12 class history notes in hindi medium Chapter 1 Bricks, Beads and Bones The Harappan Civilisation विषय - 1 ईंटें , मनके तथा अस्थियाँ ( हड़प्पा सभ्यता )

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12 class history notes in hindi medium Chapter 1 Bricks, Beads and Bones The Harappan Civilisation विषय - 1 ईंटें , मनके तथा अस्थियाँ ( हड़प्पा सभ्यता )

CBSE Revision Notes in hindi for CBSE Class 12 History Bricks breads and bones Class 12 History ch01 Bricks breads and bones - The Story of the First Cities: Harappan Archaeology. Broad overview: Early urban centres. Story of discovery: Harappan civilization.

Class 12th History chapter 1 Bricks, Beads and Bones The Harappan Civilisation Notes in Hindi 

पाठ = 1  Chapter=1 ईंटे , मनके तथा अस्थियाँ(( Bricks, Beads And Bones)) ( हड़प्पा सभ्यता ) 12th class History Hindi Notes


📚 विषय - 1 📚
👉 ईंटें , मनके तथा अस्थियाँ ( हड़प्पा सभ्यता ) 👈

✳️ संस्कृति शब्द का अर्थ :-

🔹 पुरातत्वविद ' संस्कृति ' शब्द का प्रयोग पुरावस्तुओं के ऐसे समूह के लिए करते हैं जो एक विशिष्ट शैली के होते हैं और सामान्यतया एक साथ , एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तथा काल - खंड से संबद्ध पाए जाते हैं ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता का नामकरण :-

🔹  हड़प्पा नामक स्थान जहाँ यह संस्कृति पहली बार खोजी गई थी उसी के नाम पर किया गया है । इसका काल निर्धरण लगभग 2600 और 1900 ईसा पूर्व के बीच किया गया है ।

✳️ हड़प्पा संस्कृति काल :-

🔹  2600 से 1900 ईसा पूर्व

🔹  हड़प्पा संस्कृति के भाग / चरण :

👉 ( i ) आरंभिक हड़प्पा संस्कृति
👉 ( ii ) विकसित हड़प्पा संस्कृति
👉 ( iii ) परवर्ती हड़प्पा संस्कृति

🔹 B . C . ( Before Christ ) - ईसा पूर्व
🔹 A . D ( Ano Dominy ) - ईसा मसीह के जन्म वर्ष
🔹 B . P ( Before Present ) - आज से पहले


✳️ हड़प्पा सभ्यता को सिन्धुघाटी सभ्यता क्यों कहा जाता है ? 

🔹  इस सभ्यता को सिन्धुघाटी सभ्यता इसलिए कहा जाता है क्योकि यह सभ्यता सिन्धु नदी घाटी के आसपास फैली हुई थी ।  यह इलाका उपजाऊ था , हड़प्यावासी यहाँ पर खेती किया करते थे |

✳️ हड़प्पा सभ्यता की जानकारी के प्रमुख स्रोत :-

🔹 ( i ) आवास ( ii ) मृदभांड ( iii ) आभूषण , ( iv ) औजार और ( v ) मुहरें ( vi ) इमारतें और खुदाई से मिले सिक्के ।

✳️ सिंधु सभ्यता के निर्माता :-

🔹 सिंधु सभ्यता के अंतर्गत उत्खनन में मुख्य 4 प्रकार के अस्ति पंजर ( कंकाल ) मिले हैं

👉 ( 1 ) प्रोटो - आस्ट्रोलॉयड
👉 ( 2 ) भूमध्य सागरीय
👉 ( 3 ) अल्पाइन
👉 ( 4 ) मंगोलियन

🔹 इसके आधार पर यह सम्भावना स्वीकार की गई है । इसके निर्माण मे मित्रित प्रजातियों के लोगों का स्थान था वैसे तो इनका संस्थापक द्रविडा को माना गया है। जो बाद में दक्षिण भारत में पलायन कर गये ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल :-

