Chapter=1 ((शारीरिक शिक्षा में बतलनी प्रवृत्तियाँ और कैरिबर))11th Class Physical Education Hindi Notes

पाठ = 1
शारीरिक शिक्षा में बतलनी प्रवृत्तियाँ और केरियर



1. शारीरिक शिक्षा का अर्थः - ( Meaning of Physical Education ) 

✳️शारीरिक शिक्षा , शिक्षा पद्धति का अभिनन अंग है जिसका उद्देश्य नागरिको को शारीरिक मानसिक , भावनात्मक तथा सामाजिक रूप से शारीरिक गतिविधियों के माध्यमों से . जो कि उनकी गतिविधियों के परिणामों को दृष्टिगत रखकर चुनी गई हो उन्हें योग्य बनाना है ।✳️



1.1 शारीरिक शिक्षा की परिभाषाः - ( Defination of Physical Education ) 

✳️वास्तव में शारीरिक शिक्षा शब्द बहुत कतिन एवं विस्तृत आधार वाला है । समय के साथ - साथ इसके अर्थ में भी बदलाव आया इसके अर्थ को निम्न परिभाषाएँ स्पष्ट करती है।✳️

1 . बारां ए . बुबर को अनुशार : " शारीरिक शिक्षा , शिक्षा पद्धति का एक अभिन्न अंग है , जिसका उद्देश्य नागरिकों को शारीरिक , मानसिक , भावनात्मक तथा सामाजिक रूप से शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से , जो गतिविधियों उनके परिणामों को दृष्टिगत रस्थकर चुनी गई हो , सक्षम बनाना है । " 

2 . कैसिडी के अनुसार : " शारीरिक लियाओं पर केन्द्रित अनुभवों द्वारा जो परिवर्तन मानव में आते हैं वे शारीरिक शिक्षा कहलाते हैं । " 



1.2 शारीरिक शिक्षा के लक्ष्य एवं उद्देश्य : ( Ais & Objective of Phy . Edu.)
✳️शारीरिक शिक्षा का लक्ष्य प्रत्येक बालक को शारीरिक , मानसिक और भावनात्मक रूम से स्वस्थ बनाना और उसमें नैतिक व सामाजिक गुगों का विकास करना चाहिए जो दूसरों के साथ खुशी से रहने व एक अच्छा नागरिक बनाने में सहायक हो । " शारीरिक शिक्षा के लक्ष्य एवं उद्देश्य:



1.3 शारीरिक शिक्षा की बदलती प्रवृतियाँ : 

✳️पृथ्वी के लोगों के लिए शारीरिक शिक्षा की धारणा नई नहीं है । ऐसा माना जाता है कि शारीरिक शिक्षा की जड़ें पुराने काल में भी मौजूद थी । उस समय इसका प्रयोग विभिन्न उद्देश्यों हेतु किया जाता था । अलग - अलग व्यक्तियों के लिए इसका अर्थ भी भिन्न - भिन्न था । इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि " शारीरिक शिक्षा " विस्तृत आधार वाला शब्द है । पुराने समय में शारीरिक शिक्षा जीवित रहने के लिए आवश्यक भी थी । शारीरिक शिक्षा की शुरूआत यूनान में की गई । सभ्यता में बदलाव आने के साथ - साथ शारीरिक शिक्षा का अर्थ भी बदलता गया , लेकिन इसके सही अर्थ को कोई नहीं समझ पाया । कोई इसे शारीरिक प्रशिक्षण कहता , कोई खेल , कोई खेल संस्कृति और कुछ व्यक्ति स्वास्थय शिक्षा और मनोरंजन समझते थे । लेकिन वास्तव में शारीरिक शिक्षा इनसे कहीं अधिक है । वर्तमान समय में शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा देने के प्रयासों को शारीरिक शिक्षा कहते है ।



1.4 शारीरिक शिक्षा में उपलब्ध विभिन्न पाठ्यक्रम : 

वर्तमान समय में अनेक विश्वविद्यालय , संस्थान , महाविद्यालय शारीरिक शिक्षा में कैरिअर की तैयारी के लिए अनेक कार्य कराते हैं , जैसे बी . पी . ई . / बी . पी . एड , सी . पी . एड . एम . ए . ( शारीरिक शिक्षा ) , एम . पी . ई . / एम . पी . एड . , बी . ए . ( शारीरिक शिक्षा ) , बी . एस . सी . ( खेल व शारीरिक शिक्षा ) , एम फिल . , डॉक्टरेट ( शारीरिक शिक्षा ) , प्रशिक्षण में डिप्लोमा कोर्स , डी . वाई . एड . ( योगा ) , पी . जी . डिप्लोमा इन योगा आदि । शारीरिक शिक्षा में डिग्री , डिप्लोमा व अन्य पाठ्यक्रमों संबंधी में दाखिले की विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है :










