12 class history notes in hindi medium Chapter 4 Thinkers, Beliefs and Buildings Cultural Developments विषय - 4 विचारक , विश्वास और ईमारतें ( सांस्कृतिक विकास ) लगभग 600 ई . पू . से 600 ई .

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12 class history notes in hindi medium Chapter 4 Thinkers, Beliefs and Buildings Cultural Developments विषय - 4 विचारक , विश्वास और ईमारतें ( सांस्कृतिक विकास ) लगभग 600 ई . पू . से 600 ई .

CBSE Revision Notes for CBSE Class 12 History Thinkers Belief and Buildings Culture Development Class 12 History Book 1 chapter-4 Thinkers Belief and Buildings Culture Development A History of Buddhism: Sanchi Stupa. Broad overview: (a) A brief review of religious histories of Vedic religion, Jainism, Vaisnavism, Saivism. (b) Focus on Buddhism. Story of discovery: Sanchi stupa.

Class 12th History chapter 4 Thinkers, Beliefs and Buildings Cultural Developments Notes in Hindi

12 class history notes in hindi medium Chapter 4 Thinkers, Beliefs and Buildings Cultural Developments विषय - 4 विचारक , विश्वास और ईमारतें ( सांस्कृतिक विकास ) लगभग 600 ई . पू . से 600 ई .

📚 विषय - 4 📚
👉 विचारक , विश्वास और ईमारतें 👈

✳️ स्तूप :-

🔹 स्तूप का शाब्दिक अर्थ है - ' किसी वस्तु का ढेर ' । स्तूप का विकास ही संभवतः मिट्टी के ऐसे चबूतरे से हुआ , जिसका निर्माण मृतक की चिता के ऊपर अथवा मृतक की चुनी हुई अस्थियों के रखने के लिए किया जाता था । गौतम बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं , जन्म , सम्बोधि , धर्मचक्र प्रवर्तन तथा निर्वाण से सम्बन्धित स्थानों पर भी स्तूपों का निर्माण हुआ ।

✳️ साँची का स्तूप :-

🔹साँची भोपाल में एक जगह का का नाम है और यह मध्यप्रदेश में स्थित है ।
🔹साँची में एक प्राचीन स्तूप है , जो की अपनी सुन्दरता के लिए काफी प्रसिद्ध है ।
🔹 साँची का यह प्राचीन स्तूप महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था ।
🔹इस स्तूप का निर्माणकार्य तीसरी शताब्दी ई . पू से शुरू हुआ ।

✳️ साँची के स्तूप का संरक्षण :-

🔹 19वीं सदी के यूरोपियों में साँची के स्तूप को लेकर काफी दिलचस्पी थी । क्योकि साँची का स्तूप बेहद सुंदर एवं आकर्षक था ।

🔹 फ्रांस के लोगो ने साँची के पूर्वी तोरणद्वार ( जो की काफी सुंदर था ) को फ्रांस के संग्रहालय में प्रदर्शित करने के लिए तोरणद्वार को फ्रांस ले जाने की मांग शाहजहाँ बेगम से की।

🔹 ऐसी ही कोशिश अंग्रेज लोगों ने भी की । लेकिन बेगम नहीं चाहती थी की साँची के स्तूप का यह तोरणद्वार कहीं और जाए , तो बेगम ने अंग्रेजों को और फ्रांसीसियों को बेहद सावधानीपूर्वक तरीके से बनाई गयी एक प्लास्टर प्रतिकृति ( copy ) थमा दी , और वे लोग संतुष्ट हो गए । 

🔹 भोपाल की बेगमों का स्तूप के संरक्षण में बेहद योगदान रहा है , शाहजहाँ बेगम और सुलतान जहां बेगम ने स्तूप के संरक्षण के लिए बहुत से कार्य किये । रख रखाव के लिए धन दान किया ।

🔹 संग्रहालय ( museums ) बनाने के लिए दान दिया । जॉन मार्शल नें बहुत सी पुस्तकें लिखी , और उनके प्रकाशन के लिए भी बेग़मों ने दान दिया ।

✳️ ई . पूप्रथम सहस्त्राब्दी ( एक महत्वपूर्ण काल ) :-

🔹  यह काल विश्व के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण माना जाता था । क्योकि इस काल में अनेक चिंतकों को उदय हुआ । जैसे : - बुद्ध , महावीर , प्लेटो , अरस्तु , सुकरात , खुन्ग्त्सी । इन सब विद्वानों ने जीवन के रहस्य को समझने की कोशिश की ।