🔹 हड़प्पा सभ्यता के कुछ स्थल वर्तमान में पाकिस्तान में है और बाकी स्थल भारत में है :-

🔹 नागेश्वर ( गुजरात )
🔹 बालाकोट ( पाकिस्तान )
🔹 चन्हुदड़ो ( पाकिस्तान )
🔹 कोटदीजी ( पाकिस्तान )
🔹 धौलावीरा ( गुजरात )
🔹 लोथल ( गुजरात )
🔹 कालीबंगन ( राजस्थान )
🔹 बनावली ( हरियाणा )
🔹 राखीगढ़ी ( हरियाणा )

✳️ हड़प्पा सभ्यता की बस्तियाँ :-

🔹 हड़प्पा सभ्यता की बस्तियाँ दो भागों में विभाजित थी

👉  ( i ) दुर्ग :- ये कच्ची इंटों की चबूतरे पर बनी होती थी | दुर्ग को दीवारों से घेरा गया था | दुर्ग पर बनी संरचनाओं का प्रयोग संभवत : विशिष्ट सार्वजानिक प्रयोग के लिए किया जाता था ।

👉 ( ii ) निचला शहर :- निचला शहर आवासीय भवनों के उदाहरण प्रस्तुत करता है । निचला शहर भी दीवार से घेरा गया था । इसके अतिरिक्त कई भवनों को ऊँचे चबूतरों पर बनाया गया था जो नींव का कार्य करते थे ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता की सडकों और गलियों की विशेषताएँ :-

🔹 हड़प्पा सभ्यता में सडकों तथा गलियों को लगभग एक ग्रिड , पद्धति पर बनाया गया था ।

🔹 ये एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं ।

🔹 जल निकास प्रणाली अनूठी थी घरो के गन्दे पानी की नालियों को गली की नालियों से जोड़ा गया था ।

🔹 सडकों के साथ - साथ नालियों को बनाया गया था |

🔹 सडकों और गलियों के अगल - बगल आवासों को बनाया गया था ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में भवन निर्माण :-

🔹 हड़प्पा सभ्यता में माकानो की योजना आगन पर आधारित थी ।

🔹 जिसमें शौचालय , स्नानागार , रसोईघर , सयनकक्ष आदि के अतरिक्त अन्य कमरे भी मिले है ।

🔹 मजबूती के लिये नीव नर्माण की जाती थी । सड़को के किनारे माकान बने थे जिनसे सुविधा हवा , सफाई , प्रकाश की पूर्ण व्यवस्या होती थी ।

🔹 मकान जमीन से ऊँचाई पर बनाये जाते थे । मकानों के दरवाजे सड़को की ओर खुले रहते थे । मकानों के प्रवेश द्वार मुख्य मार्ग की आपेक्षा गली की ओर खुले थे । जिसके कारण बाहरी हलचल , शोरगुल एवं प्रदूषण से सुरक्षित रह होगा ।

🔹 सड़को के किनारे - किनारे पानी की निकासी के लिए नालियाँ बनी होती थी । नालियो को ढकने की व्यवस्था होती थी ।

🔹 नालियो को फर्श से ढखा जाता था। नालियो में थोड़ी - थोड़ी दूर पर शोषक कूप लगे रहते थे । जिनमें गंदगी रुकी रहती थी । पक्की ईटो का प्रयोग बहुत अधिक मात्रा में किया जाता था ।


✳️ हड़प्पा सभ्यता में सार्वजनिक भवन :-

🔹 सिंधु घाटी सभ्यता को दो भागों में विभाजित किया गया । जिसके ऊपरी हिस्से में सार्वजनिक भवन व निचले हिस्से में व्यक्तिगत आवास बने हुए थे ।