1.5 शारीरिक शिक्षा में करियर विकल्प ( Career options in Phy - Edu ) 


( 1 ) शिक्षण संबंधित कैरियर 

( i ) प्राथमिक विद्यालय स्तर ( ii ) माध्यमिक विद्यालय स्तर
 ( iii ) वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्तर ( iv ) महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर




( 2 ) प्रशिक्षण कैरियर

( 1 ) प्रशासन संबंधित कोर्स ( ii ) शारीरिक शिक्षा विभाग
( iii ) खेल विभाग ( iv ) औद्योगिक मनोरंजन 
( v ) खेल सुविधाओं का प्रबंधन 



( 3 ) स्वास्थ्य संबंधी कैरियर 

( i ) हेल्थ क्लिद ( ii ) एथलैटिक ट्रेनिंग 



( 4 ) प्रदर्शन सम्बन्धित कैरियर 

( i ) खिलाड़ी के रूप में ( ii ) अधिकारी के रूप में 




( 5 ) संचार माध्यमों में कैरियर 

( i ) खेल पत्रकारिता ( ii ) पुस्तक लेखन ( iii ) खेल फोटो ग्राफी ( iv ) पुस्तक प्रकाशन ( v ) खेल प्रसारण



व्यवहार कुशलता ( Soft Skill ) : 

✳️व्यवहार कुशलता वह कुशलता है जो अन्य लोगों के बारे में बताने में प्रयोग किया जाता है कि वे कैसे जीवन जी रहे है और काम के प्रति उनका दृष्टिकोण कैसा है । उनका दूसरे व्यक्तियों के साथ कैसा सम्बन्ध है । इसके लिए अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता है जैसे - लोगों के कौशल , पारस्परिक कौशल , सामाजिक कौशल और हस्तांतरणीयं कौशल ।✳️

1. संचार कौशल ( Commanication Skill ) : - मजबूत संचार कौशल वाले लोग रिश्तों का निर्माण कर सकते है । अच्छी तरह से सुनना और परिस्थितियों के अनुरूप संचार कौशल करना । अगर आप अपना कुछ समय संचार कौशल पर व्यतीत करते है तो वह अच्छा होता है । 

2. निर्णय लेने की विधि : - ( Making decisions ) - जीवन में व्यक्ति द्वारा मूल्यवान निर्णय लेने में सक्षम होना महत्त्व पूर्ण है । कभी - कभी वास्तविक निर्णय का जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता , मायने यह रखता है कि आपने क्या प्राप्त किया है और उसे प्राप्त करके आगे बढ़ गए है । 

3. स्वप्रेरणा ( Self Motivation ) : - जो लोग स्वंय से प्रेरित होते है वे खुद अपने - आप से मिलते हैं । उन्हें करीबी पर्यवेक्षण ( Class Supervision ) की आवश्यकता नहीं है । वे सबके साथ मिलकर काम करते हैं क्योंकि वे सकारात्मक है । यह आपके व्यक्तिगत लचीलेपन व अनुकूलनशीलता को बदलने के लिए भी काम करता है । 

4. नेतृत्व कौशल ( Leadership Skill ) : - यह एक साफॅट सिकल्स का सैट है जो कम कम किसी से खुद को विकसित करने की उपेक्षा करते है । बहुत से नेतृत्व कौशल के पाठ्यक्रम उपलब्ध है जिनमें लिखा गया है कि किस प्रकार अपने नेतृत्व कौशल विकसित किया जाए । 

5. साथ मिलकर काम करने का कौशल ( Team work Skill ) : - नेतृत्व कौशल की तरह ही बहुत से प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है जो टीम में अच्छी तरह से काम करना आपको सीखाते हैं । यह भी सुझाव देते है कि अच्छे संचार कौशल , विशेष रूप से अच्छे सुनने कौशल , एक साथ मिलकर तालमेल बनाकर लम्बे समय तक कार्य करने के कौशल आदि ।


हमारी website पर आने के लिए धन्यवाद।
Please share your experience
 

🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Share this

Related Posts

Previous
Next Post »