✳️ यज्ञ और विवाद :-

👉 यज्ञ :-

🔹 वैदिक परम्परा की जानकारी हमें ऋग्वेद से मिलती है । 
🔹ऋग्वेद के अंदर अग्नि , इंद्र , सोम , आदि देवताओं को पूजा जाता है ।
🔹 यज्ञ के समय लोग मवेशी , बेटे , स्वास्थ्य , और लम्बी आयु के लिए प्रार्थना करते हैं ।
🔹 शुरू शुरू में यज्ञ सामूहिक रूप से किये जाते थे। बाद में घर के मालिक खुद यज्ञ करवाने लगे ।
🔹 राजसूये और अश्वमेध यज्ञों का नाम है ये यज्ञ राजा या सरदार द्वारा करवाया जाता था ।

✳️ वाद - विवाद और चर्चाएँ :-

🔹 महावीर तथा बुद्ध ने यज्ञों पर सवाल उठाए थे ।
🔹शिक्षक का कार्य होता था एक स्थान से दूसरे स्थान धूम - धूमकर अपने ज्ञान , दर्शन से विश्व को जागरूक बनाए ।
🔹शिक्षक सामान्य लोगो में तर्क - वितर्क करते थे ।
🔹चर्चाएँ झोपड़ी , उपवनों में होती थी ।
🔹ऐसे उपबनो में घुमक्कड़ मनीषी ठहरते थे ।
🔹ऐसे में इन शिक्षको के अनुयायी बनते चले गए ।

✳️ स्तूप कैसे बनाये गए ?

🔹 स्तूप ज्यादातर राजाओं द्वारा बनवाए जाते थे ।
🔹बड़े बड़े राजा धन दान करते थे जिससे स्तूप बनाये जाते थे ।
🔹 बड़े बड़े शिल्पकार और व्यापारी लोग भी दान देते थे , जिससे स्तूप बनाये जाते थे ।
🔹 कभी कभी गाँव के साधारण महिला और पुरुष भी दान दिया करते थे , जिससे स्तूप बनाने में आसानी होती थी ।
🔹भिक्षु और भिक्षुनियाँ भी दान दिया करते थे जिससे स्तूप बनाये जाते थे ।
🔹 इससे यह पता चलता है , की ज्यादातर स्तूप दान द्वारा ही बनवाए गए ।

✳️ स्तूप की संरचना ( बनावट ) 

🔹 स्तूप को संस्कृत भाषा में टीला भी कहा जाता है ।
🔹 स्तूप का जन्म एक गोलार्ध लिए हुए मिटटी के टीले से हुआ ।
🔹 इसे बाद में अंड कहा गया ।
🔹 धीरे धीरे इसकी बनावट में बदलाव होने लगा ।
🔹 अंड के उपर एक हर्मिका होती थी ।
🔹 यह छज्जे जैसा ढांचा देवताओं का घर समझा जाता था ।
🔹 हर्मिका से एक मस्तूल निकलता था , जिसे यष्टि कहते थे जिस पर अक्सर एक छत्री लगी होती थी ।
🔹 टीले के चारों ओर एक वेदिका होती थी । तोरणद्वार स्तूपों की सुन्दरता को बढ़ाते हैं । 
🔹 उपासक पूर्वी तोरणद्वार से प्रवेश करके स्तूप की परिक्रमा करते थे |

✳️ स्तूप की खोज :-

🔹प्रत्येक स्तूप का अपना इतिहास है । 

👉  अमरावती का स्तूप :-
🔹 इस स्तूप में अवशेषों के रूप में मूर्तियाँ , पत्थर मिले जो कि बाद मे अलग - अलग जगह ले गए ।
👉 बंगाल 
👉 मद्रास
👉 लंदन

🔹 अंग्रेज अफसरों के बागों में अमरावती की मूर्तियां पाई गई है। 

✳️ एक अच्छा इंसान 

🔹 रच . एल . कोल . - इनका मानना था कि असली कृतियाँ जहाँ की है वहीं रखनी चाहिए ।

🔹 साँची का स्तूप बच गया जबकि अमरावती का स्तूप नही बच पाया ।

✳️ अमरावती का स्तूप नष्ट क्यों हुआ ? 

