11th class political science Notes in Hindi chapter 2 Right in the Indian Constitution अध्याय - 2 भारतीय संविधान में अधिकार

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11th class political science Notes in Hindi chapter 2 Right in the Indian Constitution अध्याय  - 2  भारतीय संविधान में अधिकार

11th class political science chapter 2 Notes in hindi भारतीय संविधान में अधिकार (( Right in the Indian Constitution ))

11th class political science chapter 2 Notes in hindi Right in the Indian Constitution



📚📚 अध्याय = 2 📚📚
📑📑 भारतीय संविधान में अधिकार 📑📑

✳️ अधिकार :- 

🔹  अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियों है जिनके बिना कोई भी । मनुष्य अपना विकास नही कर सकता । अधिकार वे हक है जो एक आम आदमी को जीवन जीने के लिए चाहिए , जिसकी वो मांग करता है । कानून द्वारा प्रदत्त सुविधाएं अधिकारो की रक्षा करती है।


✳️ अधिकारों का घोषणा पत्रः - 

🔹 अधिकतर लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों के अधिकारों को संविधान में सूचीबद्ध कर दिया जाता हैं ऐसी सूची को अधिकारों का घोषणा पत्र ' कहते है । जिसकी मांग 1928 में नेहरू जी ने उठाई थी ।

✳️ हमें मौलिक अधिकारो की आवश्यकता क्यों है ? :-

🔹 मौलिक अधिकार व्यक्ति के मूल विकास , सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं । समाज में समानता , स्वतंत्रता , बन्धुत्व , आर्थिक , सामाजिक विकास लाने में सहयोग प्रदान करते हैं ।

✳️ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग :-

🔹 2000 में राष्ट्रीय मानवाधिकार का गठन । सदस्य - एक भूतपूर्व सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश , एक भूतपूर्व उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश तथा मानवधिकारों के संबंध में ज्ञान रखने या व्यवहारिक अनुभव रखने वाले दो सदस्य होते हैं । कार्य - शिकायते सुनना , जांच करना तथा पीड़ित को राहत पहुंचाना ।

✳️ भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारः- 

🔹  भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान क्रांतिकारियों / स्वतंत्रता नायको द्वारा नागरिक अधिकारों की मांग समय - समय पर उठाई जाती रही । 1928 में भी मोतीलाल नेहरू समिति ने अधिकारों के एक घोषणा पत्र की मांग उठाई थी । फिर स्वतंत्रता के बाद इन अधिकारों में से अधिकांश को संविधान में सूचीबद्ध कर दिया गया । 44 वें संविधान संशोधन द्वारा सम्पति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से निकाला गया ।



✳️ सामान्य अधिकार :- 

🔹  वे अधिकार जो साधारण कानूनों की सहायता से लागू किए जाते हैं तथा इन अधिकारों में ससंद कानून बना कर के परिवर्तन कर सकती है ।



✳️ मौलिक अधिकारः- 

🔹 वे अधिकार जो संविधान में सूचीबद्ध किए गए हैं तथा जिनको लागू करने के लिए विशेष प्रावधान किए गये है । इनकी गांरटी एवं सुरक्षा स्वंय संविधान करता है । इन अधिकारों में परिवर्तन करने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ता है । सरकार का कोई भी अंग मौलिक अधिकारों के विरूद्ध कोई कार्य नहीं कर सकता ।

✳️ भारतीय संविधान के भाग तीन में वर्णित छ : मौलिक अधिकार निम्न प्रकार है :-

1 ) समानता का अधिकार  ( 14 - 18 अनुच्छेद )
2 ) स्वतंत्रता का अधिकार  ( 19 - 22 अनुच्छेद )
3 ) शोषण के विरूद्ध अधिकार  ( 23 - 24 अनुच्छेद )
4 ) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार  ( 25 - 28 अनुच्छेद )
5 ) संस्कृति एवं शिक्षा संबधि  ( 29 - 30 अनुच्छेद )
6 ) संवैधानिक उपचारों का अधिकर  ( अनुच्छेद 32 )


✳️ 1 . समता का अधिकार :-

Article - 14  ➡️ गांरटी कानूनी समता और समान कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने के बिना भेदभाव के ।

Article - 15  ➡️ सरकार - धर्म जाति , लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव मुक्त समाज की स्थापना ।↘️