🔹 उत्खनन में सावर्जनिक या राज्यकीय भवनों के अवशेष मिले हैं । एक अवशेष मोहनजोदड़ो से मिला है । जो 70 मीटर लम्बा और 24 मीटर चौडा है । यह इस्मार्क उस काल की संपन्नता का परिच्यक है । यहाँ पर ही 71 मीटर लंबा व इतना ही चौड़ा एक वर्गाकार कक्ष का अवशेष प्राप्त हुआ है । जिसमे 20 सतम्भ थे ।

🔹 एक अनुमान के अनुसार इस भवन का उपयोग आपसी विचार विमर्श धार्मिक आयोजन , सामाजिक आयोजन के लिए किया जाता होगा ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में विशाल स्नानागार:-

🔹 स्नानागार का जलाशय किले में स्थित था । 11.88 मीटर लंबा 7.01 मीटर चौड़ा 2.43 मीटर गेहरा इसके तल पर सीढ़िया बनी हुई है । यह सीडिया पक्की ईटो से बनाई गई है

🔹 स्नान कुड़ के चारो और कमरे बने हुए है और बराऊनदे भी बनाये गए है । स्नान कुंड के कमरे के समीप एक कुआ बना हुआ है । जिससे पानी कुंड में आता था और कुंड के गन्दे पानी की निकासी एक अन्य दरवाजे ( द्वार ) से की जाती थी । गंदा पानी फिर बड़ी नालियो के माध्यम से शहर से बाहर निकल जाता ।

🔹 स्नानागार की दीवारों के निर्माण में सीलन से बचने के लिए डावर या तारकोल का प्रयोग किया जाता था । पूरे स्नानागार में 6 प्रवेश द्वार होते थे । स्नानागार में गर्म पानी की व्यवस्था भी होती थी ।

नोट :- 👉 इस स्नानागार के बारेे में अमेस्ट मैके कहते हैं कि यह स्नानागार प्रोहित के स्नान के लिये होता था ।


✳️ हड़प्पा सभ्यता में जल निकास प्रणाली :-

🔹 हड़प्पा संस्कृति नगरीय थी । इन लोगो का जीवन स्तर उच्च था । घरो का गंदा पानी सड़को के किनारे बनी हुई नालियो से लेकर शहर के बाहर हो जाता था । इन नालियो में पक्की ईटो का प्रयोग किया जाता था । इनका पिलास्टर किया जाता था । जिससे नालियो को कोई नुकसान न पहुंचे इसलिए पिलास्टर के लिए चुना , मिट्टी , जिप्सम का प्रयोग किया जाता था ।

नोट :- प्रणे रामचरण शर्मा की मान्यता है कि कंश युग की किसी भी दूसरी सभ्यता ने सफाई व स्वास्थ को इतना महत्व नही दिया जितना हडप्पा देश के वासियो ने दिया ।

नोट :- बहुतायत सेे पक्की ईटो का प्रयोग मुख्य रूप से चार प्रकार की ईटे प्रयुक्त की जाती थी  ।

👉 1️⃣ आयताकार = 4:2:1
👉 2️⃣ L एल प्रकार की ईटे = इन ईटो का प्रयोग कोने में किया जाता था ।
👉 3️⃣ नोकदार ईटे = इनका प्रयोग कुओ में किया जाता है ।
👉 4️⃣ T टी प्रकार की ईटो = इनका प्रयोग सीढ़ियों में किया जाता था ।

🔹 अलकृत ईटो से निर्मित फर्श कालीबंगा से मिला है ।

🔹 ईटो पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजे का निशान मिला है । यह चन्हूदड़ों सभ्यता से मिला है ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक जीवन :-

🔹 सामाजिक संगठन
🔹 भोजन
🔹 वस्त्र
🔹आभूषण व सौंदर्य प्रर्दशन
🔹 मनोरजन
🔹प्रौद्योगिकी
🔹 मृतक कर्म
🔹चिकित्सा विज्ञान

