Chapter=1 ईंटे , मनके तथा अस्थियाँ(( Bricks, Beads And Bones)) ( हड़प्पा सभ्यता ) 12th class History Hindi Notes

💮🌼पाठ = 1
Chapter=1 ईंटे , मनके तथा अस्थियाँ(( Bricks, Beads And Bones)) ( हड़प्पा सभ्यता ) 12th class History Hindi Notes🌼💮

पाठ = 1  Chapter=1 ईंटे , मनके तथा अस्थियाँ(( Bricks, Beads And Bones)) ( हड़प्पा सभ्यता ) 12th class History Hindi Notes


भारत का इतिहास बहुत समृद्ध है प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के कई स्रोत है

 जैसे - व्यक्ति, अभिलेख, सूचियाँ, मृदभांड, स्थापत्य कला, शिल्प कला, साहित्य, विदेशी यात्रियों के वृतांत, आदि।

 इसी प्रकार महाभारत भी भारत के इतिहास को जानने का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है

 यह विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है इसका पुराना नाम जय कोड है

 इस अध्याय में हम महाभारत के महत्व को समझने का प्रयास करेंगे

 और समझने का प्रयास यह होगा कि किस प्रकार महाभारत काल में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक व्यवहार था

 ऐसा माना जाता है कि वैदिक सभ्यता ही भारत की सबसे प्राचीन या पुरानी सभ्यता है |

 लेकिन जब भारत में हड़प्पा सभ्यता की खोज हुई तो पता चला की वैदिक सभ्यता से भी प्राचीन सभ्यता भारत में थी |

 क्या आप जानते हैं कि हड़प्पा सभ्यता की खोज कैसे हुई?

🔹 लगभग 150 साल पहले पंजाब में पहली बार रेल की पटरी बिछाने के लिए exc शुरू हुई तो अचानक आग को हड़प्पा पुरास्थल मिला जो की आज के समय पकिस्तान में पड़ता है |  परियर द्वारा एक्स में मिली ईंटो का प्रयोग किया गया लेकिन वह यह समझ नहीं पाया की यह ईंटे हडप्पा सभ्यता से सम्बंधित है उसके बाद लगभग आज से 80 साल पहले जीवविनों ने इस स्थल को खोजा तब पता लगा की यह एक प्राचीन सभ्यता थी।

🔹इस सभ्यता का नाम हडप्पा सभ्यता इसलिए पड़ा क्योकि जिस जगह पर इसकी खोज हुई उस नगर का नाम हड़प्पा था

🔹 इस तरीके से पता चला की यह हड़प्पा सभ्यता की पुरावस्थाएं हैं और हड़प्पा सबसे प्राचीन सभ्यता थी |

 क्या आप जानते हैं कि हड़प्पा सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता क्यों कहा जाता है?

🔹 इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता इसलिए कहा जाता है क्योकि हड़प्पा नाम के स्थान पर ही यह सभ्यता सबसे पहले खोजी गयी थी, और यहाँ रहने से प्राप्त हुए थे।

🔹 इस सभ्यता में एक और नगर महत्व है जिसका नाम मोहनजोदड़ो है, यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है

 क्या आप जानते हैं कि हड़प्पा सभ्यता को सिन्धुघाट सभ्यता क्यों कहा जाता है?

🔹 इस सभ्यता को सिन्धुघाट सभ्यता इसलिए कहा जाता है क्योकि यह सभ्यता सिन्धु नदी घाटी के आसपास फैली हुई थी।

🔹 यह इलाका उपजाऊ था, हड़प्पावासी यहाँ पर खेती किया करते थे |

 हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल

🔹 हड़प्पा सभ्यता के कुछ स्थल वर्तमान में पाकिस्तान में है और बाकी जगह भारत में है

🔹नागेश्वर (गुजरात)
🔹 बालाकोट (पाकिस्तान)
🔹चन्हुदड़ो (पाकिस्तान)
🔹 कोटदीजी (पाकिस्तान)
🔹 धौलावीरा (गुजरात)
🔹 लोथल (गुजरात)
🔹 कालाबंग (रेग)
🔹 मेतावली (हरियाणा)
🔹 राखीगढ़ी (हरियाणा)


 हडप्पा सभ्यता की खोज किसने की थी?