🔹  अमरावती का स्तूप , साँची के स्तूप के जैसा ही एक सुंदर स्तूप था । अमरावती का स्तूप आंध्रप्रदेश में था ।
🔹1854 में आंध्रप्रदेश के कमिशनर ने अमरावती की यात्रा की ।
🔹उन्होंने वहाँ जाकर बहुत से पत्थर और मूर्तियाँ जमा की और उन्हें मद्रास ले गए । 
🔹 उन्होंने बताया की अमरावती का स्तूप बोद्धो का सबसे शानदार स्तूप था ।
🔹 1850 में अमरावती के पत्थर अलग अलग जगहों पर ले जाए जा रहे थे ।
🔹 कुछ पत्थर कलकत्ता में एशियाटिक सोसायटी ऑफ़ बंगाल पहुचे ।
🔹कुछ पत्थर मद्रास पहुचे । कुछ पत्थर लन्दन पहुचे । कई मूर्तियों को अंग्रेजी अफसरों ने अपने बागों में लगवाया | 
🔹 हर नया अधिकारी अमरावती से मूर्ती उठा कर ले जाता था और कहता था की हमसे पहले भी अधिकारी मूर्ती लेकर गए है  हमें मत रोको ।

✳️ जैन धर्म :-

🔹 जैन धर्म भारत के प्राचीन धर्मों में से एक है । जैन धर्म की शिक्षाएं 6वीं सदी ई . पू से पहले ही भारत में प्रचलन में थी |जेन धर्म में जो भी महापुरुष या शिक्षक होता है उसे तीर्थकर कहा जाता है । 

🔹 महावीर उन्ही तीर्थंकरों में से सबसे प्रसिद्ध है ।  ऐसा माना जाता है की महावीर से पहले 23 तीर्थकर ( शिक्षक ) हो चुके हैं । • महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थकर थे | जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभ देव थे | जैन धर्म के 23वें तीर्थकर पार्श्वनाथ जी थे |


✳️  महावीर जैन :-

👉 जन्म = 540 ई . पू ( लगभग ) 
👉 स्थान = वैशाली ( कुंडग्राम ) 
👉 पिता = सिद्धार्थ 
👉 माता = त्रिशला 
👉 उपाधि = 24वें तीर्थकर 
👉 अन्य नाम = निगंठ नाट पुत्त 

✳️ जैन धर्म की शाखाएं  :-

👉 श्वेताम्बर : इस शाखा के लोग श्वेत वस्त्र धारण करते है । 
👉 दिगम्बर : इस शाखा के लोग वस्त्र नहीं पहनतें एवं नग्न रहते हैं ।

✳️जैन धर्म की शिक्षाएं :-

🔹  जैन धर्म की पहली शिक्षा है की , पत्थर , चट्टान , और जल जैसी निर्जीव चीज़ों में भी जीवन है । 
🔹जीवों के प्रति अहिंसा : जैन धर्म की शिक्षा है की हमें जीवों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करनी चाहिए , खासकर इंसानों , जानवरों , पेड़ पौधों और कीड़े मकोड़ों को नहीं मारना चाहिए । 
🔹जैन धर्म की तीसरी शिक्षा है की जन्म और पुनर्जन्म का चक्र कर्म द्वारा निर्धारित होता है अर्थात हम जैसे कर्म करते हैं हमें उसी प्रकार अगला जन्म मिलता है । 
🔹 कर्म के चक्र से मुक्ति के लिए त्याग और तपस्या बेहद जरूरी है । 

✳️ जैन साधू और साध्वी के पांच व्रत :-

🔹 हत्या न करना ।
🔹चोरी न करना ।
🔹झूठ न बोलना ।
🔹ब्रह्मचर्य का पालन करना ।
🔹 धन संग्रह न करना  ।


✳️ बोद्ध धर्म :-

🔹 बोद्ध धर्म भारत से निकला एक प्राचीन और महान धर्म है । 
🔹 महात्मा बुद्ध ने बोद्ध धर्म की स्थापना की | 
🔹 बोद्ध धर्म की स्थापना लगभग ई . पू6वीं शताब्दी में हुई । 
🔹इसाई और इस्लाम धर्म के बाद यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है | 
🔹इस धर्म को मानने वाले ज्यादातर लोग चीन , जापान , कोरिया , थाईलैंड , कंबोडिया , श्रीलंका , नेपाल , भूटान और भारत से हैं । 

✳️ महात्मा बुद्ध :-

👉 बोद्ध धर्म के संस्थापक = महात्मा बुद्ध 
👉 पूरा नाम                   = गौतम बुद्ध 
👉 बचपन का नाम          = सिद्धार्थ 
👉 जन्म                        = 563 ई . पू 
👉 जन्म स्थान                = लुम्बिनी , नेपाल 
👉 पिता का नाम             = शुशोधन 
👉 माँ का नाम                = मायादेवी ( बुद्ध के जन्म के 7 दिन बाद इनकी मृत्यु हुई ) 
👉 सौतेली माँ।                = प्रजापति गौतमी 
👉 बुद्ध के पुत्र का नाम     = राहुल