✳️ हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक सगठन :-

🔹इतिहासकार गार्नर चाइल्ड ने समाज को चार भागों में विभाजित किया है :-

👉1️⃣ शिक्षित वर्ग :- प्रोहित , चिकित्सा , जादूगर , जोतिस
👉2️⃣ योद्धा / सैनिक :- इनकी पुष्टि दुर्गों में उपस्थिति के अवशेषों से मिले है ।
👉 3️⃣व्यपारि व दस्तक्षार :- बुनकर , कुमार , सुवर्णकर
👉 4️⃣श्रमिक एवं कृषक :- टोकरी बनाने वाले , मछली मारने वाले

✳️ हड़प्पा सभ्यता में भोजन :-

🔹 गेहूँ , चावल , जौ , तेल , मटर , सब्जियां वह मासाहारी भी थे । कछुआ , गड़ियाल , भेड़ , बकरी , सुअर व मछली का माँस इत्यादि खाते थे ।

🔹 इस काल मे चित्रो में खजूर , अनार , तरबूज , नींबू , नारियल आदि के फलों का चित्रण किया जाता था । वह इन फ़लो का उपयोग भोजन के रूप में करते थे

🔹 इस प्रकार हड़प्पा वासी माँसाहारी व शाकाहारी दोनों ही थे ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में वस्त्र :-

🔹 वह भिन्नन - भिन्नन ऋतुओ में अलग - अलग वस्त्र पहनते थे । महिला और पुरुष के वस्त्रों में भिन्नता पाई जाती थी ।

🔹 पुरुषो में धोती , पगड़ी , दशाले ( कुर्ता ) , एव महिलाओं में घागरा में साड़ी पहनती थी ।

नोट :- चन्हूदड़ों से प्राप्त मूर्ति में पगड़ी मिली है ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में आभूषण एव सौंदर्य प्रसाधन :-

🔹 स्त्री व पुरुष दोनों ही आभूषण पहनते थे । व दोनों ही सौंदर्य प्रसाधन के सामग्री का प्रयोग करते थे । आँगूठी , कान की बाली , चुडिया , बाजू बंद , हार , धनी लोग हाथो में सोने जैसी कीमती धातू के आभूषण पहनते थे । जबकि सामान्य लोग ताँबे , काँसा तथा हड्ड़ी के बने आभूषण पहनते थे ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में मनोरंजन :-

🔹 मछली पकड़ना , शिकार करना उनका प्रिय मनोरंजन था । जानवरो की दौड़ , जुनझुने , सीटिया तथा शतरंज के खेल उनके मनोरंजन के साधन थे ।

🔹 इसके अलावा पत्थर तथा सीप की गोलियों से खेल खेलते थे । खुदाई में पशुओं की मूर्ति , बेल गाड़िया , दो पहिये वाला तांबे का रथ मिला है । नत्यागना कि मूर्ति भी मिली है । जिसमे पता चलता है कि हड़प्पावासी भी नाच - गाना करते थे ।


✳️ हड़प्पा सभ्यता में म्रतक कर्म ( अंत्योष्टि क्रिया ) :-

🔹 हड़प्पा कालीन नगरो ( मोहनजोदड़ो , बनावली , हडप्पा , कालीबंगा , ) आदि में शमसान के अवशेष मिले हैं ।

🔹 सर जॉन मार्शल के अनुसार इसे तीन भागो में विभाजित किया है ।

👉 1 ) पूर्ण समाधिकरण / शवाधान
👉 2 ) आंशिक समाधिकरण / शवाधान
👉 3 ) दाह कर्म / क्लेश शवाधान

✳️ पूर्ण शवाधान :- 

🔹 शव को उत्तर से लेकर दक्षिण की ओर दफनाया जाता था ।

🔹 नोट :- हडप्पा में एक कब्र ऐसी मिली है जिसे दक्षिण से उत्तर की ओर दफनाया गया है । और सबको दाबूत में रखा गया है । इसकी पहचान विशेष कब्र से की गई हैं ।