🔹जलालदास बनेर्जी
🔹दयाराम साहनी
🔹 जॉन मंगल (प्रभारी)

 हडप्पा सभ्यता की कृषि की विशेषता

🔹हड़प्पाई लोग कृषि करते थे इसका प्रमाण प्राप्त हुआ है
🔹 गेहूं की खेती की जाती थी
🔹 जौ की खेती
🔹 दाल की खेती
🔹 सफ़ेद चने की खेती
🔹 तिल की खेती
🔹 कुए के पानी से सिंचाई
🔹 जुताई के लिए बैलों का प्रयोग

हडप्पा सभ्यता की विशेषता

🔹 शहरीकरण
🔹नगर निर्माण योजना
🔹सुव्यवस्थित सडकें
🔹 नालियां
🔹 दुर्ग
🔹मूर्तिकला
🔹 विशाल स्नानागार
🔹 अन्न के भण्डार
🔹 जल निकास प्रणाली
🔹 लिपि
🔹 शिल्पकला (मनके बनाना)

 हडप्पा सभ्यता का धार्मिक जीवन?

🔹 हड़प्पा के लोग पूजा करते थे इसके कुछ प्रमाण मिले हैं, कई स्थलों पर मूर्ति के प्रमाण मिले हैं |  यह लोग प्रकृति की पूजा करते थे, वृक्ष की पूजा करते थे |

 🔹मातृदेवी की पूजा
 🔹वृक्ष की पूजा
🔹 शिव की पूजा

 हड़प्पाई लिपि की विशेषता

🔹 यह लिपियनं से बाए ओर लिखी जाती थी |
🔹 यह लिपि चित्रात्मक लिपि थी
🔹 इस लिपि में 375 - 400 चिन्ह थे |
 🔹इस लिपि को आजतक कोई समझ नहीं पाया
🔹 यह एक रहस्यमई लिपि है |
 🔹इसी के कारण हडप्पा सभ्यता के बारे में हमे ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी क्योकि हडप्पा की लिपि को आजतक विद्वान समझ नहीं पाए |

 हडप्पा सभ्यता में शिल्पकला

 🔹शिल्प कार्य का अर्थ होता है शिल्प से जुड़े कार्य करना

 जैसे: -

🔹 मनके बनाना
🔹 शंख की कटाई करना
🔹 धातु से जुड़ा काम करना
🔹मुहरा बनाना
🔹बाट बनाना
🔹चन्हुदड़ो ऐसी जगह थी जहाँ पर के लोग लगभग पूरी तरह से शिल्पुत् संपादन के कार्य करते थे |
🔹चन्हुदड़ो में कुछ ऐसी चीज़े मिली है जिससे पता लगता है की यहाँ पर शिल्प उत्पादन बडे पैमाने पर होता था
🔹 हड़प्पाई मोहरा काफी मात्रा में पाया गया है
🔹 हड़प्पाई लोग कांसे का प्रयोग करते थे
🔹 काँसा तांबा और टिन को मिलाकर बनाया गया एक मिश्रधातु है

 हडप्पा सभ्यता में मनके कैसे बनाए जाते थे?

🔹मनके सेलखड़ी नामक पत्थर से बनाये जाते थे |
🔹 मनके कर्निलियन नामक पत्थर से भी बनाये जाते थे |
🔹मनके जैस्पर नमक पत्थर से भी बनाये जाते थे |
🔹 मनके ताबे के भी बनाये जाते थे |
🔹 मनके सोने के भी बनाये जाते थे |
🔹 मनके कांसे के भी बनाये जाते थे |
🔹 ये मनको का प्रयोग मालाओ में किया गया था और यह बहुत सुंदर होते थे।
🔹 मनके हड़प्पा सभ्यता की एक मुख्य सभ्यता है

 हडप्पा सभ्यता में व्यापर?

🔹 इससे यह पता लगता है कि की हडप्पा सभ्यता के समय में विदेशो से व्यापार होता था  मेसोपोटामिया और ओमान इसका उदाहरण है |
 हड़प्पा सभ्यता में व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली के आधार पर होता था |
🔹 ऐसा पाया गया है की हड़प्पा सभ्यता का ज्यादातर व्यापार मेसोपोटामिया से था |
🔹 ऐसे भी सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि की तांबे ओमान से आती थी |
🔹एक विशेष प्रकार का पात्र जिसे हड़प्पाई मर्तबान ने कहा है कि इसके ऊपर काली मिट्टी की एक मोती परत चढाई गयी थी, ओमानी स्थलों से मिली है |
🔹 सोना दक्षिण भारत से लाया जाता था |
🔹 कॉपर रेज के फार्मरी से भी लाया जाता था |
🔹 व्यापार के लिए मोहरें बहुत मददगार थी |
🔹 मुहरों से प्रेषित के बारे में पता चल जाता था |

 हडप्पा सभ्यता में माप तौल?

🔹 हड़प्पा सभ्यता में वस्तुओं को शौचालयने के लिए बाटों का प्रयोग किया जाता था |
🔹 छोटे बाटों से आभूषण और मनके ताले जाते थे |
🔹 बाटों को चर्ट नाम के पत्थर से बनाया जाता था |
🔹 हड़प्पा सभ्यता में बहुत सारे बाट मिले हैं

 हडप्पा सभ्यता में शवाधान?

