्विक तापवृद्धि से निपटना । 

प्रथम विश्व युद्ध के बाद युद्ध रोकने के लिए बनी संस्था राष्ट्रसंघ ( लीग - आफ - नेशन्स ) के असफल होने के कारण एवं 1939 से 1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा स्थापित करने के लिए पुनः एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता महसूस की गई । अतः 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ UNO की स्थापना की गई । स्थापना के समय संयुक्त राष्ट्र संघ में 51 सदस्य थे , भारत भी इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल था । मई 2013 तक इसके सदस्यों की संख्या 193 हो गयी है । 193वाँ सदस्य दक्षिणी सूडान है ।


संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग :

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• इसका सबसे शक्तिशाली अंग सुरक्षा परिषद् है इससे कुल 15 सदस्य है इसमें पांच स्थायी सदस्य ( अमेरिका , रूस , ब्रिटेन , फ्रांस और चीन ) तथा दस अस्थायी सदस्य है जो दो वर्षों की अवधि के लिए चुने जाते है । स्थायी सदस्यों को वीटो ( निषेधाधिकार ) की शक्ति प्राप्त है । 

• शीत युद्ध के बाद से ही संयुक्त राष्ट्र में इसके ढाँचे एवं कार्य करने की प्रक्रिया दोनों में सुधार की मांग जोर पकड़ने लगी । सुरक्षा परिषद में स्थायी व अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर बल दिया गया । इसके अतिरिक्त गरीबी , भूखमरी , बीमारी , आतंकवाद पर्यावरण मसले एवं मानवाधिकार आदि मुद्दो पर संयुक्त राष्ट्र की भमिका को ओर अधिक सक्रिय बनाने पर बल दिया गया ।

• महासचिव संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रतिनिधि होता है । वर्तमान महासचिव का नाम एंटोनियो गुटेरेस ( पुर्तगाल ) है । 

• भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रमों में अपना योगदान लगातार देता रहा है । चाहे वह शांति सुरक्षा का विषय हो , निःशस्त्रीकरण हो , दक्षिण कोरिया संकट हो , स्वेज नहर का मामला हो या इराक का कुवैत पर आक्रमण हो । इसके अतिरिक्त , मानवाधिकारों की रक्षा , उपनिवेशवाद व रंगभेद का विरोध तथा शैक्षणिक आर्थिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भारत की भूमिका बनी रहती है । 

✳️PART-A समकालीन विश्व मे राजनीति✳️

• Chapter 1 शीत युद्ध का दौर
• Chapter 2 दो ध्रुवीयता का अंत
 Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व 
• Chapter 4  सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र
• Chapter 5 समकालीन दक्षिण एशिया
• Chapter 6 अंतरराष्ट्रीय संगठन 
• Chapter 7 समकालीन विश्व में सुरक्षा 
• Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
• Chapter 9 वैश्वीकरण 



✳️PART-B राजनीति विज्ञान✳️


• Chapter 10 राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
• Chapter 11 एक दल के प्रभुत्व का दौर 
• Chapter 12 नियोजित की राजनीति 
• Chapter 13 भारत के विदेश संबंध 
• Chapter 14  कांग्रेस प्रणालीः चुनौतियाँ व पुर्नस्थापना
• Chapter 15 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
• Chapter 16 जन आंदोलन का उदय 
• Chapter 17 क्षेत्रीय आकांक्षाये 

• Chapter 18 भारतीय राजनीति में नए बदलाव
• संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का पक्ष । 

✴️ आबादी के दृष्टिकोण से बड़ा राष्ट्र । 
✴️ स्थिर लोकतंत्र व मानवाधिकारों के प्रति निष्ठा । 
✴️ उभरती हुई आर्थिक ताकत ।
✴️ संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में लगातार योगदान । 
✴️शांति बहाली में भारत का योगदान । 


संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख एजेन्सियाँ 

1 ) विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) 
2 ) संयुक्त राष्ट्र , शैक्षिक , सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन ( UNESCO ) 
3 ) संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( UNICEF ) 
4 ) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ( UNDP ) 
5 ) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ( UNHRC ) 
6 ) संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग ( UNHCR ) 
7 ) संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन ( UNCTAD )

संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य एवं सिद्धान्त 

1 ) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को बनाये रखना ।
2 ) राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधो को बढ़ाना । 
3 ) आपसी सहयोग द्वारा आर्थिक , सामाजिक , सांस्कृतिक तथा मानवीय ढंग की अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को हल करना । 
4 ) अंर्तराष्ट्रीय संधियों एवं अंतराष्ट्रीय कानूनों को सम्मानपूर्वक लागू करवाना । 
5 ) राष्ट्रों की प्रादेशिक अखंडता और राजनीति स्वतंत्रता का आदर करना । 