🔹नोट :- लोथल में पूर्व से पश्चिम की ओर दफनाने का अवशेष मिला है । तथा शव करवट के रूप में हैं।

🔹 नोट :- लोथल से ही युग्म शव ( स्त्री , पुरुष ) मिला है । इससे पता चलता है कि उस समय सती प्रथा प्रचलित थी ।

🔹 सबसे बड़ा कबरिस्तान हडप्पा से मिला है जिसे R37 की संज्ञा दी गई है ।

🔹 हडप्पा संस्कृति में एक ओर कब्रिस्तान मिला है जिसे  H कब्रिस्तान की संज्ञा दी गयी है।

✳️ आंशिक शवाधान :-

🔹 शव को पशु - पक्षियों द्वारा खाने के बाद बचे हुए अवशेषों को दफना देना ।

✳️ क्लेश शवाधान / दाह कर्म :-

🔹 दाह के पश्चात बचे हुए अवशेष को किसी कलश या मंजूषा ( बर्तन ) में रखकर दफना देना ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में चिकित्सा विज्ञान  :-

🔹 जड़ी - बूटी , फल , वृक्षों के पत्त्ते , विशिष्ट प्रजाति के वृक्षों के फूल , रस का सेवन करते थे । हिरणो के सींगो से चूर्ण बनाया जाता था । समुद्र के फेन ( झांग ) से भी औषधि बनाई जाती थी । शिलाजीत भी पाई जाती थी ।


✳️ हड़प्पा सभ्यता में आर्थिक जीवन  :-

👉 1 ) कृषि
👉 2 ) पशु - पालन
👉 3 ) व्यपार
👉 4 ) कुटीर उद्योग
👉 5 ) माप तोल के बाट

✳️ कृषि :- 

🔹 जौ , गेहूँ , मटर , खजूर ,कपास , तरबूज , तिल , राई , सरसो जैसे फसले उगाई जाती थी । इनका उत्पादन फावड़े से तो नही मिला। लेकिन हल के अवशेष कालीबंगा से मिले हैं । फसल को पाषण के काटने के लिये हासिये का प्रयोग किया जाता था ।

🔹 आनाज को धोने के लिए दो पाहिये वाली गाड़ी का प्रयोग किया जाता था । बैल सिंधु सभय्ता का सबसे प्रमुख पशु था ।

✳️ पशु - पालन :-

🔹 बकरी , भेड़ , सुअर , भैस , बैल , पालते थे बैल के रूप में सांड प्रमुख पशु था । इसके अतिरिक्त हाथी ओर पाले जाते थे । किंतु घोड़े से वो परिचित नही थे । वे कुत्तो और बिल्ली पालते थे । साथ ही तोता , मयूर मूंगे , भालू , चीता , खरगोश , बत्तख , हिरण आदि के चित्र उनकी मूर्तियों के चित्रों में अंकित है । परंतु अवशेष नही है ।

✳️ व्यपार :-

🔹 हड़प्पा के लोग व्यपार को अधिक महत्व देते थे ।

🔹 नाप के लिए शीशे की पटरी का प्रयोग करते थे ।

🔹 चन्हुदड़ो में उत्खनन से प्राप्त पत्थरों के एक वाट का प्रयोग कारखाना मिला है ।

🔹 समाज मे अनेक व्यापारिक वर्गों के लिए रहते थे । जिनका कार्य केवल व्यपार या व्यवसाय से होता था । इनमे कुमार , बढई , सुनार आदि प्रमुख थे।

🔹 आर्थिक व्यपार के अतरिक्त इनका ईरान , अफगानिस्तान , मेसोपोटामिया , इराक के साथ व्यपारिक सम्बंध थे ।

🔹 अतरिक्त व्यपार वस्तु विलियम के माध्यम से जिनकी बाहरी व्यपार मोहरो से किया जाता था । दूर देशो में जहाज रानी का प्रयोग किया करते थे।