🔹 हड़प्पा सभ्यता में शवो को दफनाया जाता था |
🔹 शवों के साथ मिटटी के बर्तन भी दफनाए जाते थे।
🔹 शवों के साथ गहने और मनके भी दफनाये जाते थे |
🔹 ऐसा माना जाता है कि शायद हड़प्पा सभ्यता के लोग पुनर्जन्म में पूरा विश्वास रखते थे |
🔹 बहुत सी खोज गयी कब्रों की गर्तों में से पता चला है की कुछ गर्तो की बनावट अलग थी |
🔹कुछ कुछ कब्रों की गर्तों को ईंटों से चिनवाया गया था जबकि कुछ को नहीं
🔹 हड़प्पा सभ्यता में कुछ जगह ऐसे प्रमाण मिले है की शवो को खुले में फेक दिया जाता था

भाग एक

Chapter 1 ईटें . मनके तथा अस्थियाँ ( हड़प्पा सभ्यता )

Chapter 2 राजा किसान और नगर ( आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ ( लगभग 600 ई . पू . से 600 ई . )


Chapter 3 बंधुत्व जाति तथा वर्ग - आरंभिक समाज ( लगभग 600 ई . पू . से 600 ई )

Chapter 4 विचारक , विश्वास और इमारतें - सांस्कृतिक विकास ( लगभग 600 ई . पू . से 600 ईसवी तक )


भाग दो 

Chapter 5 यात्रियों के नजरिए - समाज के बारे में उनकी समझ ( लगभग दसवीं से सत्रहवीं सदी तक )

Chapter 6 भक्ति सूफी परम्पराएँ - धार्मिक विश्वासों में बदलाव और श्रद्धा ग्रंथ ( लगभग आठवीं से अठारहवीं सदी तक )

Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर ( लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक )


Chapter 8 किसान , जमींदार और राज्य - कृषि समाज और मुगल साम्राज्य ( लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं सदी )


Chpater 9 राजा और विभिन्न वृतांत - मुगल दरबार ( लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं सदी )


भाग तीन

Chapter 10 उपनिवेशवाद और देहात - सरकारी अभिलेखों का अध्ययन

Chapter 11 विद्रोही और राज - 1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान

Chapter 12 औपनिवेशिक शहर - नगर - योजना , स्थापत्य

Chapter 13 महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन - सविनय अवज्ञा और उससे आगे


Chapter 14 विभाजन को समझना - राजनीति , स्मृति , अनुभव


Chapter 15 संविधान का निर्माण - एक नए युग की शुरूआत


1️⃣🔹हड़प्पा संस्कृति को सिंधु नदी की घाटी में फैले होने के कारण सिंधु घाटी की सभ्यता भी कहते हैं । पुरातात्विक संस्कृति शब्द का प्रयोग पुरावस्तुओं के ऐसे समूह के लिए करते है जो एक विशिष्ट शैली के होते है और सामान्यतया एक साथ , एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तथा काल - खण्ड से संबंधित पाए जाते हैं ।

2️⃣🔹इस सभ्यता का नामकरण हड़प्पा नामक स्थान जहाँ पर संस्कृति पहली बार खोजी गई थी के नाम पर किया गया है ।

3️⃣🔹हड़प्पा संस्कृति के दो प्रसिद्ध केन्द्र हड़प्पा और मोहनजोदड़ो हैं ।

4️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता की खोज 1921 - 22 में दया राम साहनी , रखालदास बनर्जी और सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में हुई ।

5️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता का काल ( विकसित सभ्यता ) 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है ।

6️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता की जानकारी के प्रमुख स्त्रोत - खुदाई में मिली इमारतें , मृदभाण्ड , औजार , आभूषण , मूर्तियाँ , मुहरें इत्यादि हैं ।

7️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता का विस्तार क्षेत्र - अफगानिस्तान , जम्मू , बलुचिस्तान ( पाकिस्तान ) गुजरात , राजस्थान , पश्चिमी उत्तर प्रदेश

8️⃣🔹इसके प्रमुख स्थल - नागेश्वर , बालाकोट , चन्हुदड़ो , कोटदीजी , धौलावीरा , लोथल , कालीबंगन , बनावली , राखीगढ़ी इत्यादि ।

9️⃣🔹यह एक नगरीय सभ्यता थी । इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसकी नगर निर्माण योजना है ।

1️⃣0️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता की बस्तियाँ दो भागों में विभाजित थी - दुर्ग तथा निचला शहर