संयुक्त राष्ट्र संघ को एक ध्रुवीय विश्व में अधिक प्रासंगिक बनाने के उपाय । 

1 ) शाति संस्थापक आयोग का गठन । 
2 ) मानवाधिकार परिषद की स्थापना । 
3 ) सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य को प्राप्त करने पर सहमति ।
4 ) एक लोकतंत्र कोष का गठन । 
5 ) आतंकवाद के सभी रूपों की भर्त्सना । 
6 ) न्यासिता परिषद की समाप्ति । 


• आज एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में जब अमेरिका का वर्चस्व पूरे विश्व पर हो चुका है तो ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ भी अमेरिकी ताकत पर पूर्णरूप से अंकुश नहीं लगा सकता , क्योंकि अमेरिका का इसके बजट में योगदान अधि क है , इसके अतिरिक्त इसका मुख्यालय भी अमेरिकी भू - क्षेत्र पर स्थित है । परन्तु इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्रसंघ वो मंच है जहाँ अमेरिका से शेष विश्व के देश वार्ता करके उसपर नियंत्रण रखने का प्रयास कर सकते है । 


अंर्तराष्ट्रीय संस्थाएं व गैर सरकारी संगठन : 

संयुक्त राष्ट्र संघ के अतिरिक्त कई अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएँ एवं गैर सरकारी संगठन है जो निरन्तर अपने उद्देश्यों को पूर्ण करने में लगे है जैसे : _ _ _ 
1 ) अर्न्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF ) . . वैश्विक स्तर पर वित्त व्यवस्था की देख - रेख एवं वित्तीय तथा तकनीकी सहायता मुहैया कराना ।

2 ) विश्व बैंक ( WB ) - मानवीय विकास ( शिक्षा , स्वास्थ्य ) कृषि और ग्रामीण विकास , पर्यावरण सुरक्षा , आधारभूत ढाँचा तथा सुशासन के लिए काम करता है।

3 ) विश्व व्यापार संगठन ( WTO ) - यह अंर्तराष्ट्रीय संगठन वैश्विक व्यापार के नियमों को तय करता है । 

4 ) अंतर्राष्ट्रीय आण्विक उर्जा एजेन्सी ( IAEA ) - यह संगठन परमाण्विक उर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और सैन्य उद्देश्यों में इसके इस्तेमाल को रोकने की कोशिश करता है । 

5 ) एमनेस्टी इंटरनेशनल : - यह एक स्वयंसेवी संगठन है । यह पूरे विश्व में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाता है । 

6 ) हयूमन राइटस वॉच : . यह स्वयंसेवी संगठन भी मानवाधिकारों की वकालत और उनसे संबंधित अनुसंधान करने वाला एक अंर्तराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन 

7 ) अन्तर्राष्ट्रीय रेड क्रास सोसायटी : - यह सोसायटी युद्ध और आंतरिक हिंसा के सभी पीड़ितों की सहायता तथा सशस्त्र हिंसा पर रोक लगाने वाले नियमों को लागू करने का प्रयास करता है । 

8 ) ग्रीनपीस : - 1971 के स्थापित ग्रीन पीस फाउण्डेशन विश्व समुदाय को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु कानून बनाने के लिए दबाव डालने का कार्य करती है । 

* हालांकि संयुक्त राष्ट्र संघ में थोड़ी कमियाँ अवश्य है , लेकिन बिना इसके दुनिया और बदहाल होगी । संयुक्त राष्ट्र संघ एवं उपरोक्त वर्णित सभी आर्थिक संस्थाओं एवं गैर सरकारी संगठनों ने पारस्परिक निर्भरता को बढ़ाया है । जिसससे की संस्थाओं की उत्तरदायित्वता भी बढ़ती जा रही है । इसलिए आने वाली सरकारों को संयुक्त राष्ट्र एवं इन अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के समर्थन एवं उपयोग के तरीके तलाशने होगें ।



✳️PART-A समकालीन विश्व मे राजनीति✳️

• Chapter 1 शीत युद्ध का दौर
• Chapter 2 दो ध्रुवीयता का अंत
 Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व 
• Chapter 4  सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र
• Chapter 5 समकालीन दक्षिण एशिया
• Chapter 6 अंतरराष्ट्रीय संगठन 
• Chapter 7 समकालीन विश्व में सुरक्षा 
• Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
• Chapter 9 वैश्वीकरण 



✳️PART-B राजनीति विज्ञान✳️


• Chapter 10 राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
• Chapter 11 एक दल के प्रभुत्व का दौर 
• Chapter 12 नियोजित की राजनीति 
• Chapter 13 भारत के विदेश संबंध 
• Chapter 14  कांग्रेस प्रणालीः चुनौतियाँ व पुर्नस्थापना
• Chapter 15 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
• Chapter 16 जन आंदोलन का उदय 
• Chapter 17 क्षेत्रीय आकांक्षाये 

• Chapter 18 भारतीय राजनीति में नए बदलाव

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