✳️ कुटीर उद्योग :- 

🔹 कुमारो के द्वारा चाक से निर्मित मिट्टी की मूर्तियां , खिलोने , बर्तन के अतिरिक्त ईटो का निर्माण भी बड़े पैमाने पर किया जाता था ।

🔹 इस काल मे हाथी दाँत , सीपियों धातु के विभिन्न आभूषण बनाये जाते ।

✳️ माप तोल वाट :-

🔹 तोल के लिए तराज़ू व वाट सम्मिलित थे । चिकने पत्थर से वाट का निर्माण किया जाता था ( चर्ट ) नामक पत्थर से वाट का निर्माण किया जाता था । सबसे बड़े वाट का वजन 375 ग्राम था सबसे छोटे का वजन 0.87 ग्राम था।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में धार्मिक जीवन  :-

🔹 मात्र देवी की उपासना ।
🔹 शिव या परम पुरुष की आराधना ।
🔹 वृक्ष ओर पशु पूजा ।
🔹 लिंग पूजा ।

✳️ मात्र देवी की पूजा या उपासना :-

🔹 हड़प्पा संस्कृति में मन्दिरो का अभाव था । उत्खनन में ऐसा कोई भवन प्राप्त नही हुआ जिसे देवालय की संज्ञा दी जा सके । इस काल मे मिट्टी तथा धातु की अनेक नग्न नारी की मूर्तियां मिली है ।

🔹 मात्र देवी के अनेक चित्र ताबीजों में मिट्टी के बर्तनों में तथा मोहरो में अंकित है । इसमें यह पता चलता है कि यहाँ पर मात्र देवी की उपासना की जाती है।

नोट :- प्रो आर एस त्रिपाठी की मान्यता है कि पूजा के क्षेत्र में सर्वाधिक प्रतिष्ठा मात्र शक्ति की थी । जिसकी अराजना प्रचीन काल से ईरान से लेकर इंजियन सागर तक के सारे देश मे होते थे ।

🔹 मात्र देवी श्रिष्टि की उत्पत्ति व वनस्पति के फैलाव में देवी का योगदान स्वीकार किया गया है ।

🔹 इस समय मात्र देवी को प्रसनन करने के लिए बलि प्रथा का प्रचलन था । पूजा , आराधना , नृत्य , संगीत बली देकर की जाती थी । इस काल मे मन्दिरो के अवशेष नही मिले हैं ।

✳️ शिव या परम - पुरुष की उपासना :-

🔹 उत्खनन में अर्नेष्ट मैके को एक ऐसी मुद्रा मिली जिस पर पुरुष के चित्र में शिर के दोनों और सींघ है । इस योगी के तीन मुख है । सांत व गम्भीर मुद्रा में है । इसके वायी ओर जंगली भैसा और गेड़ा जबकि दायीं ओर शेर ओर
हाथी है । सामने हिरण है इस ध्यानमग्न योगी के सिर के ऊपर पाँच शब्द लिखे हुए है । जिन्हें अब तक पढ़ा नही जा सका है । ( परम पुरुष के रूप में पशुपति शिव की आराधना )

✳️ वृक्ष और पशु पूजा :- 

🔹 अनेक मोहोरो में पीपल तथा उसकी पत्तियों के चित्रों का अंकन है । जिसमे ऐसा लगता हैं कि वह लोग वृक्ष पूजा के अंतर्गत पीपल की पूजा करते थे वर्तमान में भी पीपल की वृक्ष पूजा की जाती है । इनके अतिरिक्त अनेक मोहोरो पर सांड औऱ बैल चित्रित अंकित है ।

🔹 वर्तमान में शिव भगवान के साथ सांड ( नन्दी ) की पूजा पूरे भारत वर्ष में कई जाती है ।