✳️ बुद्ध द्वारा देखे गए 4 दृश्य :-

👉 1 . बूढा व्यक्ति 
👉 2 . एक बीमार व्यक्ति 
👉 3 . एक लाश 
👉 4 . एक सन्यासी 

✳️ बुद्ध की शिक्षाएं :-

🔹  बुद्ध की शिक्षाएं त्रिपिटक में संकलित हैं । 
🔹 त्रिपिटक को तीन टोकरियाँ भी कहा जाता है । 
🔹 त्रिपिटकःसुत्त पिटक , विनय पिटक , अभिधम्म पिटक ।
🔹 घोर तपस्या और विषयासक्ति के बीच मध्यममार्ग अपनाकर मनुष्य दुनिया के दुखों से मुक्ति पा सकता है । 
🔹 भगवान का होना अप्रासंगिक ।
🔹यह दुनिया अनित्य है और लगातार बदल रही है । 
🔹इस दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं है । 
🔹समाज का निर्माण इंसानों ने किया है । 
🔹 बुद्ध " तुम सब अपने लिए खुद ही ज्योति बनो क्योंकि तुम्हे खुद ही अपनी मुक्ति का रास्ता ढूंढना है । 
🔹 इस दुनिया में दुःख ही दुःख है और दुःख का कारण है इच्छा / लोभ और लालच | 

✳️ बोद्ध धर्म की परम्पराएं :-

👉 महायान : बुद्ध को भगवान् समझना ।
👉 हीनयान : बुद्ध को इंसान समझना ।

✳️ बोद्ध धर्म तेजी से क्यों फ़ैल गया ? 

🔹  बौद्ध धर्म बहुत साधारण था । इसमें जाति प्रथा नहीं थी । कोई भी इसे आसानी से अपना सकता था । सबके साथ समान व्यवहार किया जाता था । ऊंच नीच का भेदभाव ना था । वर्ण व्यवस्था पर हमला किया ।

🔹  ब्राह्मणीय नियमो का विरोध किया । महिलाओ को भी संघ में शामिल किया जाने लगा । महिलाओ को पुरुषों के जितने अधिकार दिए । बौद्ध धर्म उदर एवम् लोकतांत्रिक था । ईश्वर और आत्मा के अस्तित्व को नहीं माना । बौद्ध संघ के नियम ज्यादा कठोर नहीं थे । कठोर तप का विरोध करके मध्यम मार्ग अपनाने की बात ।

✳️ पौराणिक हिन्दू धर्म का उदय :-

🔹 हिन्दू धर्म सबसे प्राचीनतम धर्म में से एक है ।
🔹 इसमें वैष्णव और शैव परम्परा शामिल है ।
🔹 वैष्णव - जो विष्णु भगवान् को मुख्य देवता मानते है ।
🔹 शैव - जो शिव भगवान् को मुख्य देवता मानते है ।
🔹 वैष्णववाद में कई अवतारों को महत्त्व दिया जाता है ।
🔹 ऐसा माना जाता है की जब संसार में पाप बढ़ता है तो भगवान् अलग अलग अवतारों में संसार की रक्षा करने आते है ।
🔹 इस परंपरा में दस अवतारों की कल्पना की गयी है 
🔹 मूर्तिपूजा की जाती है ।
🔹 शिव भगवान को उनके प्रतीक लिंग के रूप में दर्शाया जाता है 

✳️ मंदिरों का निर्माण :-

 🔹 प्रारम्भ में मंदिर एक चौकोर कमरे की तरह होते थे जिसे गर्भगृह कहा जाता था ।
🔹 इनमे एक दरवाजा होता था जिसमें पूजा करने के लिए अंदर जा सकते थे ।
🔹मूर्ति की पूजा की जाती थीं ।
🔹फिर बाद के समय में गर्भगृह के ऊपर एक ढांचा बनाया जाने लगा जिसे शिखर कहा जाता था ।
🔹 मंदिर की दीवारों पर चित्र उत्कीर्ण किए जाते थे ।
🔹 फिर धीरे धीरे मंदिरों को बनाए जाने वाले तरीके विकसित होते गए अब मंदिरों में विशाल सभास्थल , ऊंची दीवार बनाई जाने लग ।
🔹प्रारम्भ में कुछ मदिरों को पहाड़ों को काटकर गुफा की तरह बनाया गया था

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