1️⃣1️⃣🔹निचला शहर आवासीय भवनों के उदारहण प्रस्तुत करता है तथा दुर्ग पर बनी संरचनाओं का प्रयोग संभवतः विशिष्ट सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए किया जाता था ।

1️⃣2️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता में सड़कों तथा गलियों को एक ग्रिड पद्धति द्वारा बनाया गया था और ये एक दूसरे को समकोण पर काटती थी ।

1️⃣3️⃣🔹जल निकाल प्रणाली अद्भुत थी । घरो की नालियों को गली की नालियों से जोड़ा गया था । नालियाँ पक्की इटों से बनाई गई थी ।

1️⃣4️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता में गेहूँ जौ , दाल , सफेद चना तथा तिल जैसे खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल का अनुमान है ।

1️⃣5️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता में - भेड़ बकरी , भैंस , सुअर जैसे जानवरों के अस्तित्व का अनुमान है ।

1️⃣6️⃣🔹हड़प्पा में पाई जाने वाली लिपि को पढ़ने में विद्वान अभी तक असमर्थ है ।

1️⃣7️⃣🔹हड़प्पाप की लिपि दाई से बाई ओर लिखी जाती थी । इसमें चिन्हों की संख्या 375 से 400 के बीच थी ।

1️⃣8️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता में बाट का प्रयोग संभवतः आभूषणों व मनकों को तौलने के लिए होता था जो चर्ट नमक पत्थर से बनाए जाते थे ।

1️⃣9️⃣🔹चन्हुदड़ों शिल्प उत्पादन का एक प्रमुख केन्द्र था । शिल्प कार्यों में मनके बनाना , शंख की कटाई , धातु कर्म , मुहर निर्माण तथा चाट बाट बनाना सम्मिलित थे ।

2️⃣0️⃣🔹मनके कार्नीलियन , जैस्पर , स्फटिक , क्वार्टज़ , सेलखड़ी जैसे पत्थर , ताँबा , काँसा जैसी धातुओं तथा शंख , फयॉन्स तथा पकी मिट्टी के बने होते थे ।

2️⃣1️⃣🔹मुहरों और मुद्रांकनों का प्रयोग लंबी दूरी के संपर्कों को सुविधाजनक बनाने के लिए होता था ।

2️⃣2️⃣🔹हड़प्पा स्थलों से मिले शवाधानों में आमतौर पर मृतकों को गर्तों में दफनाया गया था । इनके साथ मूदभाण्ड आदि के अवशेष मिले हैं । शवाधान के अध्ययन से सामाजिक आर्थिक विभिन्नता का पता चलता है ।

2️⃣3️⃣🔹हड़प्पा सभ्यता का विनाश कई कारणों से हुआ जैसे , जलवायु परिवर्तन , वनों की कटाई , बाढ़ , नदियों का सूख जाना या नदियों का मार्ग बदलना , भूकम्प , बाहरी आक्रमण इत्यादि ।


भाग एक

Chapter 1 ईटें . मनके तथा अस्थियाँ ( हड़प्पा सभ्यता )

Chapter 2 राजा किसान और नगर ( आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ ( लगभग 600 ई . पू . से 600 ई . )


Chapter 3 बंधुत्व जाति तथा वर्ग - आरंभिक समाज ( लगभग 600 ई . पू . से 600 ई )

Chapter 4 विचारक , विश्वास और इमारतें - सांस्कृतिक विकास ( लगभग 600 ई . पू . से 600 ईसवी तक )


भाग दो 

Chapter 5 यात्रियों के नजरिए - समाज के बारे में उनकी समझ ( लगभग दसवीं से सत्रहवीं सदी तक )

Chapter 6 भक्ति सूफी परम्पराएँ - धार्मिक विश्वासों में बदलाव और श्रद्धा ग्रंथ ( लगभग आठवीं से अठारहवीं सदी तक )

Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर ( लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक )


Chapter 8 किसान , जमींदार और राज्य - कृषि समाज और मुगल साम्राज्य ( लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं सदी )


Chpater 9 राजा और विभिन्न वृतांत - मुगल दरबार ( लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं सदी )


भाग तीन

Chapter 10 उपनिवेशवाद और देहात - सरकारी अभिलेखों का अध्ययन

Chapter 11 विद्रोही और राज - 1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान

Chapter 12 औपनिवेशिक शहर - नगर - योजना , स्थापत्य

Chapter 13 महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन - सविनय अवज्ञा और उससे आगे


Chapter 14 विभाजन को समझना - राजनीति , स्मृति , अनुभव



Chapter 15 संविधान का निर्माण - एक नए युग की शुरूआत




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