Article - 16  ➡️ सार्वजानिक नियुक्तियाँ में अवसर समानता।

Article - 17
  ➡️ समाज से छुआछुत की समाप्ति ।

Article - 18  ➡️ सैनिक एवं शैक्षिक उपाधियों के अलावा उपाधियों पर रोक।


✳️ 2 . स्वतंत्रता का अधिकार :-

Article - 19  ➡️ स्वतंत्रता - ' भाषण एवं अभिव्यक्ति , संघ बनाने , सभा करने भारत भर में भ्रमण करने , भारत के किसी भाग में बसने और स्वतंत्रता पूर्वक कोई भी व्यवसाय करने की ।

Article
 - 20  ➡️ अपराध में अभियुक्त या दंडित व्यक्ति को सरंक्षण प्रदान करना ।

Article - 21  ➡️ कानूनी प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को जीने की स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता । अनुच्छेद 21 ( क ) - RTE , 2002 , 86 वां संविधान संशोधन शिक्षा मौलिक अधिकर , वर्ष 6 से 14 आयु मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा ।

Article - 22  ➡️ किसी भी नागरिक की विशेष मामलों में गिरफ्तारी एवं हिरासत से सुरक्षा प्रदान करना ।

नोट - 93वें संशोधन ( 2002 ) द्वारा शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद 211 ( ए ) में जोड़ा गया ।


✳️ 3 . शोषण के विरूद्ध अधिकार :-

Article - 23 ➡️ मानव व्यापार ( तस्करी ) और बल प्रयोग द्वारा बेगारी , बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध - जब भारत आजाद हुआ , तब भारत के कई भागों में दासता और बेगार प्रथा प्रचलित थी । जमींदार किसानों से काम करवाते थे , परन्तु मजदूरी नहीं देते थे , विशेषकर स्त्रियों को पशुओं की तरह खरीदा और बेचा जाता था ।

Article - 24 ➡️ खदानों , कारखानों और खतरनाक कामों में बच्चों की मनाही ।

Article - 24 ➡️ के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी जोखिम वाले काम पर नहीं लगाया जायेगा , जैसे - खदानों में कारखानों में इत्यादि ।


✳️ 4 . धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार :-

Article - 25 ➡️ अपने - अपने धर्म को मानने , पालन करने एवं प्रचार - प्रसार करने का अधिकार ।

Article - 26 ➡️ संगठित इकाई के रूप में धार्मिक तथा परोपकारी कार्य करने वाले संस्थानों को स्थापित करने का अधिकार।

Article - 27 ➡️ धर्म प्रचार एवं धार्मिक सम्प्रदाय की देख - रेख । के लिए कर ' देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।

Article - 28 ➡️ किसी भी सरकारी शिक्षण संस्था मे कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी ।


✳️ 5 . संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार :-

Article - 29 ➡️ भारत के किसी भी राज्य के नागरिकों को अपनी विशेष भाषा , लिपि या संस्कृति को बनाए रखने को अधिकार देता है ।

Article - 30 ➡️ इसके अन्तर्गत भाषा तथा धार्मिक अप्लसंख्यकों को शिक्षा संस्थाओं की स्थापना तथा उनके प्रशासन को चलाने का अधिकार प्रदान करता है ।


✳️ 6 . संवैधानिक उपचारों का अधिकार ( अनुच्छेद 32 ) :-


🔹 संविधान के जनक , डॉ . अम्बेडकर ने इस अधिकार को " संविधान का हृदय और आत्मा ' की संज्ञा दी है । इसके अंतर्गत न्यायलय कई विशेष आदेश जारी करते है जिन्हें रिट कहते हैं ।

🔹 जो निम्न प्रकार हैं :-

( 1 . बंदी प्रत्यक्षीकरण ) 
( 2 . परमादेश ( मण्डामस )
( 3 . प्रतिषेध ( प्रोहिबीशन )
( 4 . अधिकार पृच्छा ( क्वो वारंटो ) 
( 5 . उत्प्रेषण ( सरशियोररी ) 
( 6 . संवैधानिक उपचारों का अधिकार

✳️ दक्षिण अफ्रीका का संविधान :-

दक्षिण अफ्रीका का संविधान दिसम्बर 1996 में लागू हुआ , जब रंगभेद वाली सरकार हटने के बाद देश गृहयुद्ध के खतरे से जूझ रहा था , दक्षिण अफ्रीका में अधिकारों को घोषणा पत्र प्रजातंत्र की आधारशिला है ।