✳️ लिंग पूजा :- 

🔹 उत्खनन में लिंग पूजा प्रस्तर ( पत्थर ) के लिंग मिले है इससे अनुमान लगाया जाता है कि लिंग पूजा का प्रचलन हड़प्पा संस्कृति में था । इनमे से कुछ लिंगो के शीर्ष गोल आकृति नोकदार कुछ लिंग एक या दो इंच के कुछ तो चार फीट के भी मिले है । स्वाष्टिक चिन्ह एव क्रास तथा पिलस हड़प्पा काल के पवित्र चिन्ह है । जो आज भी पवित्र माने जाते हैं ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में राजनीति जीवन  :-

🔹यहाँ पर रानीतिक जीवन व राजनीतिक व्यवस्था की जानकारी बहुत कम मिलती है । इतिहासकार हनटर की मान्यता है कि मोहनजोदड़ो में शासन व्यवस्था लोकतंत्रात्मक थी वह राजतंत्रात्मक नही थी ।

🔹 इतिहासकार व्हीलर की मान्यता है कि मोहनजोदड़ो का शासन व्यवस्था पुरोहितो व धर्मगुरु के हाथों में थी।

🔹 वे जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करते थे । नगर निर्माण व भवन निर्माण को देखकर ऐसा लगता है की वहाँ पर नगर पालिका रही होगी ।

✳️ हड़प्पा सभ्यता में कला का विकास  :-

🔹 मूर्तिकला
🔹 धातुकला
🔹 वस्त्र निर्माण कला
🔹 चित्रकला
🔹 पात्र निर्माण कला
🔹 नित्य तथा संगीत कला
🔹 मुद्रा कला
🔹 ताम्र निर्माण कला
🔹 लेखन कला

✳️ मूर्तिकला :-

🔹 उत्खनन में प्राप्त पत्थर की मूर्तियां कांसे की मूर्तियां इसमे अंगों की छलक दिखाई गई है । एक नृतकी की मूर्ति बहुत ही सुंदर व आकर्षक है इन मूर्तियों में गाल की हड्ड़ी बहुत ही सुंदर व आकर्षक है आँखे तिरछी व पतली है गर्दन छोटी व पतली है ।

✳️  धातुकला :-

🔹 सोना , चाँदी , ताँबा , आदि के आभूषण मिले हैं ।

✳️ वस्त्र निर्माण कला :-

🔹 उत्खनन में चरखा मिला है । जिससे पता चलता है की सूत काटने का काम में वहाँ के लोग निपुण थे । सूती , ऊनी , रेशम वस्त्र पहनते थे।

✳️ चित्रकला :-

🔹 मोहोरो पर साँड़ के चित्र , भैसे के चित्र , वृक्ष के चित्र इसका मतलब वो लोग चित्रकला में निपुण थे।

✳️ पात्र - निर्माण कला :-

🔹 मिट्टी के पात्र बनाने में , पानी भरने के लिए तरह - तरह के घड़े , अनाज रखने के लिए छोटे अनेक प्रकार के भाण्ड , मिट्टी के खिलौने इसका मतलब वो पात्र - निर्माण कला में निपुण थे ।

✳️ नृत्य तथा संगीत कला :-

🔹 नृत्यांगना की मूर्ति मिली है पात्रो पर तलवे तथा ढोलक के चित्र मिलते हैं ।

✳️ मुद्रा कला :-

🔹 उत्खनन में भिन्न - भिन्न प्रकार के पत्थरो , धातुओं तथा हाथी दाँत व मिट्टी की 600 मोहरे मिली है । जिन पर एक ओर पशुओं के चित्र ओर दूसरी ओर लेख मिले है।

✳️ ताम्र निर्माण कला :- 

🔹 उत्खनन में अनेक ताम्र पत्र मिले हैं जो वर्गाकार व आयताकार के है । इनमे पशुओं व मनुष्य के चित्र मिले हैं । पशुओं में बैल , भैसा , गेड़ा , सांड , हाथी , शेर आदि मनुष्य में योगी के चित्र मिले हैं ।