✳️ दक्षिण अफ्रीका के संविधान में सूचीबद्ध प्रमुख अधिकार :- 

i ) गरिमा का अधिकार । 
ii ) निजता का अधिकार । 
iii ) श्रम - संबंधी समुचित व्यवहार का अधिकार । 
iv) स्वास्थ्य पर्यावरण और पर्यावरण सरंक्षण का अधिकार । 
v ) समुचित आवास का अधिकार । 
vi ) स्वास्थ्य सुविधाएं , भोजन , पानी और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार ।
vii ) बाल अधिकार ।
viii ) बुनियादी और उच्च शिक्षा का अधिकार । 
ix ) सूचना प्राप्त करने का अधिकार | 
x ) सांस्कृतिक , धार्मिक ओर भाषाई समुदायों का अधिकार | 


✳️ राज्य के नीति - निर्देशक तत्व क्या है ? 

( क ) स्वतंत्र भारत में सभी नागरिकों में समानता लाने और सबका कल्याण करने के लिए मौलिक अधिकारों के अलावा बहुत से नियमों की जरूरत थी । राज्य की नीति निर्देशक तत्वों के तहत ऐसे ही नीतिगत निर्देश सरकारों को दिए गए है , जिनको न्यायलय में चुनौती नहीं दी जा सकती है परन्तु इन्हें लागू करने के लिए सरकार से आग्रह किया जा सकता है । सरकार का दायित्व है कि जिस सीमा तक इन्हें लागू कर सकती है , करें ।

( ख ) प्रमुख नीति निर्देशक तत्वों की सूची में तीन प्रमुख बातें हैं - -

i) वे लक्ष्य और उद्देश्य जो एक समाज के रूप मे हमें स्वीकार करने चाहिए ।

ii ) वे अधिकार जो नागरिकों को मौलिक अधिकारों के अलावा मिलने चाहिए ।

iii ) वे नीतियाँ जिन्हें सरकार को स्वीकार करना चाहिए ।


✳️ नागरिकों के मौलिक कर्तव्यः - 

1976 में , 42वें संविधान संशोधन द्वारा नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों की सूची ( अनुच्छेद - 51 ( क ) ) का समावेश किया गया है । इसके अन्तर्गत नागरिकों के दस मौलिक कर्तव्य निम्न हैं :

i) संविधान का पालन करना , राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना ।

ii ) राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखना और उनका पालन करना ।

iii ) भारत की सम्प्रभुता , एकता और अखंडता की रक्षा करना ।

iv ) राष्ट्र रक्षा एवं सेवा के लिए तत्पर रहना ।

v ) नागरिकों मे भाईचारे का निर्माण करना ।

vi ) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली पंरपरा के महत्व को समझे और उसको बनाए रखें ।

vii ) प्राकृतिक पर्यावरण का सरंक्षण करें ।

viii ) वैज्ञानिक दृष्टिकोण , मानववाद ओर ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें ।

ix ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाएं और हिंसा से दूर रहें ।

x ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें ।


✳️ नीति - निर्देशक तत्वों और मौलिक अधिकारों में संबंधः :-


i ) दोनों एक दूसरे के पूरक हैं । जहां मौलिक अधिकार सरकार के कुछ कार्यों पर प्रतिबंध लगाते हैं , वहीं नीति निर्देशक तत्व उसे कुछ कार्यों को करने की प्रेरणा देते हैं ।

ii ) मौलिक अधिकार खास तौर पर व्यक्ति के अधिकारों को सरंक्षित करते हैं , वहीं पर नीति निर्देशक तत्व पूरे समाज के हित की बात करते है ।


✳️ नीति - निर्देशक तत्वों एवं मौलिक अधिकारों में अन्तरः :-

🔹  मौलिक अधिकारों को कानूनी सहयोग प्राप्त है परन्तु नीति निर्देशक तत्वों को कानूनी सहयोग प्राप्त नहीं है । अर्थात् मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर आप न्यायलय में जा सकते हैं परन्तु नीति निर्देशक तत्वों के उल्लंघन पर न्यायलय नहीं जा सकते ।

🔹  मौलिक अधिकारों का सम्बन्ध व्यक्तियों और निर्देशक सिद्धान्तों का समबन्ध समाज से है ।

🔹  मौलिक अधिकार प्राप्त किये जा चुके हैं जबकि निर्देशक सिद्धान्तों को अभी लागू नहीं किया गया ।

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