✳️ लेखन कला :- 

🔹 उत्खनन कोई भी लिखित शिलालेख या ताम्रपत्र नही मिला है । लेकिन फिर भी विद्वानों में मतभेद है ( लिपि में के बारे में यह लिपि चित्रतात्मक थी । तथा दाये से बाए व बाए से दाये दोनों ओर लिखी जाती थी ।

✳️ हड़प्पाई लिपि की विशेषताएँ :-


🔹  यह लिपि दाईं से बाए ओर लिखी जाती थी |
🔹 यह लिपि चित्रात्मक लिपि थी |
🔹इस लिपि में 375 - 400 चिन्ह थे |
🔹 इस लिपि को आजतक कोई समझ नहीं पाया
🔹 यह एक रहस्यमई लिपि है |
🔹 इसी के कारण हडप्पा सभ्यता के बारे में हमे ज्यादा जानकारी नही मिल सकी क्योकि हडप्पा की लिपि को आजतक विद्वान् समझ नही पाए ।

✳️ हडप्पा सभ्यता में शिल्पकला :-

🔹 शिल्प कार्य का अर्थ होता है शिल्प से जुड़े कार्य करना जैसे :-

🔹 मनके बनाना ।
🔹शंख की कटाई करना ।
🔹 धातु से जुड़े काम करना ।
🔹 मुहरे बनाना ।
🔹बाट बनाना ।
🔹चन्हुदड़ो ऐसी जगह थी जहाँ के लोग लगभग पूरी तरह से शिल्पउत्पादन के कार्य करते थे |
🔹 चन्हुदड़ो में कुछ ऐसी चीज़े मिली है जिससे पता लगता है की यहाँ पर शिल्प उत्पादन बडे पैमाने पर होता था ।
🔹 हड़प्पाई मोहरे काफी मात्रा में पाई गई है ।
🔹  हड़प्पाई लोग कांसे का प्रयोग करते थे ।
🔹 काँसा तांबा और टिन को मिलाकर बनाई गई एक मिश्रधातु है ।

✳️ हडप्पा सभ्यता में मनके कैसे बनाए जाते थे ? 

🔹  मनके सेलखड़ी नामक पत्थर से बनाये जाते थे ।
🔹  मनके कर्निलियन नामक पत्थर से भी बनाये जाते थे |
🔹  मनके जैसपर नमक पत्थर से भी बनाये जाते थे |
🔹  मनके ताबे के भी बनाये जाते थे ।
🔹 मनके सोने के भी बनाये जाते थे ।
🔹 मनके कांसे के भी बनाये जाते थे ।
🔹 इन मनको का प्रयोग मालाओ में किया जाता था तथा यह बहुत सुंदर होते थे ।
🔹 मनके हड़प्पा सभ्यता की एक मुख्य सभ्यता है।

✳️ हड़प्पा सभय्ता के पतन के कारण :-

🔹जल वायु परिवर्तन ।
🔹 प्राकृतिक आपदा ।
🔹 भूकंप ।
🔹 आकाल।
🔹 महामारी ।
🔹 बाहरी आक्रमण ( आर्य जाति के आक्रमण ).
🔹 वनों की कटाई ।
🔹 नदियों का सूखना ।
🔹 नदियों का मार्ग बदल जाना ।
🔹 बाढो का आना ( दामोदर , कोसी , महानदी ) बाढ़ की प्रसिद्ध नदी ।

नोट :- पिंगट एवं व्हीलर आर्य जाति के आक्रमण ऋग्वेद ( सबसे प्राचीन वेद ) में आर्यो द्वारा हरियूषिया को नष्ट करने का उल्लेख है ।
वैदिक साहित्य में हड़प्पा को हरियूषिया कहा जाता है ।

🔹 सर जॉन मार्शल , अर्नेष्ट मैर्के , SR राव इनके अनुसार नदियों में आने वाली बाढ़ का अनुमान।

🔹 अल्मानन्द घोष , डी पी अग्रवाल के अनुसार जलवायु परिवर्तन ।

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